- NEET-UG 2026 में जबलपुर के आर्यमन सोलंकी ने ऑल इंडिया रैंक 46 प्राप्त कर मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है.
- इस वर्ष करीब 20 लाख विद्यार्थियों ने NEET-UG परीक्षा दी जिसमें 11.21 लाख से अधिक अभ्यर्थी क्वालिफाई हुए हैं.
- आर्यमन ने सफलता का श्रेय पढ़ाई के प्रति जुनून और रुचि को दिया, उन्होंने वही विषय अधिक ध्यान से पढ़े.
NEET-UG 2026 के रिजल्ट में मध्य प्रदेश के जबलपुर ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का दम दिखाया है. शहर के आर्यमन सोलंकी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में टॉप किया है और ऑल इंडिया रैंक 46 हासिल की है. खास बात यह है कि आर्यमन अपनी सफलता का श्रेय किसी विशेष रणनीति को नहीं, बल्कि पढ़ाई के प्रति अपने जुनून को देते हैं.
उनका कहना है कि उन्होंने वही विषय और टॉपिक्स ज्यादा ध्यान से पढ़े, जिन्हें पढ़ने में उन्हें आनंद आता था. यही सरल सोच आज उन्हें देश के टॉप मेडिकल अभ्यर्थियों की सूची में लेकर आई है. उनकी सफलता न सिर्फ छात्रों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी बताती है कि कठिन परीक्षाओं में लगातार मेहनत और रुचि के साथ पढ़ाई करने से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं. आर्यमन सोलंकी की सफलता उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखते हैं.
NEET-UG 2026 में हासिल की शानदार रैंक
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 का रिजल्ट जारी हो गया है. इस वर्ष करीब 20 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया था. इनमें से 11.21 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने मेडिकल, डेंटल, आयुष और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए क्वालिफाई किया है. इसी परीक्षा में जबलपुर के आर्यमन सोलंकी ने ऑल इंडिया रैंक 46 हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया.
आर्यमन ने सफलता का मंत्र बताया
अपनी उपलब्धि पर आर्यमन ने कहा कि उन्होंने कभी पढ़ाई को बोझ नहीं माना. उनका मानना है कि जिस विषय को पढ़ने में रुचि हो, उसे बेहतर तरीके से समझा और याद किया जा सकता है. उन्होंने कहा, "मैं वही पढ़ता रहा जो मुझे अच्छा लगता था. शायद यही मेरी सफलता का सबसे बड़ा कारण है."
अच्छे प्रदर्शन के बावजूद थोड़े मायूस
बेहतरीन रैंक मिलने के बावजूद आर्यमन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने बताया कि हाल ही में रद्द हुए परीक्षा पेपर में उनके करीब 710 अंक आने की उम्मीद थी. हालांकि इस बार उन्हें 696 अंक मिले हैं, जो एक शानदार स्कोर है. आर्यमन का कहना है कि इन अंकों के आधार पर उन्हें दिल्ली एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश मिलने की संभावना है.
न्यूरोलॉजिस्ट बनने का है सपना
आर्यमन भविष्य में पिता की तरह न्यूरोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं. उनका कहना है कि वे चिकित्सा क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर मरीजों की सेवा करना चाहते हैं. परिवार में चिकित्सा क्षेत्र का माहौल होने की वजह से बचपन से ही उनका रुझान इस दिशा में रहा है.
डॉक्टरों से भरा हैं परिवार
आर्यमन के पिता डॉ. फरिंद्र सिंह सोलंकी जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट हैं. जबलपुर में हुए पहले अंगदान अभियान से जुड़े मेडिकल दल का भी वे हिस्सा रह चुके हैं. बेटे की सफलता पर उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि आर्यमन अपनी पसंद का रास्ता चुने और जीवन में खुश रहे. वहीं उनकी मां डॉ. अनुपमा सोलंकी गायनाकोलॉजिस्ट हैं, जबकि उनकी बहन भी मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रही है.
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