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रायपुर घूमने आया, भिलाई में सीखी ड्राइविंग, खूंखार नक्सली पापा राव के अर्बन कनेक्शन की पूरी कहानी

Naxalite Papa Rao: खूंखार नक्सली पापा राव ने मुख्यधारा में लौटने के बाद NDTV से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने बताया कि सुरक्षा बल के कैंपों पर हमला करने के लिए जीप चलाने व अन्य गाड़ियां चलाने की जरूरत पड़ती है. इसके लिए ड्राइविंग सीखना जरूरी है. इसीलिए भिलाई में रहकर मैंने ड्राइविंग सिखा था.

रायपुर घूमने आया, भिलाई में सीखी ड्राइविंग, खूंखार नक्सली पापा राव के अर्बन कनेक्शन की पूरी कहानी

Naxalite Papa Rao Exclusive: छत्तीसगढ़ में अंतिम बच्चे सबसे बड़े नक्सल लीडर सुन्नम चन्द्रया उर्फ़ चन्द्रन्ना उर्फ पापा राव के पुनर्वास के बाद नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं. करीब 40 वर्षों तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहे पापा राव का शहरी नेटवर्क भी काफी तगड़ा था. जंगलों में दहशत का पर्याय रहा पापा राव छत्तीसगढ़ के जगदलपुर, रायपुर, भिलाई जैसे शहरों में आसानी से आना-जाना करता रहा और यहां रहता भी था. इस बात का खुलासा खुद पापा राव ने किया है.

पापा राव ने NDTV पर किए कई बड़े खुलासे

दंडकारण स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) सदस्य और नेशनल पार्क एरिया कमेटी का लीडर पापा राव ने अपनी पूरी टीम के साथ मुख्य धारा में पुनर्वास कर लिया है. पापा राव ने एनडीटीवी से बातचीत में कई बड़े खुलासे किए. पापा राव ने बताया कि वासी के दशक से नक्सली संगठन का हिस्सा रहा. पहले वह अल्पकालिक सदस्य था, लेकिन 1994 से हुआ संगठन का पूर्णकालिक सदस्य बन गया. इसके बाद संगठन के विकास और विस्तार में वह अहम भूमिका निभाने लगा. 

भिलाई में सीखी ड्राइविंग 

पापा राव एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हुए वह साल 2001 में जगदलपुर रायपुर और भिलाई की यात्रा करता रहा. इसका उद्देश्य था कि शहर में लोग कैसे रहते हैं और वहां कैसे संगठन का विस्तार किया जा सकता है... इस पर काम किया जाए. भिलाई में 3 महीने तक रहकर उसने ड्राइविंग भी सीखी थी. पापा राव के साथ उसका एक अन्य नक्सली साथी भी भिलाई में रहकर ड्राइविंग सीखा था.

पापा राव ने बताया कि संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने कहा था कि कई बार सुरक्षा बल के कैंपों पर हमला करने के लिए जीप चलाने व अन्य गाड़ियां चलाने की जरूरत पड़ती हैं. इसके लिए ड्राइविंग सीखना जरूरी है. इसीलिए भिलाई में रहकर ड्राइविंग सिखा था. 3 महीने तक भिलाई के एक डेरा में रहकर वह ड्राइविंग सीखता रहा. उसके भिलाई में रहने की भनक पुलिस व सुरक्षा एजेंसी को कभी नहीं लग पाई. उसको ड्राइविंग सिखाने वाले को भी यह नहीं पता था कि वह नक्सली संगठन से जुड़ा है. 

बता दें कि नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को लेकर लगातार छत्तीसगढ़ में सवाल उठता रहा है. अलग-अलग समय पर रायपुर बिलासपुर और भिलाई जैसे बड़े शहरों से नक्सली समर्थक या खुद नक्सली भी गिरफ्तार होते रहे हैं.

छत्तीसगढ़ से नीलेश त्रिपाठी की रिपोर्ट
 

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