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MP के मंत्रियों का फीडबैक दिल्ली पहुंचा; NDTV से बोले हेमंत खंडेलवाल -कौन कैसा काम कर रहा है सबको पता है

मध्यप्रदेश में बीजेपी सरकार और संगठन को लेकर हेमंत खंडेलवाल ने NDTV से बेबाकी से बात की. उन्होंने कहा कि मंत्रियों के परफॉर्मेंस का फीडबैक दिल्ली पहुंच चुका है. इसके साथ ही उन्होंने अफसरशाही, 2028 की चुनौतियों और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना सहित कई बड़े मुद्दों पर सरकार और संगठन का रुख साफ किया.

MP के मंत्रियों का फीडबैक दिल्ली पहुंचा; NDTV से बोले हेमंत खंडेलवाल -कौन कैसा काम कर रहा है सबको पता है

प्रदेश बीजेपी की कमान अब एक ऐसे नेता के हाथ में है, जिनके सामने सिर्फ संगठन संभालने की नहीं, बल्कि 2028 में होने वाले चुनाव की जीत की नींव रखने की चुनौती भी है.सत्ता है,संगठन है, लेकिन सवाल भी कम नहीं हैं. इन्हीं तमाम मुद्दों पर मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से NDTV के स्थानीय संपादक अनुराग द्वारी ने बात की 

सवाल: एक साल बाद, आप खुद को संगठन का अध्यक्ष मानते हैं या सरकार का साइलेंट ऑडिटर?

हेमंत खंडेलवाल: निश्चित तौर पर मैं संगठन से जुड़ा कार्यकर्ता हूं. एक कार्यकर्ता के नाते जो जिम्मेदारी है, उसका निर्वाह करने का प्रयास करता हूं. सरकार के कामों की समय-समय पर समीक्षा करना भी एक जिम्मेदारी है, लेकिन मूल रूप से मैं संगठन का ही काम करता हूं.

सवाल: आपने कहा था कि संगठन सत्ता में समा न जाए. आज मध्य प्रदेश में संगठन सरकार को चला रहा है या सरकार संगठन को?

हेमंत खंडेलवाल: न सत्ता संगठन को चलाती है, न संगठन सत्ता को चलाता है. दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. कभी हमें लगता है कि सरकार में कहीं सुधार की जरूरत है, तो हम सुझाव देते हैं. कभी सरकार को लगता है कि संगठन में किसी सुझाव को स्वीकार किया जाना चाहिए, तो हम उस पर भी अमल करते हैं. संवाद और समन्वय लगातार चलता रहता है.

सवाल: आपके एक साल का सबसे बड़ा सच क्या है, कार्यकर्ता मजबूत हुआ या नेता ज्यादा आजाद हो गए?

हेमंत खंडेलवाल: मुझे लगता है कि इस एक साल में मैंने कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलने का काम किया है. उनके विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास किया है. हमारी कोशिश रही है कि जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी कार्यकर्ताओं के प्रति जवाबदेह बनें. हमने ऐसी व्यवस्था बनाई है और उस पर अमल करने का भी प्रयास किया है, ताकि कार्यकर्ता जो अपेक्षा करता है, उसके विश्वास पर हम सब खरे उतरें.

सवाल: प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद सबसे कठिन काम क्या रहा सरकार से समन्वय या अपने नेताओं को संभालना? आपने माना कि नेताओं के बड़बोलेपन से पार्टी की छवि को चोट लगी. क्या अब बीजेपी में बयान देने से पहले सोचने का दौर आएगा?

हेमंत खंडेलवाल: जहां लाखों कार्यकर्ता हों, वहां कुछ घटनाएं हो सकती हैं, मैं इसे स्वीकार करता हूं. कई बार किसी जनप्रतिनिधि का मूल स्वभाव ऐसा होता है कि वह बार-बार गलती करता है.

कई बार जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश में उसका आचरण वैसा हो जाता, जिसकी अपेक्षा नहीं की जाती. हम लगातार कोशिश करते हैं कि इसे ठीक किया जाए. जहां तक सरकार से समन्वय का सवाल है, वहां भी जहां हमें लगता है कि कोई बात कहनी चाहिए, हम कहते हैं.

सवाल: बीजेपी खुद को ‘party with difference' कहती है. फिर बार-बार public embarrassment क्यों होता है?

हेमंत खंडेलवाल: पहले कार्यकर्ताओं की संख्या कम थी, इसलिए अगर कोई घटना होती भी थी तो वह पब्लिक डोमेन में नहीं जा पाती थी. अब सोशल मीडिया है, मीडिया है और कई प्लेटफॉर्म हैं. कहीं भी छोटी घटना होती है तो सबके संज्ञान में आ जाती है. लेकिन कार्यकर्ताओं की संख्या के अनुपात में ऐसी घटनाएं इतनी ज्यादा नहीं हैं कि माना जाए कोई बड़ी दिक्कत है. जो कार्यकर्ता गलती करते हैं, उन्हें समझाया भी जाता है और वे भविष्य में उस पर अमल भी करते हैं. मुझे नहीं लगता कि यह कोई बहुत बड़ी चुनौती है.

सवाल: मंत्रियों का feedback दिल्ली जाता है. क्या मध्य प्रदेश सरकार का appraisal भोपाल में होता है या दिल्ली में?

हेमंत खंडेलवाल: मंत्रियों की समीक्षा मुख्यमंत्री अपने स्तर पर करते ही हैं. कुछ दिन पहले संगठन और मुख्यमंत्री ने मिलकर हर मंत्री से बातचीत की. उनके प्रभाव क्षेत्र, राजनीतिक क्षेत्र और विभागों में उनकी परफॉर्मेंस को लेकर चर्चा हुई. हमने पूरी समीक्षा करके केंद्रीय नेतृत्व को दे दी है. आने वाले समय में जो बदलाव होने हैं, वे होंगे, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई संभावना नहीं है. आगे जब भी केंद्रीय नेतृत्व निर्णय लेगा, तब परिवर्तन होंगे.

सवाल: क्या कोई मंत्री आपकी नजर में अंडरपरफॉर्म  कर रहा है? नाम नहीं, संकेत ही दे दीजिए.

हेमंत खंडेलवाल: जो underperform कर रहा है, उसका feedback हमें कार्यकर्ताओं से भी आता है, मीडिया से भी आता है और आम जनता से भी आता है. ऐसे में आपको भी पता लग जाता है कि किस मंत्री का performance अच्छा है और किसका नहीं. मुझे अलग से बताने की जरूरत नहीं है. हमारा काम feedback देना है और वे भी समय-समय पर हमें feedback देते हैं.

सवाल: दतिया उपचुनाव बीजेपी के लिए बड़ी परीक्षा है. परीक्षार्थी कौन होगा?

हेमंत खंडेलवाल: दतिया उपचुनाव सामने है. उम्मीदवार कौन होगा, इसको लेकर प्रदेश के सभी प्रमुख लोगों से हमारी बातचीत हुई है. सभी के सुझाव केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिए गए हैं. निर्णय केंद्रीय नेतृत्व और पार्टी के प्रमुख लोग मिलकर करेंगे. जहां तक चुनौती का सवाल है, हम पूरी तरह तैयार हैं और हमारी पार्टी चुनाव जीतेगी, इसकी पूरी तैयारी है.

सवाल: क्या डॉ.नरोत्तम मिश्रा उम्मीदवार होंगे?

हेमंत खंडेलवाल: यह कांग्रेस की सीट थी और कोर्ट के आदेश से खाली हुई है.निश्चित तौर पर बीजेपी इस चुनाव को जीतेगी.हमारी सरकार के दो साल के कामकाज जनता के सामने हैं. मुझे उम्मीद है कि जनता राज्य और केंद्र सरकार के काम पर अपनी मुहर लगाएगी.

सवाल: यूसीसी को लेकर सवाल हैं. मध्य प्रदेश में बड़ी आदिवासी आबादी है. क्या उनकी रीति-रिवाज सुरक्षित रहेंगे?

हेमंत खंडेलवाल: मुख्यमंत्री जी स्पष्ट कर चुके हैं कि समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार काम कर रही है. जहां तक हमारे आदिवासी भाइयों का सवाल है, उनकी जो प्रथाएं हजारों वर्षों से चली आ रही हैं, वे सरकार के संज्ञान में हैं. उनके अधिकारों को कैसे सुरक्षित रखा जाए और उन्हें कैसे समाहित किया जाए, यह पूरा विषय सरकार के ध्यान में है. आदिवासी समाज के हितों का संरक्षण करके ही सरकार कोई कदम आगे बढ़ाएगी.

सवाल: आप कह रहे हैं कि मंत्री की चलेगी. फिर मंत्री क्यों कह रहे हैं कि अफसर प्रस्ताव बदल देते हैं? क्या मध्य प्रदेश में bureaucracy elected representatives से ज्यादा powerful होती जा रही है?

हेमंत खंडेलवाल: यह सवाल बहुत पुराना है. दशकों पहले भी लोग कहते थे कि अफसरशाही हावी है. ऐसी बातें हर दौर में होती रही हैं.

निश्चित तौर पर कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जिनसे लोगों में नाराजगी रहती है. जैसे ही ऐसी बात मुख्यमंत्री के संज्ञान में आती है, वे इस पर रोक लगाते हैं. प्रशासनिक अधिकारी अपनी सीमा में काम करें, उन्हें जो अधिकार हैं, उसके अनुसार काम करें और जनप्रतिनिधियों का सम्मान बना रहे

... यह सरकार की भी चिंता है और संगठन की भी. एकाध घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान रहता है कि ऐसी स्थिति न बने.

सवाल: परीक्षा लीक और भर्ती में देरी को आप क्षणिक गुस्सा मानते हैं. क्या युवा इसे इतनी आसानी से भूल जाएंगे?

हेमंत खंडेलवाल: इतने बड़े सिस्टम में, जब बड़ी परीक्षाएं होती हैं, तो कहीं छोटी चूक हो सकती है और हुई भी है. लेकिन ऐसी चूक नहीं होनी चाहिए. अगर युवाओं में तत्काल गुस्सा रहता है तो वह स्वाभाविक है. सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि ऐसी चूक भविष्य में न हो. सरकार ने बाद में ऐसे प्रावधान भी किए हैं, जिनसे मुझे लगता है कि भविष्य में ऐसी कोई चूक नहीं होगी.

सवाल: ‘कॉकरोच जनता पार्टी' जैसी प्रतिक्रिया को आप मजाक मानते हैं या Warning Signal?

हेमंत खंडेलवाल: तत्कालीन स्थिति में लोगों का क्षणिक आक्रोश रहता है और कुछ लोग उसका लाभ उठाते हैं. लेकिन लंबे समय में ऐसी स्थिति नहीं रहती. लोगों को भी लगता है कि सरकार काम कर रही है और ऐसी चूक दोबारा न हो, इस पर काम कर रही है. क्षणिक बातों का कोई Long-Term Effect हो, ऐसा नहीं होता. भविष्य में आप देखेंगे कि सरकार जो काम कर रही है, लोग उसे Appreciate भी करेंगे और हम समाज का विश्वास जीतने का काम भी करेंगे.

सवाल: मध्य प्रदेश का युवा आपके बूथ तक है, लेकिन क्या वह बीजेपी के साथ दिल से है?

हेमंत खंडेलवाल: हमारी पार्टी के संगठन और मोर्चे लगातार प्रयास करते हैं कि युवा वर्ग को सही दिशा में ले जाया जाए. युवाओं की जो अपेक्षाएं हैं, सरकार उन पर खरी उतरे और संगठन उन अपेक्षाओं को सरकार तक पहुंचाने का काम करे. आने वाले समय में हम युवाओं को लेकर और भी नवाचार करेंगे.

सवाल: 106 सदस्यीय कार्यसमिति में प्रतिनिधित्व पर सवाल उठ रहे हैं. क्या संगठन Social Balance में चूक गया? एक मुस्लिम सदस्य ?

हेमंत खंडेलवाल: हमारी पार्टी में अल्पसंख्यक मोर्चा भी है. शासकीय नियुक्तियों में भी सबको साथ लेने का प्रयास किया जाता है. अभी वक्फ बोर्ड की नियुक्ति हुई. हर जगह सबको प्रतिनिधित्व देने की कोशिश होती है. हां, संख्या एक है, आप उसे कम कह सकते हैं. लेकिन हमने प्रतिनिधित्व दिया है. धीरे-धीरे अगर अल्पसंख्यकों का भरोसा बढ़ेगा, तो हम और प्रतिनिधित्व बढ़ाएंगे और लोगों को साथ लेंगे.

सवाल: वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्य हैं, मामला कोर्ट में है और इस पर सवाल उठ रहे हैं.

हेमंत खंडेलवाल: वक्फ बोर्ड अल्पसंख्यक समाज की संस्था है, इसमें कोई शक नहीं है. लेकिन वक्फ बोर्ड का गठन कब हुआ, किसलिए हुआ और उसके पास संपत्ति कहां से आई, यह भी समझना होगा. कांग्रेस सरकारों ने ऐसे नियम बनाए कि वक्फ बोर्ड को कोई चुनौती नहीं दे सकता था.

आज वक्फ बोर्ड के पास रेलवे और मिलिट्री से भी ज्यादा संपत्ति बताई जाती है. अगर इतनी ज्यादा संपत्ति है और income सिर्फ 100-200 करोड़ के आसपास है, तो इसका मतलब है कि कहीं न कहीं दबंग और पूंजीपति लोगों ने वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर कब्जा किया हुआ है.

अगर सरकार पारदर्शी तरीके से, सभी समाजों को साथ लेकर काम करेगी, तो यह संपत्ति मुक्त होगी और उससे जो income generate होगी, वह अल्पसंख्यकों के ही काम आएगी उनके बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और विकास में. सरकार तो अल्पसंख्यकों के हित में काम कर रही है, जो कांग्रेस 50 वर्षों में नहीं कर पाई.

सवाल: अगर ऐसा है तो अल्पसंख्यक आप पर भरोसा क्यों नहीं करते?

हेमंत खंडेलवाल: 1985 में हमारे पास दो सीटें थीं. उसके बाद न हम विचारधारा से अलग हुए, न कार्यपद्धति से. धीरे-धीरे भरोसा बना और हम चुनाव जीतते गए. अल्पसंख्यकों के हित में योजनाएं बनाई गईं. मैं समझता हूं कि आज नहीं तो पांच-दस साल बाद अल्पसंख्यक वर्ग को महसूस होगा कि उनके लिए सही पार्टी बीजेपी है. वे पूरी ताकत के साथ हमारे साथ आएंगे. जब तक नहीं आते, इंतजार कीजिए. लेकिन एक दिन उनका विश्वास और भरोसा हमारे साथ आएगा.

सवाल: आप एक गाड़ी से चलते हैं, लेकिन कई नेता काफिले में चलते हैं. क्या बीजेपी में सादगी अब सिर्फ Personal Choice रह गई है?

हेमंत खंडेलवाल: प्रधानमंत्री ने अपील की थी और उसके बाद लगभग सभी नेताओं ने उसका पालन किया. अगर किसी के पास चार गाड़ियां थीं, तो उसने दो कर दीं.

अधिकतर नेता प्रधानमंत्री की अपील और इस तरह के आचरण का पालन करते हैं. दो-चार लोग हो सकते हैं जो काफिले के साथ चलते हों लेकिन ऐसी संख्या बहुत कम है. हमें अपने आचरण में सादगी का परिचय देना चाहिए.

जितनी जरूरत हो, उतने ही संसाधनों और सरकारी अमले का उपयोग करना चाहिए. मैं भी इसका पालन करता हूं और मेरे जैसे बहुत सारे कार्यकर्ता और नेता भी करते हैं. धीरे-धीरे मुझे लगता है कि यह स्वभाव सबका बनेगा.

सवाल: आप अनाथ बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा लिया है. क्या बीजेपी अपने हर विधायक से एक Social Pledge लेगी?

हेमंत खंडेलवाल: मैं अनाथ बच्चों की पढ़ाई जैसे कुछ काम करता हूं. मैं नेताओं से भी अपील करता हूं कि हर व्यक्ति को अपने स्वभाव में राजनीति से हटकर कोई सामाजिक काम जरूर करना चाहिए. मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि सिर्फ मैं ही नहीं, हमारी पार्टी के हजारों लोग ऐसा काम करते हैं. कोई रोज स्वच्छता का काम करता है, कोई भोजन कराता है, कोई कंबल बांटता है. मेरा तरीका अलग हो सकता है, लेकिन समाज में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है.

सवाल: अब कुछ फटाफट सवाल. एक साल में सबसे बड़ा अफसोस?

हेमंत खंडेलवाल: मैं सभी कार्यकर्ताओं से मिल नहीं पाया.

सवाल: सबसे ज्यादा किससे सीखा कार्यकर्ता से, मुख्यमंत्री से या दिल्ली से?

हेमंत खंडेलवाल: मैंने कुशाभाऊ ठाकरे जी और वर्तमान में हमारे देश के प्रधानमंत्री से सीखा कि व्यवहार कैसा होना चाहिए.

सवाल: मध्य प्रदेश बीजेपी में सबसे बड़ी चुनौती अहंकार, अनुशासन या Anti-Incumbency?

हेमंत खंडेलवाल: अहंकार और अनुशासन तो नहीं, लेकिन Anti-Incumbency एक ऐसा विषय है जिस पर हमें लगातार काम करना चाहिए, क्योंकि हम लगातार सत्ता में हैं.

सवाल: 2028 की तैयारी शुरू हो चुकी है या अभी 2023 की जीत का असर बाकी है?

हेमंत खंडेलवाल: हम तो रोज चुनावी मोड में रहते हैं. हमारी तैयारी शुरू है.

सवाल: कांग्रेस को आप कमजोर मानते हैं या बीजेपी को Complacent होने का खतरा है?

हेमंत खंडेलवाल: हम कांग्रेस को कमजोर नहीं मानते. हम मानते हैं कि विपक्षी पार्टी के तौर पर कांग्रेस एक चुनौती है. हमारा प्रयास रहेगा कि हम उसका सामना करें और उसमें सफल हों.

सवाल: एक लाइन में ... हेमंत खंडेलवाल की बीजेपी कैसी है: सख्त, शांत या सतर्क?

हेमंत खंडेलवाल: शांत भी है, सतर्क भी है और सख्त भी है.

सवाल: खाली वक्त में क्या करते हैं ... गाने सुनते हैं, ओटीटी पर फिल्म देखते हैं, परिवार के साथ वक्त बिताते हैं या फुटबॉल वर्ल्ड कप देखते हैं?

हेमंत खंडेलवाल: मैं इन तीनों में से कुछ नहीं करता. अगर वक्त मिलता है तो पढ़ने का काम जरूर करता हूं.
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