- मध्यप्रदेश के धार जिले के रूपाखेड़ा गांव ने पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक फूलों की खेती अपनाई है.
- गांव में करीब एक लाख चौवन हजार वर्गमीटर क्षेत्र में चौवालीस पॉलीहाउस में विदेशी फूल उगाए जा रहे हैं.
- शेडनेट तकनीक के तहत तीसरे हजार वर्गमीटर क्षेत्र में उन्नत सब्जियों की खेती हो रही है.
MP के धार जिले के बदनावर विकासखंड का छोटा सा गांव रूपाखेड़ा इन दिनों अपनी खुशबू और आधुनिक खेती की कहानी के कारण पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है. कभी गेहूं, चना, मक्का और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाला यह गांव आज रंग-बिरंगे विदेशी फूलों की खेती के लिए पहचाना जा रहा है. यहां पॉलीहाउस और शेडनेट तकनीक ने न केवल खेतों की तस्वीर बदली है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा बदलाव लाया है. यही वजह है कि रूपाखेड़ा को अब लोग प्यार से 'मध्यप्रदेश का मिनी हॉलैंड' कहने लगे हैं. गांव के खेतों में खिले विदेशी फूल आधुनिक कृषि और किसानों की मेहनत की नई कहानी बयां कर रहे हैं.
पारंपरिक खेती से आधुनिक कृषि की ओर बढ़ा गांव
रूपाखेड़ा गांव की आबादी करीब 1,930 है और यहां 391 परिवार रहते हैं. कुछ साल पहले तक अधिकांश किसान पारंपरिक फसलों की खेती करते थे. मौसम की अनिश्चितता, उत्पादन लागत में वृद्धि और सीमित आय के कारण किसानों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. ऐसे समय में उद्यानिकी विभाग ने किसानों को आधुनिक और संरक्षित खेती की तकनीकों से जोड़ने का काम किया, जिसने गांव की दिशा बदल दी.
पॉलीहाउस में खिल रहे विदेशी फूल
आज रूपाखेड़ा आधुनिक फूलों की खेती का बड़ा केंद्र बन चुका है. गांव में करीब 1 लाख 44 हजार 407 वर्गमीटर क्षेत्र में 44 पॉलीहाउस संचालित हैं. इनमें गुलाब, जरबेरा, लिलियम, जिप्सोफिला, ब्लू डेजी और व्हाइट डेजी जैसे विदेशी और उच्च गुणवत्ता वाले फूल उगाए जा रहे हैं. इन फूलों की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ अन्य शहरों में भी है, जिससे किसानों को बेहतर आय प्राप्त हो रही है.

इस तरह से पॉलीहाउस बनाकर किसान कर रहे खेती.
शेडनेट हाउस में उग रही उन्नत सब्जियां
फूलों की खेती के साथ-साथ गांव में आधुनिक सब्जी उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है. करीब 42 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में बने 13 शेडनेट हाउस में उन्नत किस्म की सब्जियों की खेती की जा रही है. नियंत्रित वातावरण में होने वाली इस खेती से उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और किसानों को बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं.
सरकारी योजना बनी बदलाव की आधारशिला
रूपाखेड़ा की इस सफलता के पीछे केंद्र सरकार की मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. इस योजना के तहत किसानों को पॉलीहाउस निर्माण पर 19 लाख रुपये तक और शेडनेट हाउस निर्माण पर 14.20 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है. आर्थिक सहायता मिलने से किसानों का आधुनिक तकनीक अपनाने का भरोसा बढ़ा और उन्होंने नई खेती को तेजी से अपनाया.

संरक्षित खेती से लागत घटी, मुनाफा बढ़ा
पॉलीहाउस और शेडनेट तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें कम पानी में बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है. उर्वरकों का संतुलित उपयोग होता है, कीट और रोगों का प्रभाव भी कम रहता है. इससे उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ी है और फसल का नुकसान कम हुआ है. आधुनिक पैकेजिंग और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य भी मिल रहा है.
दूसरे किसानों के लिए बन रहा प्रेरणा केंद्र
रूपाखेड़ा की सफलता अब प्रदेश के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है. यहां की खेती यह साबित कर रही है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए तो खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है. गांव के किसान अब केवल अपनी आय नहीं बढ़ा रहे, बल्कि आधुनिक कृषि के क्षेत्र में एक नई मिसाल भी कायम कर रहे हैं.
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