क्या कोई इंसान देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस की नौकरी, लाल बत्ती की गाड़ी और असीमित सरकारी पावर को खुद की मर्जी से छोड़ सकता है? आम तौर पर इसका जवाब 'ना' होगा. लेकिन मध्य प्रदेश कैडर के साल 1982 बैच के जांबाज पूर्व आईएएस अधिकारी प्रवेश शर्मा ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया. उन्होंने न सिर्फ 29 साल की शानदार नौकरी को बीच में ही छोड़ दिया, बल्कि किसानों की तकदीर बदलने के लिए एक ऐसा अनोखा रास्ता चुना जिसने आज उन्हें करीब 590 करोड़ रुपये के बड़े एग्री-टेक साम्राज्य का मुख्य चेहरा बना दिया है.
नौकरी छोड़ सीधे खेतों में पहुंचे, जब अपनों ने ही पूछा- "सब्जी बेचोगे?"
प्रवेश शर्मा ने अपने प्रशासनिक करियर के दौरान भारत सरकार के कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव जैसे कई बड़े और रसूखदार पदों पर काम किया था. इस दौरान उन्होंने एसी दफ्तरों में बैठकर खेती-किसानी से जुड़ी बड़ी-बड़ी फाइलें और नीतियां बनते देखी थीं. लेकिन
लेकिन प्रवेश शर्मा का इरादा पक्का था और अपनी राह पर निकल ही पड़े. शुरु में परेशानी आई लेकिन बाद एक ऐसा साम्राज्य खड़ा कर दिया जिसने देश के हजारों किसानों को फायदा पहुंचाया.
'सब्जीवाला' से 'कमतन' और फिर 590 करोड़ का विशाल साम्राज्य
प्रवेश शर्मा का यह सफर सिर्फ सब्जियां बेचने तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने जल्द ही अपने स्टार्टअप का दायरा बढ़ाया और इसे 'कमतन फार्म टेक' नाम की बड़ी कंपनी में तब्दील कर दिया. यह कंपनी सीधे किसानों से संपर्क कर उनकी उपज को अच्छे दामों पर खरीदती थी जिससे किसानों को बाजार से 20 से 30 फीसदी ज्यादा मुनाफा होने लगा. उनकी इस कंपनी की सफलता और पारदर्शी बिजनेस मॉडल को देखकर भारत की दिग्गज एग्री-टेक कंपनी 'समुन्नति' ने 'कमतन' का अधिग्रहण (Acquisition) कर लिया. आज प्रवेश शर्मा समुन्नति ग्रुप के बोर्ड सदस्य के रूप में काम कर रहे हैं, जिसकी नेटवर्थ करीब 590 करोड़ रुपये है. आज करीब 70 साल की उम्र में भी प्रवेश शर्मा उसी जोश के साथ देश भर के लाखों किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहे हैं.
अब लॉन्च किया किसानों का 'Google', बदल दी भारत की कृषि व्यवस्था
किसानों के मसीहा और 'फादर ऑफ इंडियन एफपीओ' के रूप में जाने जाने वाले प्रवेश शर्मा ने बीते दिनों देश को एक और बड़ा तोहफा दिया है. उन्होंने भारत का पहला डिजिटल प्लेटफॉर्म 'भारत एफपीओ फाइंडर' (Bharat FPO Finder) लॉन्च किया है, जिसे देश के किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के लिए 'कृषि का गूगल' कहा जा रहा है.इस प्लेटफॉर्म के जरिए देश भर के किसान, व्यापारी और खरीदार सिर्फ एक क्लिक पर एक-दूसरे से सीधे जुड़ सकेंगे. इसी वजह से इसे किसानों का गूगल कहा जा रहा है. आईएएस की कुर्सी से लेकर किसानों के लिए 'गूगल' बनाने तक का प्रवेश शर्मा का यह सफर साबित करता है कि अगर मन में समाज के लिए कुछ कर गुजरने का सच्चा जज्बा हो, तो फाइलों से बाहर निकलकर देश की पूरी तस्वीर बदली जा सकती है.
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