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MP में पानी दूषित... हवा जहरीली, भोपाल-इंदौर समेत आठ शहर नॉन-अटेनमेंट सिटी, NGT ने सरकार से मांगी रिपोर्ट, क्या कहा?

NGT Bhopal News: इंदौर में दूषित पानी से हुई करीब 20 मौतों के बाद मध्य प्रदेश में पानी की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. इसी बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल बेंच ने प्रदेश के आठ शहरों में गंभीर वायु प्रदूषण पर चिंता जताई है. 8 शहरों को CPCB ने नॉन अटेनमेंट सिटी घोषित किया है. एनजीटी ने इसे लेकर सरकार से रिपोर्ट तलब की है.

MP में पानी दूषित... हवा जहरीली, भोपाल-इंदौर समेत आठ शहर नॉन-अटेनमेंट सिटी, NGT ने सरकार से मांगी रिपोर्ट, क्या कहा?
Air Turns Toxic in MP: NGT ने सरकार से मांगी रिपोर्ट.

MP Air Pollution: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन की भोपाल बेंच ने मध्य प्रदेश के आठ शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताई है. अधिकरण ने इस मामले में सरकार से आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है. एनजीटी ने माना कि भोपाल में वायु गुणवत्ता तय मानकों से काफी नीचे पहुंच चुकी है. यहां AQI बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में दर्ज किया जा रहा है, जो पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए बड़ा संकट है.

दरअसल, National Green Tribunal की भोपाल बेंच ने बुधवार 7 जनवरी को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी कर प्रदेश के प्रमुख शहरों में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बताया है. आवेदक राशिद नूर खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद एनजीटी ने यह आदेश जारी किया. जिसमें एनजीटी ने उल्लेख किया कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास, सागर और सिंगरौली को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा नॉन अटेनमेंट सिटी घोषित किया गया है. इन शहरों में पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से PM10 और PM2.5 के स्तर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों से लगातार अधिक बने हुए हैं. भोपाल में PM10 का वार्षिक औसत स्तर 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM2.5 का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पाया गया है, जो निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक है.

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झीलों की नगरी में AQI बहुत खराब 

एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि भोपाल, जिसे कभी झीलों की नगरी कहा जाता था, अब सर्दी के सीजन में लगातार धुंध, कम दृश्यता और बहुत खराब से गंभीर श्रेणी के AQI का सामना कर रहा है. रियल टाइम आंकड़ों के अनुसार कई रातों में AQI 300 से ऊपर दर्ज किया गया है. आदेश में स्पष्ट किया गया कि यह प्रदूषण किसी एक कारण से नहीं, बल्कि पराली जलाने, निर्माण, विध्वंस कार्यों से उड़ती धूल, वाहनों के उत्सर्जन, खुले में कचरा जलाने, लैंडफिल में आग, पटाखों के उपयोग और औद्योगिक गतिविधियों के संयुक्त प्रभाव से उत्पन्न हो रहा है.

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वायु प्रदूषण कम करने नहीं उठाए कोई कदम  

एनजीटी ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली एनसीआर के लिए अपनाए गए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान GRAP और एयर शेड आधारित नीति के बावजूद मध्यप्रदेश में अब तक ऐसा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है. जिससे वायु प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकरण ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी करते हुए एक संयुक्त समिति का गठन किया है. 

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समित में इन्हें किया गया शामिल 

समिति में प्रमुख सचिव पर्यावरण विभाग मध्यप्रदेश सरकार, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल के प्रतिनिधि, EPCO भोपाल के प्रतिनिधि, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास विभाग, प्रमुख सचिव परिवहन विभाग, सदस्य सचिव मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और डॉ. रवि प्रकाश मिश्रा पूर्व अतिरिक्त निदेशक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल को शामिल किया गया है. समिति को छह सप्ताह के भीतर स्थिति का आकलन कर तथ्यात्मक और की गई कार्रवाई पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं. मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है. मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को तय की गई है.

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