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मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का जानें धार्मिक और सांस्कृतिक के साथ वैज्ञानिक महत्व? चीनी मांझे से कर लें तौबा

Kite Celebration 2026: मकर संक्रांति का त्योहार बस आ ही गया है, और इस अवसर पर पतंग उड़ाने की परंपरा को कौन भूल सकता है? लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने के पीछे क्या कारण है? आइए जानते हैं इसके बारे में.

मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का जानें धार्मिक और सांस्कृतिक के साथ वैज्ञानिक महत्व? चीनी मांझे से कर लें तौबा
मकर संक्रांति पर खूब उड़ाई जाती हैं पतंगें (फोटो- IANS).

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के पावन पर्व पर आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पट जाता है. यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं. इससे पहले आपको बता दें कि मकर संक्रांति के पर्व को लेकर बाजारों में खूब उत्साह देखने को मिल रहा है. लोग अपनी-अपनी पसंद पतंगें खरीदने बाजारों में पहुंच रहे हैं. इस दौरान बाजारों में ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) से जुड़ी हुई पतंगें भी खूब बिक रही हैं, जिनमें कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की तस्वीरों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी लगी हुई है.

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वहीं, बच्चों के लिए कार्टून से सजी पतंगें भी उन्हें खूब आकर्षित कर रही हैं. खास बात यह है कि इस बार चाइनीज मांझे को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है और बाजार में भी परंपरागत मांझा ही मिल रहा है. वहीं, प्रशासन भी इस बार बहुत सख्त नजर आ रहा है. खंडवा प्रशासन का कहना है कि अगर कोई चाइनीज मांझा बेचते हुए या प्रयोग करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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​यहां मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने को लेकर सबसे पहले हम विभिन्न कारणों पर बात करते हैं...

वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी महत्व

विटामिन D की प्राप्ति: सर्दियों के समय हमारा शरीर कई बीमारियों से घिरा रहता है. मकर संक्रांति के समय सूर्य की किरणें स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होती हैं. पतंग उड़ाते समय हम घंटों धूप में बिताते हैं, जिससे शरीर को भरपूर विटामिन D मिलता है, जो हड्डियों और त्वचा के लिए जरूरी है.
​संक्रमण से बचाव: आयुर्वेद के अनुसार, सूरज की गर्मी सर्दियों में होने वाले त्वचा के संक्रमण और शरीर की जकड़न को दूर करने में मदद करती है.
​एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य: पतंग को नियंत्रित करने के लिए गहरी एकाग्रता (Focus) की आवश्यकता होती है, जो मानसिक शांति और संतुलन को बढ़ावा देती है.

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​धार्मिक और पौराणिक महत्व

​भगवान राम की परंपरा: 'तुलसीदास' की रामचरितमानस के अनुसार, पतंग उड़ाने की परंपरा की शुरुआत त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने की थी. कहा जाता है कि उनके द्वारा उड़ाई गई पतंग इंद्रलोक तक चली गई थी. इसी परंपरा को याद करते हुए लोग इस दिन पतंग उड़ाते हैं.
​देवताओं को संदेश: पतंग को स्वर्ग की ओर उड़ता हुआ माना जाता है. लोग इसे खुशहाली, लंबी उम्र और आजादी का प्रतीक मानते हुए अपने आराध्य देवों तक अपनी श्रद्धा पहुँचाने का एक माध्यम मानते हैं.

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सांस्कृतिक महत्व

​उल्लास और मिलन: मकर संक्रांति फसल कटाई का त्योहार है. लोग छत पर एक साथ इकट्ठा होकर 'काइपो छे' के शोर के साथ खुशियां मनाते हैं. यह सामाजिक एकता और आपसी प्रेम को बढ़ाता है.
​नकारात्मकता का त्याग: पतंग को ऊंचा उड़ाना जीवन में प्रगति और बुराइयों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने का प्रतीक है.

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मकर संक्रांति पर कुछ सावधानियां

​पक्षियों का ध्यान रखें: पतंग उड़ाते समय पक्षियों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. शाम के समय जब पक्षी अपने घोंसले में लौट रहे हों, तब पतंग उड़ाने से बचें.
​चाइनीज मांझे का प्रयोग न करें: कांच वाले या नायलॉन के धागे (चाइनीज मांझा) पर्यावरण और इंसानों दोनों के लिए खतरनाक हैं, इसलिए हमेशा सूती धागे (सद्दी) का प्रयोग करें.

कलेक्टर ने क्या कहा

बता दें कि कि खंडवा जिला प्रशासन चाइनीज मांझे को लेकर बहुत सख्त है. अपर कलेक्टर काशीराम बडोले ने चाइनीज मांझे को लेकर कहा कि अगर कोई भी व्यक्ति चाइनीज मांझे का उपयोग करते या उसे बेचते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि लगातार प्रशासन की टीम बाजार पर नजर रखे हुए हैं. औचक  निरीक्षण किए जा रहे हैं.

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