मध्य प्रदेश के खंडवा में गुड़ी वन परिक्षेत्र के आम खुजली बीट में रविवार सुबह वन विभाग की टीम पर अतिक्रमणकारियों ने जानलेवा हमला कर दिया. कक्ष क्रमांक 748-749 में गश्त पर गई स्पेशल फ्लाइंग स्क्वॉड पर पहले से घात लगाए लोगों ने गोफन, पत्थर और लाठियों से हमला किया. इस हमले में वनरक्षक ज्वाला सिंह, रोमांक नायक, शैलेंद्र यादव, राजेंद्र सिंह सक्तावत, राजेंद्र बागड़ी, प्रदीप बघेल, चंद्रपाल तोमर, राहुल लोधी समेत 8 से अधिक कर्मचारी घायल हुए. कई वनरक्षकों को गंभीर चोटें भी आई हैं.
नए वनरक्षकों की टीम कर रही थी गश्त
वन विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 में भर्ती हुए 45 नवपदस्थ वनरक्षकों को प्रशिक्षण के बाद गुड़ी रेंज में तैनात किया है. यह विशेष दल अवैध अतिक्रमण रोकने और जंगल की सुरक्षा के लिए बनाया गया था. रविवार को नियमित गश्त के दौरान टीम पर सुनियोजित तरीके से हमला हुआ. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावर पहले से जंगल में छिपे थे और टीम के पहुंचते ही गोफन से बड़े पत्थर बरसाने लगे.
अतिक्रमण हटाने के बाद बढ़ा तनाव
दरअसल, गुड़ी रेंज में लंबे समय से वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें हैं. हाल ही में वन विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाकर कई जगहों से अतिक्रमण हटाया था. इसके बाद से वन अमले और अतिक्रमणकारियों के बीच तनाव चल रहा था. स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि पहले भी वन टीम पर हमले हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए.
2 घंटे तक मदद नहीं मिलने का आरोप
घायल वन कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि सूचना देने पर गुड़ी रेंजर नरेंद्र पटेल मौके पर नहीं पहुंचे और खंडवा चले गए. घायल करीब दो घंटे तक जंगल में बिना इलाज के पड़े रहे. एक अन्य वन टीम मौके की ओर आई, लेकिन जंगल में दाखिल होने से पहले लौट गई.
कर्मचारियों का आरोप है कि पुलिस वाहन घटनास्थल पहुंचा, लेकिन वन कर्मचारियों को अस्पताल ले जाने के बजाय हमलावर पक्ष के उन लोगों को ले गया जो अपने ही गोफन से घायल हुए थे. वन कर्मियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा नहीं मिली.
जंगल में ड्यूटी करना मुश्किल
घटना के बाद वन कर्मचारियों में आक्रोश है. उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, स्थायी पुलिस सुरक्षा और अभियान के दौरान पर्याप्त बल की मांग की है. कर्मचारियों का कहना है कि सुरक्षा नहीं मिली तो जंगल में ड्यूटी करना मुश्किल होगा. वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है. घटना ने जंगल में कानून-व्यवस्था और वन अमले की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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