- इंदौर के डॉक्टर अयाज अहमद कुरैशी को फेसबुक पर सीरिया की महिला आयशा खान से दोस्ती हुई और विश्वास हो गया.
- महिला ने युद्ध की स्थिति का हवाला देकर भारत आने और कस्टम में फंसे सामान की कहानी सुनाई थी.
- कस्टम और आरबीआई अधिकारी बनकर ठगों ने डॉक्टर से सामान छुड़ाने के लिए लाखों रुपये लिए.
सोशल मीडिया पर हुई एक दोस्ती इंदौर के एक डॉक्टर को लाखों रुपये की चपत लगा गई. फेसबुक पर सीरिया की रहने वाली बताई गई एक महिला ने पहले दोस्ती की, फिर भरोसा जीता और उसके बाद युद्ध के हालात का हवाला देकर भारत आने की कहानी सुनाई. इसी दौरान कस्टम और आरबीआई अधिकारी बनकर कुछ लोगों ने डॉक्टर से संपर्क किया और महिला का सामान छुड़ाने के नाम पर उनसे लाखों रुपये ऐंठ लिए. जब बार-बार पैसों की मांग होने लगी और कोई सामान नहीं मिला, तब डॉक्टर को ठगी का एहसास हुआ.
फेसबुक पर हुई थी महिला से दोस्ती
इंदौर के आजाद नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले डॉक्टर अयाज अहमद कुरैशी की फेसबुक के जरिए आयशा खान नाम की एक महिला से पहचान हुई थी. महिला ने खुद को सीरिया में रहने वाली डॉक्टर बताया था. धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और नियमित रूप से ऑनलाइन संपर्क होने लगा. बातचीत के दौरान महिला ने खुद को भरोसेमंद साबित किया, जिससे डॉक्टर को उस पर विश्वास हो गया.
सीरिया युद्ध का हवाला देकर रची कहानी
कुछ समय बाद महिला ने डॉक्टर को बताया कि सीरिया में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और वह भारत आना चाहती है. उसने दावा किया कि वह दिल्ली पहुंच चुकी है, लेकिन उसके साथ लाए गए मेडिकल उपकरण और अन्य सामान को कस्टम विभाग ने जब्त कर लिया है. महिला ने मदद की गुहार लगाते हुए डॉक्टर से सहयोग मांगा.
कस्टम और आरबीआई अधिकारी बनकर किया संपर्क
महिला की बात के कुछ समय बाद डॉक्टर के पास ऐसे लोगों के फोन आने लगे, जिन्होंने खुद को कस्टम और आरबीआई का अधिकारी बताया. फोन करने वालों ने कहा कि महिला का सामान छुड़ाने के लिए विभिन्न तरह की सरकारी फीस और औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी. इसके लिए रकम जमा कराने की बात कही गई.

इंदौर के डॉक्टर को फेसबुक फ्रेंड ने भेजा था ये पासपोर्ट.
अलग-अलग किस्तों में ट्रांसफर किए 6.11 लाख रुपये
महिला और कथित अधिकारियों की बातों पर भरोसा करते हुए डॉक्टर ने अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे करके उनसे कुल 6 लाख 11 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए. डॉक्टर को उम्मीद थी कि पैसे जमा होने के बाद महिला का सामान रिलीज हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
पैसे भेजने के बावजूद जब कथित अधिकारियों और महिला की ओर से लगातार अधिक रकम मांगी जाने लगी, तब डॉक्टर को शंका हुई. उन्होंने पूरे मामले की पड़ताल करने की कोशिश की, लेकिन सामान या दस्तावेजों को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं मिली. इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं.
पुलिस से की शिकायत
ठगी का पता चलने के बाद डॉक्टर ने मामले की शिकायत की. शिकायत पुलिस तक पहुंचने के बाद उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात कर पूरी जानकारी दी. पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और अब एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की होगी जांच
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों की जांच करेगी, जिनका इस्तेमाल बातचीत के लिए किया था. इसके साथ ही जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जानकारी भी जुटाई जाएगी. साइबर विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि ठगी के पीछे कौन लोग शामिल हैं.
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