Chaitra Navratri 2026: भारत हमेशा से आस्था और अध्यात्म की पवित्र भूमि रहा है, जहां हर कोने में भक्ति की एक अलग ही ऊर्जा महसूस होती है. खासकर नवरात्रि के दौरान देवी के मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है. कहते हैं इन नौ दिनों में माता रानी के दर्शन और पूजा आराधना से हर तरह का कष्ट दूर होता है. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे मध्य प्रदेश के मशहूर मंदिर के बारे में, जहां पर दर्शन के लिए भीड़ लगती है. अगर आप भी मध्य प्रदेश में हैं तो इस मंदिर में दर्शन कर सकते हैं. यहां दर्शन करने से हर मनोकामना पूरी होती है.
यहां देश के कोने-कोने से पहुंचते हैं श्रद्धालु
दरअसल, मध्य प्रदेश के रायसेन जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर ग्राम खंडेरा में आस्था का एक अद्भुत केंद्र स्थित है. मां छोले वाली का पावन दरबार... मान्यता है कि पिछले 450 वर्षों से यहां विराजमान मां अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी कर रही हैं. यही वजह है कि न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
-
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
माता रानी ने महामारी का किया था अंत
सागर-भोपाल मार्ग पर बसे ग्राम खंडेरा में स्थित मां छोले वाली का यह दरबार श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, करीब 450 साल पहले इस क्षेत्र में एक भयंकर महामारी फैली थी. हालात इतने भयावह हो गए थे कि एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार कर लौटते-लौटते दूसरे की मृत्यु हो जाती थी.
गांव में मातम और भय का माहौल था. इसी दौरान एक दिन ग्रामीणों को रास्ते में एक साधु मिले. जब ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताई, तो साधु ने उपाय बताया कि यदि यहां सूखे नारियल का यज्ञ किया जाए, तो महामारी से मुक्ति मिल सकती है. ग्रामीणों के अनुरोध पर साधु महात्मा ने यज्ञ संपन्न कराया.
छोले के पेड़ से प्रकट हुईं पांच मुख वाली देवी
मान्यता है कि यज्ञ के बाद मां स्वयं पांच पिंडी स्वरूप में एक छोले के पेड़ से प्रकट हुईं. तभी से यह स्थान मां छोले वाली के दरबार के रूप में प्रसिद्ध हो गया और मां पांच पिंडियों के रूप में यहां विराजमान हैं. आज भी यह दरबार चमत्कारों और अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. भक्त दूर-दूर से यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मां के चरणों में हाजिरी लगाते हैं. विशेषकर नवरात्रि के दौरान यहां आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है, जब सैकड़ों श्रद्धालु नंगे पैर पैदल चलकर मां के दरबार तक पहुंचते हैं.
कहा जाता है कि जिन महिलाओं की गोद सूनी होती है, वे यहां सच्चे मन से अर्जी लगाती हैं तो मां उनकी झोली खुशियों से भर देती हैं और जिनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, वो मां के दरबार में चुनरी चढ़ाकर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं