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भोपाल के स्लॉटर हाउस में 250 रोहिंग्या करते थे काम ! आखिर असलम चमड़ा को कैसे 'क्लीन चिट' देता रहा सिस्टम?

Bhopal Slaughter news: भोपाल के जिंसी स्लॉटर हाउस में 250 रोहिंग्याओं को बसाने और गोमांस तस्करी के खुलासे ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. असलम चमड़ा को पुलिस की क्लीन चिट और नगर निगम की फाइलों में छिपा सच अब जांच के घेरे में है. 26 टन गोमांस की बरामदगी के बाद अब सरकार दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग कर रही है.

भोपाल के स्लॉटर हाउस में 250 रोहिंग्या करते थे काम ! आखिर असलम चमड़ा को कैसे 'क्लीन चिट' देता रहा सिस्टम?

Aslam Chamda Bhopal Slaughter:  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के स्लॉटर हाउस का मामला सिर्फ कथित तौर पर गोकशी नहीं, बल्कि सिस्टम, सत्ता और संरक्षण तीनों पर सवाल खड़े करता है. जिस स्लॉटर हाउस को गोकशी के आरोपों में सील किया गया था, उसी से जुड़ा एक नाम अब फिर चर्चा में है असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा. आरोप सिर्फ गोमांस तस्करी के नहीं हैं… आरोप हैं रोहिंग्याओं को बसाने के, फर्जी दस्तावेज बनवाने के और स्थानीय लोगों की रोज़ी छीनने के.

असलम 'चमड़ा' का उदय और रोहिंग्या का कनेक्शन

दरअसल इस पूरे विवाद के केंद्र में है असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा. आरोप हैं कि असलम ने जिंसी की मक्का मस्जिद के पास करीब 250 रोहिंग्या शरणार्थियों को बसाया और उनके फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए. आरोप यह भी हैं कि इन्हीं लोगों से स्लॉटर हाउस में काम लिया जा रहा था, जिससे स्थानीय लोगों का रोजगार छिन गया. 1988 में गांव-गांव जाकर भैंसों की खाल खरीदने वाले असलम ने देखते ही देखते नगर निगम में ऐसी पैठ बनाई कि उसके सामने कोई टेंडर भरने की हिम्मत तक नहीं करता था.

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क्लीन चिट और मानवाधिकार आयोग की फटकार

हैरानी की बात यह है कि जब पिछले साल इस मामले की शिकायत डीसीपी कार्यालय में हुई, तो पुलिस ने असलम को क्लीन चिट दे दी. लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस रिपोर्ट को यह कहकर खारिज कर दिया कि क्लीन चिट का आधार कोई ठोस जांच नहीं, बल्कि खुद असलम का बयान था. आयोग ने सवाल उठाया कि जब असलम खुद मान रहा है कि मजदूर सीमावर्ती राज्यों से लाकर उसकी निजी संपत्ति में ठहराए गए हैं, तो पुलिस ने उनके पहचान पत्रों की जांच क्यों नहीं की?

26.5 टन मांस और 'मैनेज' की गई फाइलें

17 दिसंबर की रात पुलिस मुख्यालय (PHQ) के सामने से 26.5 टन फ्रोजन मांस से भरा ट्रक पकड़ा गया, जिसे भैंस का बताकर मुंबई भेजा जा रहा था, लेकिन जांच में वह गोमांस निकला. फाइलों में दर्ज है कि वध की गई सभी भैंसें 15 साल से अधिक उम्र की थीं और सबका एंटे-मॉर्टम व पोस्ट-मॉर्टम हुआ था. नगर निगम के प्रमाण पत्र में इस मांस को इंसानी उपभोग के लिए योग्य बताया गया था. ई-वे बिल से लेकर कोल्ड चेन तक कागजों पर सब दुरुस्त था, लेकिन हकीकत में 1,325 कार्टन के पीछे छिपा सच कुछ और ही था.
 

Aslam Chamda Bhopal Slaughter: यही है असलम चमड़ा का वो स्लॉटर हाउस जहां वो अपना अवैध कारोबार चलाता था. फिलहाल ये सील है और जांच जारी है.

Aslam Chamda Bhopal Slaughter: यही है असलम चमड़ा का वो स्लॉटर हाउस जहां वो अपना अवैध कारोबार चलाता था. फिलहाल ये सील है और जांच जारी है.

निगरानी के दावों की खुली पोल

नवंबर 2025 में जब यह प्रोजेक्ट सौंपा गया, तो शर्तों में 24×7 CCTV निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण जैसे कड़े नियम थे. लेकिन सवाल उठता है कि क्या ये कैमरे वाकई चालू थे? क्या वध के दिनों की फुटेज मौजूद है? डिस्पैच की ट्रेल कागजों में तो साफ है, लेकिन स्वतंत्र लैब टेस्ट और मवेशियों की खरीद के रिकॉर्ड का कोई ऑडिट नहीं हुआ. यह गोमांस गल्फ देशों में सप्लाई होता था और हड्डियां चीन भेजी जा रही थीं, जिससे करोड़ों का मुनाफा कमाया जा रहा था.

विश्वास सारंग की मांग: "दोषियों को मिले फांसी की सजा"

इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को अक्षम्य अपराध बताते हुए कहा, "गौ माता की हत्या से बड़ा कोई अपराध नहीं हो सकता. जो भी दोषी है और गोकशी में शामिल है, उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए. यह भी जांच का बड़ा विषय है कि आखिर एक साधारण व्यक्ति इतना बड़ा आदमी कैसे बन गया? इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए कि कौन-कहां और कैसे इस पूरे खेल में शामिल है. ऐसे लोगों को चिन्हित कर फांसी के फंदे तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए."

कांग्रेस का पलटवार: "सरकार सिर्फ बातें करती है"

वहीं, दूसरी तरफ विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, "हिंदुत्व और सनातन की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी की ट्रिपल इंजन सरकार में सरेआम गौ माता को काटा जा रहा है. हैरानी की बात यह है कि इस अपराध के पकड़े जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. हमने गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की थी, लेकिन सरकार इससे बच रही है. इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार को सिर्फ बातों के बजाय सख्त एक्शन लेना चाहिए." बहरहाल फिलहाल तो  जांच की सुई उन नगर निगम अधिकारियों की तरफ भी घूम रही है, जिनके हस्ताक्षर टेंडर फाइलों पर मौजूद हैं. 
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