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फर्जी सर्टिफिकेट से हथियाई MP कोटे की मेडिकल सीट, 17 साल शासकीय हॉस्पिटल में तैनात रहा, अब भेजा गया जेल

Fake Domicile Certificate: राजधानी भोपाल में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना की अदालत ने फर्जी मूल निवास पत्र के जरिए एमपी की मेडिकल सीट पर कब्जा जमाकर शासकीय चिकित्सालय में मेडिकल ऑफिसर बन डॉ. सीताराम शर्मा को दोषी करार दिया और सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई.

फर्जी सर्टिफिकेट से हथियाई MP कोटे की मेडिकल सीट, 17 साल शासकीय हॉस्पिटल में तैनात रहा, अब भेजा गया जेल
BY FAKE DOMICILE CERTIFICATE DOCTOR GET MP QUOTA MEDICAL SEAT

Fake Medical Seat: फर्जी डोमिसाइल सर्टिफिकेट के सहारे एमपी कोटे की मेडिकल सीट पर कब्जा कर डाक्टर बने एक मेडिकल अधिकारी को कोर्ट ने सजा सुनाई है. मूल रूप से उत्तर प्रदेश निवासी सीताराम शर्मा को दोषी पाए जाने पर कोर्ट ने 3 साल की सश्रम जेल की सजा और 2 हजार रुपए जु्र्माने की सजा सुनाई है. 

राजधानी भोपाल में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना की अदालत ने फर्जी मूल निवास पत्र के जरिए एमपी की मेडिकल सीट पर कब्जा जमाकर शासकीय चिकित्सालय में मेडिकल ऑफिसर बने डॉ. सीताराम शर्मा को दोषी करार दिया और सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई.

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भिंड में चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात था आरोपी

रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी डॉ. सीताराम शर्मा वर्तमान में जिला भिंड के शासकीय चिकित्सालय में चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात था. साल 2009 में पीएमटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद एमपी कोटे का अवैध लाभ लेने के लिए आरोपी ने मुरैना जिले की अंबाह तहसील का कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र पेश किया था, जिसके आधार पर उसे सीट मिली थी.

यह था पूरा मामला?

गौरतलब है तत्‍कालीन राज्‍य सभा सासंद और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह द्वारा STF भोपाल को शिकायत की गई थी कि व्‍यापाम वर्ष 2006 के बाद जो परीक्षाएं आयोजित हुई है और जो घोटाला हो रहा है उसमे यूपी के मूल निवासी एमपी में मेडिकल सीट पाने के लिए कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाकर कर प्रवेश ले रहे हैं.

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शिकायत के बाद एसटीएफ ने केस दर्ज कर किया था

साल 2009 में थाना एसटीएफ भोपाल को शिकायत मिली थी कि व्‍यावसायिक परीक्षा मण्‍डल भोपाल द्वारा आयोजित पीएमटी परीक्षा में आरोपी सीताराम शर्मा ने वर्ष 2009 मे पास होने पर एमपी कोटे का लाभ लेने लिए कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र का उपयोग किया था, जिसके तहत एसटीएफ ने केस दर्ज कर मामला जांच में लिया था.

STF ने धारा 420, 467, 468, 471 में केस दर्ज किया

एमपी मेडिकल कोटे का लाभ लेने के लिए डा. सीताराम शर्मा ने तहसील अम्‍बाह जिला मुरैना से झूठा कूटरचित मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाया था. फेक डोमिसाइल सर्टिफिकेट के आरोपों के बाद एसटीएफ ने आरोपी के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 केस दर्जकर जांच शुरू किया. 

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मूल रूप से यूपी का निकला आरोपी सीताराम शर्मा

जांच में पुष्टि हुई कि आरोपी सीताराम शर्मा ने मध्‍य प्रदेश की अम्‍बाह तहसील से कथित मूल निवासी बनाकर मेडिकल सीट पर प्रवेश लिया जबकि आरोपी मूल रूप से उत्‍तर प्रदेश का रहने वाला है. आरोपी  माध्यिमक शिक्षा परिषद उत्‍तर प्रदेश से 1984 हाईस्‍कूल की परीक्षा और 2001 मे इंटरमीडियेट की परीक्षा पास की थी.

तर्क, साक्ष्‍य, दस्‍तावेजों के तहत आरोपी को दोषी पाया

उल्लेखनीय है वर्तमान में जिला भिण्‍ड मे शासकीय चिकित्‍यालय मे चिकित्‍सा अधिकारी डा. सीताराम शर्मा के कथित मूल निवासी प्रमाण पत्र की जांच की गई तो प्रमाण पत्र तहसील अम्‍बाह जिला मुरैना से जारी होना नहीं पाया गया, जिसके बाद  न्‍यायालय में तर्क, साक्ष्‍य, दस्‍तावेजों के तहत आरोपी सीताराम शर्मा को दोषी पाया.

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