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भोपाल लिट फेस्ट: “बाबर” सत्र पर मचा बवाल! लेखक ने PM मोदी को पत्र लिखकर जताई नाराजगी

भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल में मुगल शासक बाबर पर लिखी किताब “Babur: The Quest for Hindustan” के सत्र को विरोध के चलते रद्द कर दिया गया. लेखक आभास मलदहियार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखकर नाराजगी जताई.

भोपाल लिट फेस्ट: “बाबर” सत्र पर मचा बवाल! लेखक ने PM मोदी को पत्र लिखकर जताई नाराजगी

Bhopal Literature Festival 2026:भोपाल में चल रहे लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल में एक किताब ने ऐसा विवाद खड़ा कर दिया कि चर्चा का सत्र शुरू होने से पहले ही रद्द करना पड़ा. मुगल शासक बाबर पर लिखी किताब “Babur: The Quest for Hindustan” के सत्र को लेकर विरोध इतना बढ़ गया कि आयोजकों को पुलिस की सलाह पर यह कदम उठाना पड़ा. इसके बाद लेखक ने प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखकर नाराजगी जताई.

सत्र रद्द होने से बढ़ा विवाद

भारत भवन में आयोजित फेस्टिवल में शनिवार को इस किताब पर चर्चा होनी थी. पहले सत्र के पोस्टर में बदलाव हुआ, फिर उस पर सफेद कागज चिपका दिया गया और अंत में सत्र रद्द कर दिया गया. आयोजकों ने बताया कि पुलिस ने उन्हें चेतावनी दी थी कि हिंदू संगठनों के प्रदर्शन से कार्यक्रम में अव्यवस्था हो सकती है. इसलिए बाकी सत्रों को बचाने के लिए यह फैसला लिया गया.

लेखक का पक्ष: ‘महिमामंडन' का आरोप गलत

किताब के लेखक आभास मलदहियार ने कहा कि उनके खिलाफ गलत नैरेटिव बनाया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि किताब में बाबर को आक्रांता बताया गया है, न कि उसका महिमामंडन किया गया है. आभास का कहना है कि उनकी किताब बाबरनामा और ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित है और इसमें दिखाया गया है कि बाबर भारत में जिहाद और दारुल-इस्लाम की सोच को बढ़ावा देना चाहता था.

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आयोजकों की मजबूरी

फेस्टिवल के को-डायरेक्टर अभिलाष खांडेकर ने कहा कि किताब पर कोई कानूनी रोक नहीं है और इसमें बाबर के खिलाफ काफी बातें लिखी गई हैं. लेकिन पुलिस ने वीएचपी और बजरंग दल के प्रदर्शन की आशंका जताई थी. तीन दिन में 60 सेशन थे, इसलिए बाकी कार्यक्रमों को बचाने के लिए एक सत्र हटाना पड़ा.

लेखक ने PM को लिखा खुला पत्र

सत्र रद्द होने के बाद लेखक आभास मलदहियार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखा. उन्होंने संस्कृति मंत्री और साहित्य अकादमी पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने किताब को बिना पढ़े ही सार्वजनिक टिप्पणी की. लेखक का कहना है कि यह घटना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती है.

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