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मॉब लिंचिंग में 14 को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली महिला जज को धमकियां, सुरक्षा में तैनात रहेंगे 6 पुलिसकर्मी

नर्मदापुरम के सिवनी मालवा में गौ तस्करी और मॉब लिंचिंग केस में 14 दोषियों को उम्रकैद सुनाने के बाद महिला जज को सोशल मीडिया पर धमकियां मिल रही हैं.

मॉब लिंचिंग में 14 को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली महिला जज को धमकियां, सुरक्षा में तैनात रहेंगे 6 पुलिसकर्मी
सजा सुनाने के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग.

गौ तस्करी और मॉब लिंचिंग मामले में 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली महिला जज को मिल रहीं धमकियों की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने निंदा की है. वहीं, जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ ने इस मामले को न्यायिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए स्वत: संज्ञान लिया है.

दरअसल, नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा में बहुचर्चित गौ तस्करी और मॉब लिंचिंग मामले में 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद महिला जज को सोशल मीडिया पर धमकियां मिल रही हैं. इस मामले में हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने कहा कि किसी न्यायिक अधिकारी को केवल इसलिए धमकाया नहीं जा सकता कि उसका फैसला समाज के किसी वर्ग को पसंद नहीं आया.

तीन दिन के भीतर मांगा हलफनामा

कोर्ट ने इसे न्यायिक व्यवस्था पर सीधा दबाव बनाने की कोशिश माना है. युगलपीठ ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) से तीन दिन के भीतर हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि सिवनी मालवा में पदस्थ न्यायाधीश तबस्सुम खान को सुरक्षा प्रदान कर दी गई है.

6 सुरक्षाकर्मी सुरक्षा में तैनात रहेंगे

नर्मदापुरम एसपी साईं कृष्ण एस. थोटा ने बताया कि जज की सुरक्षा के लिए 6 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. एक पीसीओ दिया गया है और एसडीओपी, टीआई सिवनी मालवा सहित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लगातार संपर्क में हैं. हाईकोर्ट ने धमकी देने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है. मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी.

एससीबीए ने की सख्त कार्रवाई की मांग

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने शुक्रवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के खिलाफ कथित धमकियों, सोशल मीडिया पर अपमानजनक अभियान और डराने-धमकाने की घटनाओं की निंदा की. बार एसोसिएशन ने एक बयान में कहा कि एसोसिएशन को उम्मीद है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और मध्य प्रदेश सरकार इस मामले की शीघ्र, निष्पक्ष व प्रभावी जांच सुनिश्चित करेंगे तथा न्यायिक अधिकारी को धमकियां या उनके खिलाफ नफरत भड़काने वाले सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करेंगे.

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