- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने पश्चिमी देशों पर बलशाली बनकर जड़वाद फैलाने का आरोप लगाया है
- भागवत के अनुसार भारत को विश्व गुरु बनने के लिए सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली होना आवश्यक है ताकि दुनिया उसे माने
- उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य को व्यवसाय न मानते हुए इसे सभी के लिए सुलभ और मूलभूत आवश्यकता बताया है
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने पश्चिमी देशों पर 'जड़वाद' फैलाने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि इन देशों की सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और जो भी बाधक बने उसे मिटा दो, और आज यही काम अमेरिका और चीन कर रहे हैं. भागवत ने यह भी कहा कि भारत को अगर 'विश्व गुरु' बनना है तो उसे सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा.
भागवत ने लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित शोधार्थी संवाद कार्यक्रम में कहा कि वर्तमान में वैश्वीकरण का मतलब बाजारीकरण से है, जो खतरनाक है. उन्होंने कहा, 'पश्चिमी देशों ने जड़वाद फैलाया. उन देशों की सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और बाकी को छोड़ दो, जो बाधक बने उन्हें मिटा दो. यही काम आज अमेरिका और चीन कर रहे हैं.'
भारत कैसे बनेगा विश्वगुरु? भागवत ने बताया
भागवत ने कहा कि आज दुनिया भर की समस्याओं का जवाब भारत के पास है, मगर यदि उसे विश्व गुरु बनना है तो सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा, क्योंकि दुनिया तभी मानती है जब सत्य के पीछे शक्ति हो.
उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यवसायीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकताएं है और यह व्यवसाय नहीं हो सकते.
उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सबके लिए सुलभ होने चाहिए. भागवत ने अंग्रेजों पर भारत की शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम के लोगों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था हटाकर अपनी व्यवस्था थोपी, जिससे उन्हें काम करने के लिए 'काले अंग्रेज' मिल जाएं. उन्होंने कहा, 'अंग्रेजों ने जो बिगाड़ा उसको ठीक करना होगा.'
संघ किसी के विरोध में नहीं है: भागवत
आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'संघ का कार्य देश को परम वैभव सम्पन्न बनाना है और संघ को समझना है तो संघ के अंदर आकर कर देखें, क्योंकि संघ को पढ़ कर नहीं समझा जा सकता.' उन्होंने कहा, 'संघ को सम्पूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने वाला एक ही काम करना है. संघ किसी के विरोध में नहीं है. संघ को लोकप्रियता, प्रभाव और शक्ति नहीं चाहिए.'
भागवत ने शोध की भूमिका के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की बड़ी भूमिका है. उन्होने शोधार्थियों से कहा कि जो भी शोध करें उसे उत्कृष्ट रूप से, प्रामाणिकता पूर्वक और निःस्वार्थ भाव से देश के लिए करें.
संघ प्रमुख ने कहा कि संघ को लेकर बहुत 'दुष्प्रचार' होता है, और शोधार्थियों को सत्य सामने लाना चाहिए. उन्होंने धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, 'सृष्टि जिन नियमों से चलती है वह धर्म है. धर्म सबको सुख पहुंचाता है. हमारी सभी बातों में धर्म लागू है.'
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं