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बिहार के किस इलाके से सबसे नजदीक है नेपाल, पैदल चलकर दूसरे देश पहुंच जाते हैं लोग

बिहार के सीमावर्ती इलाके जोगबनी और रक्सौल ऐसे स्थान हैं. जहां से लोग कुछ कदम चलकर ही नेपाल पहुंच जाते हैं. यहां पैदल आवाजाही, व्यापार, रोजगार और सांस्कृतिक जुड़ाव लंबे समय से जीवन का हिस्सा रहे हैं.

बिहार के किस इलाके से सबसे नजदीक है नेपाल, पैदल चलकर दूसरे देश पहुंच जाते हैं लोग
रक्सौल, पूर्वी चंपारण जिले का एक महत्वपूर्ण सीमाई शहर है. जो नेपाल के वीरगंज से जुड़ा हुआ है.

बिहार की सीमा पर कई इलाके ऐसे हैं, जहां से लोग बहुत आसानी से पैदल चलकर नेपाल पहुंच जाते हैं. इन जगहों की खासियत यह है कि यहां भारत-नेपाल सीमा बिल्कुल पास-पास पड़ती है. और, रोजमर्रा की जिंदगी में दोनों तरफ के लोगों का आपसी आना जाना, व्यापार और कामकाज लंबे समय से होता आया है. अररिया जिले का जोगबनी और पूर्वी चंपारण का रक्सौल ऐसे ही प्रमुख स्थान हैं. जहां सीमा इतनी करीब है कि लोग कुछ ही कदम चलकर दूसरे देश में पहुंच जाते हैं.

जोगबनी

जोगबनी, बिहार के अररिया जिले में स्थित एक अहम सीमावर्ती कस्बा है. इसे भारत का आखिरी रेलवे स्टेशन भी कहा जाता है, क्योंकि इसके आगे कुछ ही सौ मीटर की दूरी पर नेपाल की सीमा शुरू हो जाती है. यहां का रेलवे स्टेशन और बाजार दोनों नेपाल के बेहद करीब हैं. इसलिए लोग अक्सर पैदल ही सीमा पार करके दूसरी तरफ चले जाते हैं. कई परिवारों के रिश्ते-नाते और व्यापारिक संबंध भी दोनों तरफ फैले हुए हैं. जोगबनी और नेपाल के बीच ये सहज आवाजाही लंबे समय से स्थानीय जीवन का हिस्सा रही है.

रक्सौल

रक्सौल, पूर्वी चंपारण जिले का एक महत्वपूर्ण सीमाई शहर है. जो नेपाल के वीरगंज से जुड़ा हुआ है. यहां का पंटोका गांव भी सीमा से सटा हुआ इलाका माना जाता है. पहले यहां के लोग तकरीबन रोजाना काम-धंधे के लिए नेपाल जाते थे और कई लोग पैदल ही बॉर्डर पार कर लिया करते थे. रक्सौल-वीरगंज बॉर्डर भारत-नेपाल व्यापार का बड़ा केंद्र है. जहां से सामानों की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियां बड़े पैमाने पर होती हैं. इसी कारण ये इलाका व्यवसाय और रोजगार के लिहाज से भी खास महत्व रखता है.

क्यों खास हैं ये इलाके

इन जगहों की सबसे बड़ी बात ये है कि नेपाल इतनी नजदीक है कि बिना पासपोर्ट-वीजा के भी लोग पैदल जाकर दूसरी तरफ पहुंच जाते हैं. यहां सदियों से कल्चरल जुड़ाव, मेल-जोल और पारिवारिक संबंध जुड़े रहे हैं. साथ ही बिजनेस, कामकाज और छोटी-मोटी खरीद-फरोख्त के कारण यहां बॉर्डर सिर्फ एक सीमा नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है.

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