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Tamil Nadu Floor Test: फ्लोर टेस्ट क्या होता है, थलापति विजय बहुमत साबित नहीं कर पाए तो क्या होगा?

Tamil Nadu Floor Test: तमिलनाडु में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है, विजय की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. उन्हें 108 सीटें मिली हैं, लेकिन बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है. अब राज्य में फ्लोर टेस्ट की नौबत आ रही है.

Tamil Nadu Floor Test: फ्लोर टेस्ट क्या होता है, थलापति विजय बहुमत साबित नहीं कर पाए तो क्या होगा?
थलापति विजय की पार्टी को साबित करना है बहुमत

What Is Floor Test: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजे काफी चौंकाने वाले आए, सुपरस्टार थलापति विजय की नई नवेली पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कजगम) ने चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल कीं और अब सरकार बनाने की तैयारी हो रही है. हालांकि विजय के सामने बहुमत साबित करने की सबसे बड़ी चुनौती है, इसके लिए वो लगातार दूसरे विधायकों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं. इसी बीच राज्यपाल ने विजय से 118 विधायकों के साइन लाने के लिए कहा है, अगर ऐसा नहीं होता है तो राज्यपाल फ्लोर टेस्ट के लिए विधानसभा सत्र बुला सकते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि फ्लोर टेस्ट क्या होता है और इसमें कैसे वोट डाले जाते हैं. 

किसे कितनी सीटें मिली हैं?

  • TVK - 108 
  • DMK - 59
  • ADMK - 47
  • INC - 05
  • PMK - 04
  • IUML - 02
  • CPI - 02
  • कुल सीटें - 234
  • बहुमत - 118 
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क्या होता है फ्लोर टेस्ट? 

तमिलनाडु के राज्यपाल को अगर 118 विधायकों के साइन वाली चिट्ठी नहीं मिलती है तो वो विजय की पार्टी TVK से विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए बोल सकते हैं. इसके लिए फ्लोर टेस्ट या फिर विश्वास मत करवाया जाता है. इस टेस्ट से ये पता लगाया जाता है कि सरकार बनाने का दावा करने वाले के पास विधानसभा में बहुमत (Majority) है या नहीं. आमतौर पर मुख्यमंत्रियों को इस टेस्ट से गुजरना पड़ता है, जब उनकी सरकार अल्पमत में आती है या फिर विपक्ष ऐसा दावा करता है. इसमें एक और तरह का टेस्ट भी शामिल होता है. 

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कंपोजिट फ्लोर टेस्ट क्या है?

फ्लोर टेस्ट के अलावा एक और टेस्ट होता है, जिसे कंपोजिट फ्लोर टेस्ट कहा जाता है. यह केवल तब होता है जब एक से ज्यादा व्यक्ति सरकार बनाने का दावा पेश करते हैं. आमतौर पर ये तब होता है जब ये साफ न हो कि बहुमत किसके पास है, तब राज्यपाल एक विशेष सत्र बुला सकते हैं, जिससे यह देखा जा सके कि किसके पास सबसे ज्यादा विधायक हैं. 

फ्लोर टेस्ट या फिर कंपोजिट फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल कभी भी सत्र बुला सकते हैं. इसके लिए वो अपनी शक्तियों अनुच्छेद 163 और 174 का इस्तेमाल करते हैं. इस दौरान सबसे बड़ी पार्टी या फिर मौजूदा सरकार को बहुमत साबित करने के लिए कहा जाता है. बहुमत साबित नहीं कर पाने पर सरकार गिर जाती है और फिर दूसरे दल को मौका दिया जाता है. 

कैसे होती है वोटिंग?

फ्लोर टेस्ट के दौरान वोटिंग दो तरीके से हो सकती है... 

Voice Vote (ध्वनि मत): इसमें विधायक हां या ना बोलकर अपनी सहमति देते हैं.
Division Vote (विभाजन): इसमें विधायकों को अलग-अलग समूहों में गिना जाता है या फिर वो इलेक्ट्रॉनिक बटन दबाकर या पर्ची के जरिए वोट देते हैं.
अगर दो पार्टियों को बराबर वोट पड़ते हैं तो विधानसभा स्पीकर अपना वोट डालकर फैसला लेते हैं. 

बहुमत साबित नहीं हुआ तो क्या होगा?

तमिलनाडु में अगर कोई भी दल बहुमत साबित नहीं कर पाता है तो ऐसे में राज्यपाल अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं. आमतौर पर ये अंतिम विकल्प होता है और ऐसा होने से पहले ही कोई न कोई दल गठबंधन कर बहुमत हासिल कर लेते हैं. 

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