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क्या है अमरनाथ गुफा के कबूतरों की कहानी? जानें कैसे हुई थी यात्रा की शुरुआत

Amarnath Cave: इस साल की अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है और श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर रहे हैं. इसी बीच आगरा में एक परिवार के फ्रिज में बर्फ से बनी आकृति को कुछ लोगों ने अमरनाथ गुफा से जोड़ दिया. इस दौरान एक बुजुर्ग ने कबूतरों की कहानी का भी जिक्र किया.

क्या है अमरनाथ गुफा के कबूतरों की कहानी? जानें कैसे हुई थी यात्रा की शुरुआत
अमरनाथ गुफा के कबूतरों की कहानी

Amarnath Cave: अमरनाथ यात्रा पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी है और हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अमरनाथ की गुफा में भगवान शिव हिम लिंग के रूप में बैठते हैं और कुछ वक्त बाद अंतर्ध्यान हो जाते हैं.  इसी बीच आगरा से एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक घर के फ्रिज में शिवलिंग जैसी बर्फ जम गई और लोगों ने उसे अमरनाथ से जोड़ दिया. इस दौरान एक बुजुर्ग यहां पहुंचे और अमरनाथ के कबूतरों की कहानी सुनाने लगे. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर अमरनाथ के कबूतरों का क्या राज है और ये कहानी क्या है. 

क्या है कबूतरों की कहानी?

शिव पुराण में इस बात का जिक्र किया गया है. पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुनाने के लिए अमरनाथ गुफा में ले गए तो इस दौरान वहां दो कबूतर भी मौजूद थे. जब कथा पूरी हो चुकी थी, तब शिव को आभास हुआ कि उनके अलावा गुफा में कोई और जीव भी मौजूद है. शिव को इस पर क्रोध आया, लेकिन कबूतरों ने उनसे माफी मांगी और कहा कि उन्हें क्षमा कर दीजिए. इसके बाद शिव ने उन्हें माफ किया और वरदान दिया कि वो हमेशा इस गुफा में शिव-पार्वती के प्रतीक के तौर पर मौजूद रहेंगे. यही वजह है कि इन कबूतरों को अमर माना जाता है. 

आज भी दिखते हैं कबूतर

अमरनाथ यात्रा पर गए श्रद्धालुओं को आज भी सफेद कबूतर दिखते हैं, माना जाता है कि जिन लोगों को ये कबूतर दिखते हैं, वो काफी भाग्यशाली होते हैं. इतनी ठंडी जगह पर रहना और कबूतरों का तमाम मुश्किलों के बीच दिखना एक चमत्कार माना जाता है. जिन लोगों को कबूतरों का दर्शन होता है, वो अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं. 

कैसे शुरू हुई यात्रा?

इसके पीछे कुछ अलग-अलग कहानियां हैं. सबसे लोकप्रिय कथा में बूटा मलिक नाम के एक चरवाहे का नाम आता है. यह घटना करीब 150 साल पुरानी बताई जाती है. बताया जाता है कि बूटा मलिक अपनी भेड़ें चराते हुए पहाड़ी पर काफी ऊपर निकल गए थे. वहां उनकी मुलाकात एक साधु से हुई. साधु ने उन्हें कोयले से भरी एक कांगड़ी दी, जब बूटा मलिक अपने घर पहुंचे और उन्होंने उस बर्तन को देखा, तो कोयला सोने के सिक्कों में बदल चुका था. वो उस साधु का धन्यवाद करने वापस भागे, लेकिन वहां साधु की जगह उन्हें एक विशाल प्राकृतिक गुफा मिली, जिसमें बर्फ का चमचमाता शिवलिंग स्थापित था. इसके बाद से ही लोगों ने इस पवित्र स्थान की यात्रा शुरू कर दी. लंबे समय तक इस गुफा की देखभाल और चढ़ावे का एक हिस्सा बूटा मलिक के परिवार को जाता था. 

यात्रा पर जाते हैं हजारों भक्त

हर साल की तरह इस साल भी अमरनाथ गुफा की यात्रा शुरू हुई और इसमें रजिस्ट्रेशन करवाने वाले लोग बाबा बर्फानी के दर्शन करने निकल पड़े. हालांकि पिछले कुछ सालों की तुलना में इस बार बर्फनुमा शिवलिंग जल्दी लुप्त हो गया. आमतौर पर बाबा 15 से 20 दिन में अंतर्ध्यान होते थे. 

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