कांग्रेस की तरफ से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बार फिर चुनाव आयुक्त पर हमलावर रहे. इस दौरान राहुल गांधी भी उनके साथ मौजूद थे. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले राहुल गांधी ने एक पोस्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त को मिलने वाली आजीवन इम्युनिटी का जिक्र किया और सवाल उठाया कि ऐसा क्यों किया गया? इसके बाद उन्होंने खुद ही इसका जवाब भी दिया. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि भारत के चुनाव आयुक्त को नौकरी में रहते हुए और रिटायरमेंट के बाद कौन सी ऐसी इम्युनिटी मिली है और क्यों उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है.
कानूनी मामलों और गिरफ्तारी से मिली है सुरक्षा
भारत के चुनाव आयुक्तों के खिलाफ ड्यूटी पर रहने के दौरान किसी भी फैसले या फिर निर्देश को लेकर केस दर्ज नहीं किया जा सकता है, साथ ही उन्हें इसके लिए गिरफ्तार भी नहीं कर सकते हैं. रिटायर होने के बाद भी ये सुरक्षा उन्हें आजीवन मिलती है. चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून के तहत उन्हें ये इम्युनिटी मिलती है. साल 2023 में इस कानून में बदलाव किया गया था, जिसके बाद चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा दे दी गई.
कानून में क्या लिखा गया है?
इस कानून में लिखा गया है - "मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयुक्त, क्षेत्रीय चुनाव आयुक्त या चुनाव आयोग के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई भी मुकदमा, अभियोजन या अन्य कानूनी कार्रवाई नहीं चलाई जा सकेगी, यदि वो कार्य इस कानून या इसके तहत बने किसी नियम या आदेश के तहत नेक नीयत (ईमानदारी/गुड फेथ) से किया गया हो या किए जाने का इरादा रहा हो.इस कानून के लागू होने की तारीख से, किसी भी सिविल कोर्ट को चुनाव आयोग के किसी भी आदेश या फैसले के खिलाफ किसी भी मुकदमे, याचिका या अपील पर विचार करने का अधिकार नहीं होगा."
कानून में लिखा गया है कि, मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयुक्त, क्षेत्रीय चुनाव आयुक्त, और चुनाव आयोग के अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को इस कानून के प्रावधानों के तहत काम करते समय 'लोक सेवक' यानी पब्लिक सर्वेंट माना जाएगा. इसके अलावा कहा गया है कि, इस कानून के प्रावधान प्रभावी रहेंगे, भले ही उस समय लागू किसी अन्य कानून या कानूनी दस्तावेज में इसके विपरीत कोई भी बात क्यों न कही गई हो.
चयन समिति में भी हुआ था बदलाव
साल 2023 में चुनाव आयुक्तों को नियुक्त करने वाली चयन समिति से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को बाहर कर दिया गया. इससे पहले प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और सीजेआई इस कमेटी में शामिल होते थे, वहीं अब सीजेआई की जगह केंद्रीय मंत्री को दे दी गई है.
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