Citizenship Docuement: नागरिकता के डॉक्यूमेंट्स को लेकर देश में कई बार बहस छिड़ती रही है. अब एक बार फिर इसे लेकर चर्चा है, क्योंकि विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पासपोर्ट नागरिकता साबित करने का डॉक्यूमेंट नहीं है, ये सिर्फ एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है. फिलहाल इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है और विपक्ष के नेता सरकार पर हमलावर हैं. इसी बीच देशभर के लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर पासपोर्ट से भी नागरिकता साबित नहीं हो सकती है तो आखिर इसे साबित करने का असली डॉक्यूमेंट क्या है? आइए हम आपको इस सवाल का जवाब देते हैं.
पासपोर्ट के अलावा आधार या वोटर कार्ड भी नहीं आएंगे काम
पासपोर्ट को लेकर सरकार की तरफ से स्थिति साफ की गई है, लेकिन इससे पहले ये भी बताया जा चुका है कि आधार कार्ड या फिर वोटर आईडी कार्ड से नागरिकता साबित नहीं की जा सकती है. यानी ये डॉक्यूमेंट आपकी पहचान तो बता सकते हैं, लेकिन नागरिकता साबित करने के लिए काफी नहीं हैं. हालांकि कई लोग अब भी यही मानते हैं कि वो इन तमाम दस्तावेजों को दिखाकर अपनी नागरिकता साबित कर सकते हैं.
नागरिकता को लेकर क्या कहता है संविधान?
भारत के संविधान में नागरिकता और इसके नियमों का जिक्र है. आर्टिकल 5 से लेकर 11 तक नागरिकता की बात कही गई है. इसमें ये साफ तौर पर लिखा गया है कि जिस दिन देश का संविधान बना था, यानी 26 जनवरी 1950 को भारत में मौजूद हर व्यक्ति भारतीय नागरिक माना जाएगा, बशर्ते उसका जन्म भारत में ही हुआ हो. 1955 में लाए गए कानून में वो शर्तें तय की गईं, जिनके तहत बताया गया कि नागरिकता किसे मिल सकती है और कब खत्म हो सकती है.
- वंश के आधार पर नागरिकता
- जन्म के आधार पर नागरिकता
- रजिस्ट्रेशन के आधार पर नागरिकता
- नैचुरलाइजेशन के आधार पर नागरिकता
- किसी देश के भारत में शामिल होने पर नागरिकता
क्या है नागरिकता का असली दस्तावेज?
भारतीय संविधान कहता है कि भारत में पैदा होने वाला हर शख्स भारत का नागरिक है. यही वजह है कि आधिकारिक तौर पर नागरिकता साबित करने का कोई एक दस्तावेज नहीं है. क्योंकि जन्म को ही आधार माना गया है, ऐसे में लोग जन्म प्रमाण पत्र यानी बर्थ सर्टिफिकेट दिखाकर साबित कर सकते हैं कि उनका जन्म भारत में हुआ है और इस लिहाज से वो भारत के ही नागरिक हैं. ग्राम पंचायत, नगर निगम या फिर नगर पालिका से जारी करवाया जाता है. जिन लोगों के पास बर्थ सर्टिफिकेट नहीं है, वो इसके लिए बाकी जरूरी डॉक्यूमेंट्स का सहारा लेकर इसे बना सकते हैं और फिर नागरिकता के दस्तावेज के रूप में इसे सौंपा जा सकता है.
हालांकि नागरिकता कानून में कई तरह के बदलाव किए गए हैं, जिसके बाद अब ये भी देखा जाता है कि नागरिकता साबित करने वाला व्यक्ति किस साल में पैदा हुआ है. इसके लिए अलग-अलग क्राइटेरिया हैं.
- जिन लोगों का जन्म 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच हुआ है, वो जन्म प्रमाण पत्र से ही नागरिकता साबित कर सकते हैं. तब सिर्फ भारत में जन्म के आधार पर ही मान्यता मिल जाती थी.
- 1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के बीच भारत में जन्म लेने वाले लोगों को जन्म प्रमाण पत्र के साथ ये भी साबित करना होगा कि उनके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक था.
- 3 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे लोगों को बर्थ सर्टिफिकेट के साथ इस बात का भी सबूत देना पड़ता है कि माता-पिता दोनों ही भारतीय नागरिक हैं, या फिर वो अवैध प्रवासी (Illegal Migrant) नहीं हैं.
पूर्व विदेश सचिव ने किया एक्सप्लेन
भारतीय विदेश सचिव के रूप में काम कर चुकीं निरुपमा मेनन राव ने इस पूरे मामले को लेकर एक डीटेल्ड पोस्ट किया है. जिसमें उन्होंने बताया है कि पासपोर्ट कहां नागरिकता का एक सबूत है और कब इसे अकेला नागरिकता का दस्तावेज नहीं माना जाएगा. उन्होंने लिखा, "कानूनी तौर पर यह बात बिल्कुल सही है. पासपोर्ट, 'पासपोर्ट अधिनियम' (Passports Act) के तहत जारी किया जाता है, जबकि नागरिकता 'नागरिकता अधिनियम, 1955' (Citizenship Act, 1955) के तहत तय होती है. एक कानून डॉक्यूमेंट को संभालता है और दूसरा आपके कानूनी दर्जे को. ज्यादातर भारतीयों के लिए, पासपोर्ट भारत सरकार की तरफ से जारी किया जाने वाला सबसे भरोसेमंद दस्तावेज है. इस पर 'रिपब्लिक ऑफ इंडिया' लिखा होता है, इसमें धारक की पहचान होती है, और पूरी दुनिया में इसे इसलिए स्वीकार किया जाता है, क्योंकि विदेशी सरकारों को भरोसा होता है कि भारत ने इसे जारी करने से पहले नागरिकता की जांच की है. इसलिए, लोगों का यह पूछना बिल्कुल जायज है कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है, तो फिर क्या है?"
The discussion sparked by a recent statement on Passport Seva Divas has generated more heat than light.
— Nirupama Menon Rao 🇮🇳 (@NMenonRao) June 25, 2026
The Ministry of External Affairs stated that a passport is a travel document, not a document of citizenship. Legally, that is correct. A passport is issued under the Passports… https://t.co/fz8Ct3OqIj
पूर्व विदेश सचिव निरुपमा मेनन राव ने आगे लिखा, "पासपोर्ट नागरिकता साबित नहीं करता, ना ही यह वह आखिरी कानूनी दस्तावेज है जो अदालत में नागरिकता को लेकर कोई विवाद होने पर उसे तय करे. कई दूसरे लोकतांत्रिक देशों की तरह, भारत भी नागरिकता के कानून और पासपोर्ट के कानून को अलग-अलग रखता है. धोखाधड़ी, माता-पिता की पहचान से जुड़े विवाद या गलत तरीके से नागरिकता हासिल करने जैसे कुछ खास मामलों में, नागरिकता अधिनियम और अन्य सबूतों के जरिए नागरिकता साबित करनी पड़ सकती है. यही वजह है कि कानून में पासपोर्ट को हर स्थिति में नागरिकता का आखिरी या पक्का सबूत नहीं माना जाता."
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