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मिथुन से लेकर बद्री और पुंगनूर तक, भारत में कितनी तरह की गाय होती हैं?

मिथुन गाय को लेकर बहस छिड़ी हुई है. देश में इसके अलावा गिर, साहीवाल, बद्री, राठी और पुंगनूर जैसी कई देसी नस्लें पाई जाती हैं. अलग-अलग इलाकों के हिसाब से गायों की नस्लें दूध, खेती और स्थानीय जरूरतों के लिए जानी जाती हैं.

मिथुन से लेकर बद्री और पुंगनूर तक, भारत में कितनी तरह की गाय होती हैं?
भारत में कितनी तरह की गाय होती हैं

Indian Cow Breeds: देश में इन दिनों मिथुन गाय को लेकर बहस तेज है. बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी के उस बयान पर बवाल मच गया है, जिसमें उन्होंने बॉस इंडिकस और मिथुन प्रजाति में अंतर बताते हुए कहा, नार्थ ईस्ट में मिथुन प्रजाति को लोग खाया करते हैं. वो गाय जैसी भले है, लेकिन गाय नहीं है. इस पर सोशल मीडिया से लेकर धर्म विद्वानों तक की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. भारत में गाय को मां का दर्जा मिला है. ये सिर्फ दूध देने वाली पशु नहीं, बल्कि खेती, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. यहां गाय की 50 से ज्यादा नस्लें पाई जाती हैं. आइए जानते हैं 10 सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली नस्लें कौन सी हैं.

मिथुन 

मिथुन गाय की प्रजाति पूर्वोत्तर भारत में पाई जाती है. यह देखने में गाय जैसी है, लेकिन वैज्ञानिक तौर पर इसे देसी गाय (बॉस इंडिकस) नहीं माना जाता. स्थानीय जनजातियों के लिए यह सामाजिक और आर्थिक रूप से अहम है.

बद्री गाय

उत्तराखंड की बद्री गाय छोटी कद की होती है, लेकिन इसका दूध A2 प्रोटीन से भरपूर माना जाता है. पहाड़ी इलाकों में यह बेहद उपयोगी नस्ल है. ये दिखने में काफी खूबसूरत होती हैं. 

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गिर गाय

इस गाय को दूध की क्वीन कहा जाता है. गुजरात की गिर गाय देश की सबसे ज्यादा दूध देने वाली देसी नस्लों में गिनी जाती है. इसकी पहचान लंबे कान और उभरे माथे से होती है. डेयरी सेक्टर में इसकी काफी डिमांड है.

साहीवाल

पंजाब और हरियाणा की साहीवाल गाय को रेड गोल्ड कहा जाता है. यह गर्मी सहन कर लेती है और लगातार अच्छा दूध देती है, इसलिए किसानों की पसंद बनी हुई है.

लाल सिंधी

लाल सिंधी गाय कम देखभाल में भी ठीक-ठाक दूध देती है. इसका रंग गहरा लाल होता है और यह लंबे समय तक दूध देने के लिए जानी जाती है. 

थारपारकर

राजस्थान और कच्छ इलाके की थारपारकर गाय गर्मी और सूखे में भी टिक जाती है. यह दूध देने और खेती करने दोनों कामों में इस्तेमाल होती है.

राठी

बीकानेर इलाके की राठी गाय दूध भी देती है और खेती में भी मदद करती है. यही वजह है कि इसे किसान बहुत ज्यादा पसंद करते हैं.

कांकरेज

गुजरात और राजस्थान की कांकरेज गाय मजबूत शरीर और शांत स्वभाव के लिए जानी जाती है. इसका इस्तेमाल खेती और दूध दोनों में होता है.

रेड कंधारी

महाराष्ट्र की रेड कंधारी गाय कम दूध देती है, लेकिन बीमारी और गर्मी के खिलाफ इसकी सहनशक्ति इसे खास बनाती है.

पुंगनूर

आंध्र प्रदेश की पुंगनूर गाय अपने छोटे आकार के लिए मशहूर है. कम चारे में भी यह जिंदा रहती है और आजकल काफी दुर्लभ मानी जाती है.

लेखक के बारे में
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मुकेश बौड़ाई
Chief Copy Editor
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