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नॉर्थ ईस्ट में मिलने वाली मिथुन और गाय में क्या अंतर है? जानें क्या हैं इनके काम

Mithun And Cow: बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी के एक बयान के बाद से ही नॉर्थ-ईस्ट में मिलने वाले मिथुन प्रजाति के पशु को लेकर चर्चा हो रही है. लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये गाय नहीं होती है और ये गाय से कितनी अलग होती है.

नॉर्थ ईस्ट में मिलने वाली मिथुन और गाय में क्या अंतर है? जानें क्या हैं इनके काम
मिथुन और गाय में अंतर

Mithun And Cow: भारत में गाय हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती है, हिंदू समुदाय में इसे पूजा जाता है और घरों में लोग गाय पालते हैं. वहीं कुछ भारतीय राज्य ऐसे भी हैं, जहां इस तरह दिखने वाले जानवरों का मांस खाया जाता है. कुछ दिन पहले एक टीवी डिबेट में बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी के एक बयान से ये बहस तेज हो गई, जिसमें उन्होंने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट में लोग गाय को नहीं बल्कि मिथुन नाम के जीव का मांस खाते हैं. अब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी मिथुन के साथ एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने लिखा कि 'यह मिथुन है, जो अरुणाचल प्रदेश का राजकीय पशु है'. ऐसे में आज हम आपको गाय और मिथुन में अंतर बता रहे हैं, साथ ही ये भी जानेंगे कि कैसे ये एक दूसरे से जुड़े हैं. 

क्या है पूरा मामला?

सुधांशु त्रिवेदी के गाय और मिथुन को अलग बताने वाले बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक बहस शुरू हो गई, जिसमें लोगों ने कहा कि दोनों ही गाय की प्रजाति हैं, फिर ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि बीजेपी के लिए कहीं गाय पूजनीय है, कहीं दूसरे नाम से बुलाकर इसका मांस खाया जाता है. इसी बहस के बीच किरेन रिजिजू ने वीडियो शेयर कर बताया कि मिथुन कैसा दिखता है. 

क्या होता है मिथुन?

मिथुन एक तरह का जंगली पशु है, जिसे नॉर्थ ईस्ट में लोगों ने पालना शुरू कर दिया. देखते ही देखते, ये पशु हर घर का अहम हिस्सा बन गया और अब अरुणाचल प्रदेश का राजकीय पशु है. कुछ लोग नॉर्थ-ईस्ट में बीफ के तौर पर इस पशु के मांस का इस्तेमाल करते हैं. ये मिथुन पशु चीन, बांग्लादेश, तिब्बत और म्यांमार में भी पाया जाता है. भारत की बात करें तो ये अरुणाचल के अलावा नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर में पाए जाते हैं. स्थानीय भाषा में इसे गायल भी कहा जाता है. मिथुन किसी भी परिस्थिति में जिंदा रह सकते हैं और नॉर्थ ईस्ट के लोगों की संस्कृति का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं. यही वजह है कि इसे वहां पहाड़ों का आभूषण भी कहा जाता है. 

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इन चीजों में आता है काम

मिथुन गाय की ही तरह दिखती है और इसका सिर आमतौर पर थोड़ा चौड़ा होता है. इनकी हाइट भी छोटी होती है और स्वभाव काफी शांत माना जाता है. नॉर्थ-ईस्ट में कुछ जगह शादियों में भी मिथुन पशु दिया जाता है. मिथुन का इस्तेमाल दूध, मांस और कृषि कार्यों के लिए किया जाता है. इसकी खाल से चमड़ा भी बनाया जाता है. 

गाय से कितना अलग?

मिथुन और गाय दिखने में लगभग एक ही जैसे होते हैं, लेकिन इनमें सबसे बड़ा अंतर ये है कि मिथुन पूरी तरह से जंगली मवेशी है, जिसे लोगों ने घरों में पालना शुरू कर दिया. वहीं गाय पहले से ही मनुष्यों के बीच रही है और उसका जिक्र पुराणों में भी है. यानी गाय एक पालतू पशु है. भारत में गाय की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, यही वजह है कि कुछ लोग नॉर्थ-ईस्ट की मिथुन को भी गाय की ही एक प्रजाति मानते हैं. इसे जर्सी गाय के तौर पर भी देखा जाता है. गाय की तरह ही मिथुन का इस्तेमाल दूध और कृषि कार्यों के लिए होता है, ऐसे में इनमें दूसरा कोई बड़ा अंतर नहीं दिखता है. 
 

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