- नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस कैंडिडेट मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया गया है लेकिन उनकी उम्मीदवारी बनी रहेगी
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार केवल दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर ही उम्मीदवारी रद्द होती है
- गिरफ्तार उम्मीदवार जेल से नामांकन दाखिल कर सकते हैं और समर्थकों के जरिए चुनाव प्रचार भी कर सकते हैं
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव को लेकर माहौल गरमा गया है. इस सीट पर हालात ऐसे हैं कि कोलकाता से दिल्ली तक हलचल तेज है. देश भर की नजरें अब इस सीट पर हैं. फिलहाल नंदीग्राम सीट से टीएमसी की कैंडिडेट रहीं संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया है. इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस कैंडिडेट मिलन प्रधान के समर्थन का ऐलान कर दिया. इस घोषणा के कुछ देर बाद ही मिलन प्रधान को अरेस्ट कर लिया गया. अब सवाल है कि 6 अक्तूबर को होने वाले उपचुनाव पर इसका क्या असर होगा? आइए जानते हैं...
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार यदि किसी उम्मीदवार को अरेस्ट कर लिया जाता है, तब भी वह चुनाव में बना रहेगा. उसकी उम्मीदवारी रद्द नहीं होगी. ऐसी स्थिति तभी बनती है, जब उम्मीदवार को किसी मामले में दोषी ठहराकर दो साल या उससे अधिक की सजा सुना दी जाए. यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर महज गिरफ्तारी के आधार पर किसी कैंडिडेट को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता. नियम के मुताबिक सिर्फ गिरफ्तारी या हिरासत में होने मात्र से कोई व्यक्ति चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं होता.
जेल से भी हो सकता है चुनाव प्रचार, लड़ने पर रोक नहीं
नियम के अनुसार कोई भी उम्मीदवार जेल से भी नामांकन दाखिल कर सकता है या चुनाव लड़ सकता है. इस दौरान वह वोट डालने के लिए बाहर नहीं आ सकता, लेकिन समर्थकों के माध्यम से चुनाव प्रचार करा सकता है. यदि किसी उम्मीदवार को किसी मामले में 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा हो जाती है, तब उसकी उम्मीदवारी या सदस्यता समाप्त होती है. यदि नामांकन से पहले ही ऐसी सजा हो जाती है तो फिर उम्मीदवारी संभव ही नहीं है. लेकिन जैसी स्थिति कांग्रेस कैंडिडेट की है, उन्हें चुनाव लड़ने से रोका नहीं जा सकता. यही नहीं यदि वह विधायक चुने जाते हैं तो वह सामान्य कामकाज भी करते रहेंगे.
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विधायक बनने के बाद भी सजा मिली तो चली जाएगी सदस्यता
यदि इस बीच में उन्हें भी दो साल या उससे अधिक की सजा सुना दी जाती है तो फिर सदस्यता चली जाएगी. गिरफ्तार उम्मीदवार जेल से ही कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जमानत के लिए आवेदन कर सकता है. इस तरह गिरफ्तारी या पुलिस हिरासत में होने से मिलन प्रधान की उम्मीदवारी रद्द नहीं होगी. वह जेल में रहे तो भी 6 अक्तूबर के चुनाव में उनकी उम्मीदवारी कायम रहेगी. इसके अलावा यदि बेल मिल गई तो वह सामान्य उम्मीदवार की तरह प्रचार भी कर सकेंगे.
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