अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के चलते दुनियाभर की फ्यूल सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ा है. इससे भारत भी अछूता नहीं रह गया है. मौजूदा समय में LPG की उपलब्धता को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम हैं. लेकिन इस स्थिति ने एक बार फिर से लोगों के बीच एक रोचक सवाल खड़ा कर दिया है कि खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले गैस सिलिंडर में केवल LPG की क्यों भरी जाती है? क्या इसकी जगह हम कोई और गैस, जैसे PNG नहीं भर सकते. तो जवाब है 'ना'. आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों है -
स्टोरेज एक एक बड़ी समस्या
LPG के ज्यादा इस्तेमाल की सबसे बड़ी वजह यह है कि इसे कम दबाव में आसानी से लिक्विड रूप में बदला जा सकता है. इससे बड़ी मात्रा में गैस को छोटे स्टील सिलेंडर में स्टोर करना संभव हो जाता है. वहीं, PNG (Piped Natural Gas) या नेचुरल गैस को लिक्विड में तब्दील करना आसान नहीं होता है. इसे स्टोर करने के लिए बहुत ज्यादा दबाव की जरूरत पड़ती है.
इतना ज्यादा दबाव झेलने के लिए सिलेंडर काफी मोटे और भारी बनाने पड़ेंगे, जो शायद भारतीय किचन में इस्तेमाल के लिए बेहतर ऑप्शन नहीं बन पाएंगे. अगर LPG सिलेंडर में PNG भरने की कोशिश की जाए, तो सिलेंडर फटने या गैस लीक होने का खतरा बढ़ सकता है. इसी वजह से गैस कंपनियां और सुरक्षा नियम इसे सख्ती से मना करते हैं. इसलिए PNG को आमतौर पर पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचाया जाता है.
एनर्जी एफिशिएंसी में भी एलपीजी आगे
LPG का एक और बड़ा फायदा इसकी ज्यादा कैलोरीफिक वैल्यू है. इसका मतलब है कि जलने पर यह ज्यादा गर्मी पैदा करती है. LPG, मीथेन या नेचुरल गैस के मुकाबले लगभग ढाई गुना ज्यादा गर्मी पैदा कर सकती है. यही कारण है कि LPG पर खाना जल्दी पकता है और कम फ्यूल में ज्यादा काम हो जाता है.
एलपीजी ज्यादा सुरक्षित भी
सुरक्षा के लिहाज से भी LPG बेहतर ऑप्शन है. LPG हवा से भारी होती है, इसलिए अगर गैस लीक होती है तो वह जमीन के पास जमा हो जाती है और अक्सर इसकी गंध (Smell) से जल्दी पता चल जाता है. वहीं LPG हवा से हल्की होती हैं और तेजी से ऊपर की ओर फैल जाती हैं. ऐसे में बंद जगहों में लीक का पता लगाना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है.
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