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Iran Protest: शिया देश कैसे बन गया ईरान? इस्लाम नहीं, पहले इस धर्म का था बोलबाला

Iran Religion: ईरान में खामनेई सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं. लोग महंगाई को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं और अब तक कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है. फिलहाल देशभर में फोन और इंटरनेट जैसी चीजों को बंद कर दिया गया है.

Iran Protest: शिया देश कैसे बन गया ईरान? इस्लाम नहीं, पहले इस धर्म का था बोलबाला
ईरान में कैसे आया शिया धर्म

Iran Protest: ईरान में भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हैं और कई जगहों पर प्रदर्शन चल रहे हैं. सरकार के खिलाफ लोगों में गुस्सा है और सैयद अली हुसैनी खामेनेई का इस्तीफ मांगा जा रहा है. इन प्रदर्शनों के बीच सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया है और बाकी कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए गए हैं. सरकार विरोधी इन प्रदर्शनों में अब तक कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि ईरान कैसे एक शिया देश बन गया और यहां पहले किस धर्म का पालन किया जाता था. 

इस्लाम नहीं इस धर्म का केंद्र था ईरान

ईरान में भले ही अब शिया यानी इस्लामिक शासन चल रहा हो, लेकिन एक दौर था जब ये इस्लाम नहीं बल्कि पारसी धर्म का केंद्र था. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक यहां सबसे पहले आर्य जनजाति के लोगों ने पनाह ली थी. पैगंबर जोरोस्टर को ईरान में पारसी धर्म का संस्थापक माना जाता है. यहां की सभ्यता काफी ज्यादा पुरानी है, एक दौर में ईरान के राजा यूनान से लेकर हिंदुस्तान तक के कई हिस्सों पर राज करते थे. 550 ईसा पूर्व से 651 ईस्वी तक ईरान में पारसी धर्म का बोलबाला रहा. 

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ईरान में कैसे आया इस्लाम?

ईरान में 7वीं सदी में इस्लाम ने पहली बार अपने पैर पसारने शुरू किए. मुस्लिम शासकों ने हमले किए और धीरे-धीरे इस्लाम देश में फैलने लगा. इसके बाद कई पारसियों ने इस्लाम धर्म को कबूल कर लिया और कुछ ही दशकों में ईरान एक इस्लामिक देश बन गया. इसके बाद 1501 में ईरान में शिया शासन की शुरुआत हो गई, हालांकि तब तक पूरी तरह से कट्टर इस्लामिक नीतियां लागू नहीं हुई थीं. 

कब आई इस्लामिक क्रांति?

ईरान में 1979 से पहले रजा शाह पहलवी वंश का शासन था. ये वो दौर था, जब ईरान में पश्चिमी सभ्यता को अपनाया गया. इसमें महिलाओं को उनके अधिकार देना और तमाम तरह की आजादी दी गई थी. हालांकि उनकी इस खुली सोच के खिलाफ इस्लामिक कट्टरपंथी प्रदर्शन शुरू हो गए और आखिरकार रजा को देश छोड़ना पड़ा. इसके बाद 1979 में ईरान पूरी तरह से बदल गया और शरिया कानून के तहत कामकाज शुरू हो गया. शिया कानूनों के आने के बाद महिलाओं की भूमिका सीमित हो गई और कई तरह की सेंसरशिप लागू हुई. इसके साथ ही ईरान में मौजूद अल्पसंख्यकों को देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. 

खामनेई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन

फिलहाल ईरान में सुप्रीम लीडर खामनेई के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं. लोग महंगाई को लेकर सड़कों पर उतरे हैं और हालात काबू से बाहर होते दिख रहे हैं. अब तक इन प्रदर्शनों में 45 लोगों की मौत हो चुकी है. 

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