High Courts in India: भारत में न्याय व्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा सुप्रीमकोर्ट और हाईकोर्ट हैं. किसी भी राज्य में हाईकोर्ट सबसे बड़ी अदालत होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश के कुल 28 राज्यों में सिर्फ 25 हाईकोर्ट्स ही क्यों हैं, कौन-सा हाईकोर्ट किस राज्य के लिए काम करता है या किन राज्यों का एक ही हाईकोर्ट है. आइए जानते हैं हाईकोर्ट्स से जुड़े हर वो सवाल, जो आपको पता होने चाहिए.
28 राज्य, फिर सिर्फ 25 हाईकोर्ट क्यों
हमारे देश के कानून यानी संविधान में हर चीज का एक नियम है. आर्टिकल 214 कहता है कि भारत के हर राज्य के पास अपना एक हाईकोर्ट होना चाहिए. लेकिन साथ ही, आर्टिकल 231 संसद को यह पावर देता है कि वह चाहे तो दो या उससे ज्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) को मिलाकर एक ही जॉइंट हाईकोर्ट (Common High Court) बना सकती है. यही वजह है कि भारत में कुल 25 हाईकोर्ट ही काम कर रहे हैं. देश के सभी 8 केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली अकेला ऐसा है, जिसके पास अपनी खुद की पर्सनल हाईकोर्ट बिल्डिंग और सिस्टम है. बाकी सभी को किसी न किसी राज्य के साथ शेयर करना पड़ता है.
हाईकोर्ट में कौन-कौन होते हैं
हर हाईकोर्ट में एक मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) और दूसरे न्यायाधीश होते हैं. इनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति करते हैं. हाईकोर्ट में जजों की संख्या तय नहीं होती है. हर राज्य में मामलों की संख्या और जरूरत के हिसाब से जजों की संख्या अलग-अलग हो सकती है.
देश के 6 कॉमन हाईकोर्ट
1. गुवाहाटी हाईकोर्ट 1948 में में बना था. यह देश का सबसे बड़ा कॉमन कोर्ट है. यहां अकेले 4 राज्यों असम, नागालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के केस सुने जाते हैं.
2. बॉम्बे हाईकोर्ट 1862 में बना, यह महाराष्ट्र के साथ-साथ गोवा, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव के कानूनी मामले भी देखता है.
3. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट 1975 में बना और पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ का एक ही जॉइंट हाईकोर्ट है.
4. कलकत्ता हाईकोर्ट सबसे पुराना हाईकोर्ट है, जो 1862 में बना था. यह पश्चिम बंगाल के साथ अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का काम भी संभालता है.
5. मद्रास हाईकोर्ट 1862 में बना था. तमिलनाडु के अलावा पुडुचेरी के लोग भी अपने कानूनी मामलों के लिए इसी कोर्ट में आते हैं.
6. केरल हाईकोर्ट 1958 में बना था. केरल राज्य और लक्षद्वीप दोनों का काम यही इकलौता कोर्ट देखता है.
7. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद साल 2019 से इन दोनों जगहों के लिए भी एक ही साझा कोर्ट काम कर रहा है, जो श्रीनगर और जम्मू में बैठता है.
किन राज्यों का अपना खुद का हाईकोर्ट है और कब बना
उत्तर प्रदेश का इलाहाबाद हाईकोर्ट (1866)
कर्नाटक हाईकोर्ट (1884)
बिहार का पटना हाईकोर्ट (1916)
ओडिशा हाईकोर्ट (1949)
राजस्थान हाईकोर्ट (1949)
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (1956)
गुजरात हाईकोर्ट (1960)
दिल्ली हाईकोर्ट (1966)
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट (1971)
सिक्किम हाईकोर्ट (1975)
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (2000)
उत्तराखंड हाईकोर्ट (2000)
झारखंड हाईकोर्ट (2000)
त्रिपुरा हाईकोर्ट (2013)
मणिपुर हाईकोर्ट (2013)
मेघालय हाईकोर्ट (2013)
तेलंगाना हाईकोर्ट (2019)
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (2019)
हाईकोर्ट से जुड़े 5 फैक्ट्स
1. कलकत्ता हाईकोर्ट देश का सबसे पुराना कोर्ट है. इसकी शुरुआत अंग्रेजों के समय में 1 जुलाई 1862 को हुई थी.
2. इलाहाबाद हाईकोर्ट (यूपी) देश का सबसे बड़ा कोर्ट है. यहां 160 जजों के बैठने की मंजूरी है.
3. सिक्किम हाईकोर्ट देश का सबसे छोटा कोर्ट है, जहां सिर्फ 3 जजों की मंजूरी है.
4. साल 2019 में बने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट और तेलंगाना हाईकोर्ट हमारे देश के सबसे नए 24वें और 25वें कोर्ट हैं.
5. आंध्र प्रदेश अपनी राजधानी अमरावती में भारत की पहली हाईटेक जस्टिस सिटी बना रहा है, जो पूरी तरह दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीकों से लैस होगी.
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