Cuttack : भारत में कई शहर अपने अनोखे नामों से पहचाने जाते हैं, लेकिन कुछ शहर ऐसे भी होते हैं जिनका नाम सुनते ही एक पूरी कहानी सामने आ जाती है. ऐसा ही एक शहर है ओडिशा का कटक, जिसे ‘सिल्वर सिटी' कहा जाता है. ये नाम सिर्फ एक टैग नहीं, बल्कि सदियों की मेहनत, कला और परंपरा का नतीजा है. कटक ने अपनी पहचान चांदी की बारीक कारीगरी यानी फिलिग्री वर्क के जरिए बनाई है. यहां की ‘तारकासी' कला इतनी खास है कि इसे देखने वाला हर कोई इसकी खूबसूरती में खो जाता है. यही वजह है कि ये शहर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी अपनी अलग चमक रखता है.
चांदी की कारीगरी ने बनाई पहचान
कटक में चांदी का काम कोई नया चलन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चला आ रहा एक अनमोल हुनर है. यहां के कारीगर बेहद पतली चांदी की तारों को मोड़कर ऐसे डिजाइन बनाते हैं जो देखने में बेहद नाजुक और खूबसूरत होते हैं. इनसे गहने, सजावटी सामान और शोपीस तैयार किए जाते हैं. हर एक चीज हाथ से बनती है, जिसमें समय, धैर्य और सटीकता की जरूरत होती है. यही मेहनत इस कला को खास बनाती है.
देश-विदेश में है खास पहचान
समय के साथ कटक की ये कला सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रही. आज देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी अच्छी खासी मांग है. यही वजह है कि कटक को ‘सिल्वर सिटी' के नाम से जाना जाने लगा. यहां के बाजार, खासकर नयासड़क जैसे इलाके, चांदी की शानदार कारीगरी के लिए मशहूर हैं और पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं.
इतिहास और लोकेशन भी बनाते हैं खास
कटक सिर्फ अपनी कला के लिए ही नहीं, बल्कि अपने इतिहास और खास लोकेशन के लिए भी जाना जाता है. ये शहर महानदी और काठजोड़ी नदियों के बीच बसा हुआ है, जो इसे एक अलग पहचान देता है. 1000 साल से भी ज्यादा पुराना ये शहर कभी ओडिशा की राजधानी रहा है. यही ऐतिहासिक गहराई इसे और खास बनाती है.
परंपरा और आधुनिकता का शानदार मेल
आज के दौर में कटक तेजी से बदल रहा है और आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है. लेकिन खास बात ये है कि ये शहर अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है. यहां की सिल्वर फिलिग्री इंडस्ट्री आज भी लोगों की पहचान और रोजगार का अहम हिस्सा बनी हुई है. कटक ये साबित करता है कि पुरानी परंपराएं और नई सोच एक साथ आगे बढ़ सकती हैं.
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