- धनबाद के पूर्णाटांड़ और खैरटांड़ गांवों में आज भी पक्की सड़क का अभाव है, जिससे आवागमन अत्यंत कठिन है
- मानसून में रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है, एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, मरीजों को समस्या होती है
- गांवों की लगभग एक हजार आबादी को दूषित जल पीने को मजबूर होना पड़ता है क्योंकि चापाकल खराब और कुएं सूखे हुए हैं
जिसे दुनिया 'भारत की कोयला राजधानी' कहती है, जिसकी कोख से निकला काला सोना पूरे देश के घरों और उद्योगों को रोशन करता है, उसी धनबाद के कुछ हिस्से आज भी आदिम युग की त्रासदी झेल रहे हैं. यह कहानी है पूर्वी टुंडी प्रखंड के रामपुर पंचायत स्थित पूर्णाटांड़ और खैरटांड़ गांवों की, जहां विकास की किरण आज भी बदहाली के अंधेरे को चीरने में नाकाम रही है. आजादी के 77 साल बीत जाने के बाद भी इन गांवों के नसीब में एक पक्की सड़क तक नहीं है. मुख्य लिंक रोड से इन गांवों की दूरी महज ढाई किलोमीटर है, लेकिन यह सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं. मानसून आते ही कच्चा रास्ता कीचड़ के दलदल में तब्दील हो जाता है.
खाट बना एम्बुलेंस
जब कोई बीमार होता है या किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होती है, तो एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. मजबूर ग्रामीण मरीज को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाते हैं. कई बार अस्पताल पहुंचने से पहले ही सांसें साथ छोड़ देती हैं. एक ग्रामीण विशाल कर्मकार ने बताया, "सड़क कभी बनी ही नहीं. बारिश में बाइक चलाना तो दूर, पैदल चलना भी दूभर है. हम आज भी गुलामी जैसा जीवन जी रहे हैं."
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बूंद-बूंद पानी को तरसते एक हजार लोग
पानी, जो जीवन का आधार है, इन गांवों के लिए एक विलासिता बन गया है. चापाकल खराब हैं और कुएं सूख चुके हैं. प्यास बुझाने के लिए ग्रामीण जंगल में गड्ढा खोदकर 'डांड़ी' (छोटा गड्ढा) बनाने को मजबूर हैं. करीब एक हजार की आबादी, जिसमें मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग शामिल हैं, इसी दूषित पानी को पीने को विवश है, जिससे बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है.
शिक्षा पर भी 'कीचड़' की मार
गांव के बच्चों का भविष्य भी इन बदहाल रास्तों की भेंट चढ़ रहा है. स्कूली छात्रों का कहना है कि बारिश के दिनों में सड़क इतनी खतरनाक हो जाती है कि उन्हें हफ्तों तक स्कूल जाना बंद करना पड़ता है. जब रास्ता ही बंद हो, तो शिक्षा की डगर कैसे आसान होगी?
प्रशासन का आश्वासन: क्या इस बार बदलेगी तस्वीर?
इस मामले पर जिला उपायुक्त आदित्य रंजन ने सकारात्मक रुख दिखाया है. उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा, "सड़क के लिए फंड जारी हो चुका है. अगले 6 महीनों के भीतर गांव को मुख्य सड़क से जोड़ दिया जाएगा और पानी की समस्या का भी स्थायी समाधान होगा."
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