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झारखंड: चंद पलों में खत्म हो गईं तीन जिंदगियां, मां और 2 मासूम बेटियों की तालाब में डूबने से मौत

तालाब में कपड़ा धोने के दौरान एक बच्ची फिसलकर गहरे पानी में चली गई. उसे बचाने के प्रयास में मां और दूसरी बेटी भी तालाब में उतर गईं, लेकिन गहराई और फिसलन के कारण तीनों डूब गईं.

झारखंड: चंद पलों में खत्म हो गईं तीन जिंदगियां, मां और 2 मासूम बेटियों की तालाब में डूबने से मौत
मां और 2 मासूम बेटियों की तालाब में डूबने से मौत

झारखंड के चतरा जिले से रविवार को दर्दनाक हादसा सामने आया है. तालाब में डूबने से मां और उसकी दो मासूम बेटियों की मौत हो गई है. बेटियों की उम्र 8 साल और 6 साल की बताई जा रही है. घटना के बाद से घर कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. तीनों के शव को ग्रामीणों ने बाहर निकाला. सूचना देने के बावजूद जब पुलिस मौके पर नहीं पहुंची तो ग्रामीण आक्रोशित हो गए. जानकारी के अनुसार, शव अभी भी घटनास्थल पर ही पड़ा है.  

पैर फिसलने से पानी में गई एक बच्ची

जानकारी के मुताबिक, चतरा जिले के सदर प्रखंड के भोज्या गांव स्थित बड़का आहर में मां और उसकी बेटियों की तालाब में डूबने से मौत हुई है. बताया जा रहा है कि खीरू यादव की पत्नी परवा देवी अपनी बेटियों गीता कुमारी (8) और मालती कुमारी (6) के साथ कपड़ा धोने तालाब गई थीं. इसी दौरान एक बच्ची फिसलकर गहरे पानी में चली गई.

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मासूम को डूबता देख मां ने बिना एक पल गंवाए उसे बचाने के लिए छलांग लगा दी. वहीं दूसरी बेटी भी घबराहट में पानी की ओर बढ़ गई, लेकिन तालाब की अधिक गहराई और फिसलन भरे तल ने तीनों को अपनी चपेट में ले लिया और वे बाहर नहीं निकल सकीं. घटना की जानकारी मिलते ही आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल बचाव कार्य शुरू किया. काफी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीण

इस दर्दनाक घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर आंख नम है. ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के बावजूद पुलिस और प्रशासन समय पर मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे लोगों में आक्रोश है. हालांकि बताया जा रहा है कि जिला मुख्यालय में जेपीएससी परीक्षा होने के कारण अधिकारियों को पहुंचने में देरी हुई. घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे जिला परिषद सदस्य चंद्रदेव गोप ने दुखद घटना  बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पीड़ित परिवार को आपदा प्रबंधन के तहत उचित मुआवजा और सहायता दी जाए. उन्होंने कहा कि मृतक परिवार बेहद गरीब और किसान वर्ग से जुड़ा था, जिसकी आजीविका केवल खेती पर निर्भर थी.

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