- नोएडा में संसाधनों की कमी और विभागीय लापरवाही के कारण युवराज की मौत हुई, जिससे सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल उठे
- पुलिस, फायर विभाग और प्रशासन ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालने के कारण समय पर रेस्क्यू में देरी हुई
- शीर्ष अधिकारियों की घटना स्थल पर अनुपस्थिति और पीड़ित परिवार से न मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं
नोएडा में युवराज की मौत ने पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. हाईटेक शहर कहे जाने वाले नोएडा में संसाधनों की कमी, विभागीय लापरवाही और समय पर रेस्क्यू न होने की वजह से एक युवक की जान चली गई. लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घटना के बाद भी जिम्मेदार विभाग और अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते दिखे. पुलिस, फायर, प्रशासन, अथॉरिटी. हर विभाग का अपना बचाव है, मगर सवाल एक ही है. आखिर युवराज की मौत का जिम्मेदार कौन?
लोगों का गुस्सा इस बात पर भी है कि मौके पर न तो समय पर सहायता पहुंची और न ही शीर्ष अधिकारी घटना के बाद परिवार से मिलने आए. अब जब शासन ने कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की है, तब भी ये प्रश्न जस का तस है कि क्या सिर्फ कार्रवाई से सिस्टम की खामियां खत्म हो जाएंगी? या फिर यह मामला भी कागज़ों में दबकर रह जाएगा?

घटना के दौरान पुलिस ने फायर विभाग को सूचना देकर रेस्क्यू कराने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की भारी कमी के कारण समय पर सहायता नहीं पहुंच सकी. नोएडा जैसे विकसित शहर में संसाधन का अभाव एक बड़ा सवाल है. इसी देरी ने युवराज की जान बचाने की कोशिश को कमजोर कर दिया.

जिला प्रशासन की ओर से रेस्क्यू में क्या योगदान रहा, इस पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. घटना के बाद भी शीर्ष अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे और न ही पीड़ित परिवार से मुलाकात की. प्रशासनिक संवेदनशीलता की इस कमी ने जनता के गुस्से और अविश्वास को और बढ़ा दिया है.

घटना की पहली सूचना पुलिस को मिली थी, लेकिन स्थानीय चौकी और थाने की तत्परता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. समय पर प्रतिक्रिया और समन्वय की कमी ने हालात बिगाड़ दिए. अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि पुलिस ने शुरुआती मिनटों में आखिर क्या कदम उठाए थे.

पुलिस पर भी सवाल इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि प्राथमिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई नहीं दिखी. स्थानीय स्तर पर विभागीय समन्वय कमजोर नजर आया. घटना की गंभीरता के बावजूद तंत्र की सुस्ती और प्रतिक्रिया में देरी ने कमियों को उजागर कर दिया है. नोएडा अथॉरिटी के निरीक्षण और समीक्षा प्रणाली पर भी प्रश्न हैं. जिम्मेदार अधिकारी नियमित निरीक्षण करने के बावजूद सेक्टर 150 की कमियों को क्यों नहीं देख पाए? समीक्षा बैठकों में भी यह मुद्दा नहीं उठा. शासन ने जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिकारी को सभी पदों से मुक्त कर दिया है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि घटनास्थल के आसपास सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं थी, जिससे खतरा बढ़ गया. सड़क की उचित लाइटिंग सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की प्रमुख जिम्मेदारी है. अंधकार की वजह से दुर्घटनाओं की संभावना पहले से अधिक रहती है, जो इस मामले में स्पष्ट रूप से दिखी.

सड़क के अंत में न बाउंड्री वॉल थी और न ही रिफ्लेक्टर लगे थे, जबकि ऐसे स्थानों पर सुरक्षा उपाय जरूरी होते हैं. विभागीय लापरवाही का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि कार्रवाई केवल एक जूनियर इंजीनियर तक सीमित रही. इससे सिस्टम पर और भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
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