- संसद के मॉनसून सत्र खत्म हुए 83 दिन हो चुके हैं लेकिन अभी तक इसका सत्रावसान नहीं किया गया है
- सरकार विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है जिसमें एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है
- कांग्रेस ने विशेष सत्र बुलाने की मांग की है लेकिन सरकार द्वारा परिसीमन बिल पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है
संसद के मॉनसून सत्र को खत्म हुए 83 दिन हो चुके हैं मगर अभी तक इस सत्र का सत्रावसान नहीं किया गया है. इसलिए इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि क्या सरकार अभी भी संसद का विशेष सत्र बुला सकती है, जिसमें परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को पारित किया जा सके. इन बिलों को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी क्योंकि ये संविधान संशोधन बिल है. संसद का विशेष सत्र परिसीमन और महिला आरक्षण पर होगा या नहीं, लेकिन रामलीला की इंडिया गठबंधन की रैली के बाद अब एक और विशेष सत्र की चर्चा सुर्खियों में है.
केंद्रीय गृह मंत्री ने रामलीला मैदान की रैली के बाद कहा कि सरकार एक विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार है जिसमें एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा सके. गृह मंत्री ने राहुल गांधी को इस बारे में चुनौती दी है कि वो सड़कों पर हंगामा खड़ा करने के बजाए संसद में बहस करें. इसके जवाब में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश का कहना है कि गृह मंत्री अभी भी विशेष सत्र बुलाने की संभावना तलाश रहे हैं. जबकि परिसीमन बिल के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं. उनकी मंशा ये दिखाती है कि 2029 में बीजेपी को केवल यही बिल बचा सकती है. सरकार इस पर सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुला रही है, जिसकी मांग कांग्रेस अध्यक्ष कई बार कर चुके हैं.
जयराम रमेश ने आगे कहा है कि जहां तक वोट चोरी पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की बात है तो जब समूचे विपक्ष ने मानसून सत्र में इसकी मांग की थी तब गृहमंत्री ने यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि यह चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है,सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है.
सरकार और विपक्ष के बीच विशेष सत्र को लेकर आरोप प्रत्यारोप तो होते रहेंगे मगर सबसे बड़ा सवाल ये है कि विशेष सत्र बुलाया जा रहा है कि नहीं अगर बुलाया जा रहा है तो कब?. यदि सरकार को परिसीमन बिल पास कराना है तो अब उसके लिए वक्त बीतता जा रहा है क्योंकि अब दिवाली और छठ की छुट्टियां शुरू हो जाएगी और फिर शीतकालीन सत्र का समय हो जाएगा. अमूमन संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के आखिरी हफ्ते में शुरू होता है जो दिसंबर के आखिरी हफ्ते तक या उससे पहले खत्म हो जाता है. यदि विशेष सत्र नहीं बुलाया जाता है तो परिसीमन बिल को शीतकालीन सत्र में पास कराना सरकार के लिए जरूरी हो जाएगा.
अब सवाल उठता है कि सरकार ने विशेष सत्र इसलिए नहीं बुलाया क्योंकि उसके पास दो तिहाई बहुमत नहीं है और यदि मॉनसून सत्र के 83 दिनों बाद तक भी यदि सरकार के बहुमत नहीं जुटा पाई है तो अगले 50 दिनों या शीतकालीन सत्र के अंत तक बहुमत जुटा लेंगे इसकी क्या गारंटी है. अगर शीतकालीन सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पास नहीं होता है तो इतना वक्त ही नहीं बचेगा कि 2029 में नए परिसीमन के साथ चुनाव हो सके. इस बिल के पास होने के बाद देश में लोकसभा क्षेत्रों की संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाएगी, जिसमें से 272 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. परिसीमन 2011 का जनगणना के आधार पर होना है. यानी मौजूदा परिस्थिति में परिसीमन बिल का भविष्य फिलहाल अधर में ही लटका दिख रहा है खासकर तब तक सरकार बहुमत ना जुटा सके.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं