विज्ञापन

रूसी दूतावास पर पूर्व CM बीजू पटनायक समेत 3 भारतीय सैनिकों का नाम क्यों लिखा है? जानिए इसके पीछे की कहानी

रूसी दूतावास की दीवार पर चार भारतीय सैनिकों के नाम लिखे होने को देखकर लोगों के मन में जिज्ञासा पैदा होती है. इन सैनिकों को सोवियत संघ ने द्वितीय विश्व युद्ध में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया था. यही कारण है कि यह सवाल उठते हैं कि उन्होंने सोवियत पक्ष में कैसे और क्यों युद्ध किया, और उन्हें हीरो का दर्जा क्यों दिया गया.

रूसी दूतावास पर पूर्व CM बीजू पटनायक समेत 3 भारतीय सैनिकों का नाम क्यों लिखा है? जानिए इसके पीछे की कहानी
रूसी दूतावास
  • रूसी दूतावास की दीवार पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत संघ के लिए लड़ने वाले सैनिकों के नाम लिखे हैं.
  • सूबेदार बिर्ता सिंह, सूबेदार नारायण, हवलदार गजेंद्र सिंह, बीजू पटनायक को सोवियत सरकार ने सम्मानित किया था.
  • ये सैनिक ब्रिटेन की ओर से सोवियत संघ को मदद और रसद पहुंचाने का काम करते थे.
नई दिल्ली:

रूसी दूतावास के बाहर चार भारतीय सैनिकों के नाम लिखे होने को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठते हैं. फिरोजशाह रोड से गुजरते समय दूतावास की दीवार पर इन सैनिकों के नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित दिखाई देते हैं. दरअसल, इन भारतीय सैनिकों को सोवियत सरकार ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनके योगदान के लिए 'हीरो' का दर्जा दिया था. सवाल यह उठता है कि ये सैनिक सोवियत संघ की ओर से क्यों लड़े और उन्हें यह सम्मान क्यों मिला. यही कारण है कि इस तरह के दृश्य को देखकर लोगों के मन में कई जिज्ञासाएं पैदा होना स्वाभाविक है.

4 भारतीय सैनिक कौन और बीजू पटनायक का नाम क्यों?

इन चार भारतीय सैनिकों के नाम- सूबेदार बिर्ता सिंह गुरंग, सूबेदार नारायण राव निकम, हवलदार गजेंद्र सिंह और पायलट बिजियोनंदा पटनायक उर्फ बीजू पटनायक हैं. दूसरे विश्व युद्ध में जब नाजी जर्मनी ने सोवियत संघ पर हमला किया तब इन चारों सैनिकों ने बहुत बहादुरी से अपना काम किया और सोवियत संघ को संकट से उबरने में मदद की. इतिहासकार अशोक पांडेय बताते हैं कि द्वितीय विश्वयुद्ध में ब्रिटेन और सोवियत संघ दोनों मित्र सेनाओं में थे तो ब्रिट्रेन की ओर से इन सैनिकों ने सोवियत संघ को राहत या मदद पहुंचाई थी. इसलिए इन सैनिकों को आर्डर आफ रेड स्टार, आर्डर आफ पेट्रॉयॉटिक वार से सम्मानित किया गया.

रूसी दूतावास पर लिखें हैं भारतीय सैनिकों के नाम

रूसी दूतावास पर लिखें हैं भारतीय सैनिकों के नाम

बिर्ता सिंह असाधारण बहादुरी से नाजी सेना के खिलाफ लड़े

दरअसल, बिर्ता सिंह गुरंग गोरखा सैनिक थे और दूसरे विश्वयुद्ध में सोवियत मोर्चे पर नाजी जर्मनी के खिलाफ इन्होंने युद्ध लड़ा था. इनकी असाधारण बहादुरी को देखते हुए इनको सोवियत संघ ने आर्डर आफ द पैट्रियंटिक वार फस्ट क्लास दिया गया.

पेशावर से सोवियत सेना के लिए रसद पहुंचाई

इसी तरह सूबेदार नारायण राव निकम को सोवियत संघ ने आर्डर आफ द रेड क्रास दिया. निकम बेगलुरु में रायल इंडियन आर्मी सप्लाई कोर में काम करते थे. जर्मनी ने जब सोवियत संघ पर हमला किया तब सूबेदार नारायण राव निक्कम और गजेंद्र सिंह पर रसद पहुंचाने का जिम्मा सौंपा गया. उस वक्त भारत का अंतिम बेस पेशावर, आज के पाकिस्तान में होता था. तब इन दोनों पर सोवियत संघ के कॉकश मोर्चे पर रसद पहुंचाने का जिम्मा इनको सौंपा गया. ये ट्रेक से पेशावर से निकलकर बलूचिस्तान से होते हुए ईरान के रेगिस्तानों को पार करते हुए कंपा देने वाले ठंड वाले इलाके ताबरेज पहुंचते हैं, जहां सोवियत संघ के सैनिक इनसे रसद लेते हैं. उस वक्त मौसम ही नहीं, नाजियों के समर्थक और लुटेरों का खतरा रहता था. इसीलिए नारायण राव के साथ पिथौरागढ़ के रहने वाले हवलदार गजेंद्र सिंह को भी आर्डर आफ रेड स्टार से नवाजा गया.

रूसी दूतावास

रूसी दूतावास

बीजू पटनायक.... पायलट से उड़ीसा के मुख्यमंत्री तक

जबकि पायलट बिजोयानंद पटनायक को द्वितीय विश्वयुद्ध के 50 साल पूरा होने पर मेडल दिया गया. बिजोयानंद पटनायक को प्यार से बीजू पटनायक भी कहा जाता है, जो उड़ीसा के मुख्यमंत्री रहे हैं. बीजू पटनायक द्वितीय विश्वयुद्ध की सबसे भीषण लड़ाई बैटल आफ स्टालिनग्राद के लिए जाने जाते हैं. सोवियत संघ को झुकाने के लिए नाजी सेना ने सोवियत सेना की 872 दिन तक घेराबंदी की थी. इसमें हिटलर की साजिश थी कि सोवियत संघ के सैनिकों को भूख से मारा जाए. लेनिनग्राद शहर को खत्म करने की इस लड़ाई में बीजू पटनायक एक वीर पायलट की तरह उड़ान भरी. बीजू पटनायक आजादी से पहले रॉयल इंडियन एयरफोर्स के पायलट थे. जब द्वितीय विश्वयुद्ध के वक्त सोवियत सेना नाजी सेना से घिरी थी. सोवियत संघ के सैनिकों और लेनिनग्राद के निवासियों को मदद पहुंचाने के पायलट बीजू पटनायक ने 27 हवाई मिश्न पूरा किया. बाद में बीजू पटनायक को 1995 में रुस ने आर्डर आफ लेनिन मेडल दिया.

यो भी पढे़ं : कर्नाटक के सीएम तो बन गए DK, लेकिन बीजेपी-जेडीएस के साथ ही अपनों से भी चुनौतियां

लेखक के बारे में
img
रवीश रंजन शुक्ला
Associate Editor
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Russian Embassy Delhi Soldiers Story Hindi, Indian Soldiers Russian Embassy Delhi, Why Indian Names On Russian Embassy Wall
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com