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भारतीय सेना के टैंक पर ये जंजीरें क्यों लगी हैं? समझिए इसके पीछे का विज्ञान

गणतंत्र दिवस के मौक पर कर्तव्य पथ पर परेड हो रही है. इस परेड में भारतीय सेना के टैंक भी दिख रहे हैं. इन टैंकों में इस बार जंजीरें भी लगी हैं. ये जंजीरें क्या होती हैं? किस काम आती हैं? समझते हैं.

भारतीय सेना के टैंक पर ये जंजीरें क्यों लगी हैं? समझिए इसके पीछे का विज्ञान
  • कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में भारतीय सेना के टैंक जंजीरों से लैस दिखाए गए हैं जो रक्षा कवच का काम करती हैं
  • टैंकों पर लगी जंजीरें रॉकेट, एंटी-टैंक मिसाइल और ड्रोन के हमलों से टैंकों को बचाने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं
  • ये जंजीरें बम या रॉकेट को टैंक तक पहुंचने से पहले डेटोनेट कर देती हैं जिससे टैंक और जवान सुरक्षित रहते हैं
नई दिल्ली:

देश आज 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. कर्तव्य पथ पर परेड का आयोजन किया जा रहा है. इस परेड में दुनिया भारत की ताकत देख रही है. इस परेड में भारतीय सेना के टैंक भी हैं. कर्तव्य पथ पर जब टैंक निकल रहा है तो उसके ऊपर जंजीरें या चेन लटकी हुई है. इससे सवाल खड़ा होता है कि टैंक में इन जंजीरों का काम क्या है? ये किसलिए लगाई गई हैं? दरअसल, ये जंजीरें टैंकों में कुछ खास कारणों से लगाई जाती हैं. ये जंजीरें एक तरह से टैंक का रक्षा कवच होती हैं, जो उन्हें किसी हमले से बचाता है.

ये जंजीर एक आसान और सस्ता तरीका है. इनका काम रॉकेट या एंटी-टैंक मिसाइलों और ड्रोन से टैंक को बचाना होता है. दुनियाभर की सेनाएं इनका इस्तेमाल करती हैं.

दरअसल, दुश्मन से दो बड़े खतरे होते हैं. पहला- आरपीजी यानी रॉकेट लॉन्चर. और दूसरा- ड्रोन. जब कोई आरपीजी या ड्रोन आता है तो वो पहले इन जंजीरों से टकराता है. जंजीरें इतनी भारी होती हैं कि वो बम या रॉकेट को पहले डेटोनेट कर देती हैं या उसका असर कम कर देती हैं. इससे टैंक को कम नुकसान होता है और अंदर के जवान सुरक्षित होते हैं.

रूस-यूक्रेन की लड़ाई में इन जंजीरों का खूब इस्तेमाल हुआ, क्योंकि यूक्रेनी सेना ने रूसी टैंकों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया. रूस की सेना को कई टैंक गंवाने पड़े. यूक्रेनी सेना ने ड्रोन से बम फेंके और टैंकों को उड़ा दिया. इसके बाद रूसी सेना ने भी अपने टैंकों में ऐसी जंजीरें लगानी शुरू कर दी हैं. इजरायल की सेना भी टैंकों में ऐसी जंजीरें लगाती हैं.

भारतीय सेना भी अब टैंकों में जंजीरें लगाती हैं, क्योंकि समय के साथ युद्ध लड़ने के तरीके बदलते हैं. गणतंत्र दिवस पर जो परेड हो रही है, उसमें T-90 भीष्म टैंक और मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) अर्जुन को शामिल किया गया है. 

लेखक के बारे में
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प्रियंक द्विवेदी
चीफ सब एडिटर
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