- दिल्ली में मणिपुर के 55 साल के म्यूजिक टीचर चोंगथम विक्रम सिंह की पीट-पीटकर हत्या
- घटना रविवार रात किलोकरी गांव में हुई, जहां विक्रम सिंह हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराने गए थे
- दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों और कुछ नाबालिगों को गिरफ्तार कर हिरासत में लिया है
राजधानी दिल्ली में मणिपुर के 55 साल के म्यूजिक टीचर चोंगथम विक्रम सिंह की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. मामला बीते रविवार का है.विक्रम सिंह के घर के नीचे कुछ लोग हंगामा कर रहे थे, जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने हमला कर दिया. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया है. वहीं कुछ नाबालिगों को भी हिरासत में लिया गया है.
कौन थे चोंगथम विक्रम सिंह?
चोंगथम विक्रम सिंह रिटायर्ड म्यूजिक टीचर थे. वे बेहतरीन गिटारिस्ट थे. कई दशकों से वे म्यूजिक सिखा रहे थे. दिल्ली आने से पहले, उन्होंने मणिपुर में कई बैंड के लिए लीड गिटार बजाया था. वे इंफाल के थांगमेइबंद लौरुंग पुरेल लीकाई में रहते थे. इसके बाद वो दिल्ली आ गए और म्यूजिक स्कूल शुरू किया. वो घर पर भी बच्चों को म्यूजिक सिखाते थे. इसके अलावा उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ म्यूजिक में भी पढ़ाया. उन्होंने कई कल्चरल शो और कॉन्सर्ट भी किए. वे कई मशहूर म्यूजिशियन के साथ भी काम कर चुके हैं.
विक्रम सिंह को म्यूजिक विरासत में मिला. उनकी मां चोंगथम ओंगबी कमला देवी भी मशहूर क्लासिकल और मॉडर्न मणिपुरी सिंगर हैं. विक्रम भारत की पहली BAFTA अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म 'बूंग' (Boong) की डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया देवी के कजिन भी थे.
रविवार रात क्या हुआ था?
विक्रम सिंह दिल्ली के किलोकरी गांव में रहते थे. NDTV से बातचीत में विक्रम सिंह के बेटे याइफाबा ने बताया कि ये घटना रात करीब 12 बजे की है. उन्होंने बताया, 'पापा बाहर गए थे. थोड़ी देर बाद सीढ़ियों पर कुछ हलचल महसूस हुई तो हमें लगा कि कुछ हुआ है. हमने दूसरे कमरे में देखा, लेकिन पापा वहां नहीं थे.' उन्होंने आगे कहा, "फिर मम्मी ने कहा कि पापा कहां हैं, उन्हें फोन करो. तभी सीढ़ियों से आवाज आई, 'दरवाजा खोलो.' जब हमने दरवाजा खोला तो देखा कि करीब आठ लोग पापा के साथ मारपीट कर रहे थे. हमने शोर मचाया तो वे लोग वहां से भाग गए."
याइफाबा ने बताया कि नीचे कुछ लोगों के बीच शोर-शराबा हो रहा था और उनके पिता उसे शांत कराने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन वहां उनके साथ मारपीट शुरू हो गई. पूरी घटना सीढ़ियों के पास हुई. याइफाबा का आरोप है कि हमलावर स्थानीय लोग हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने उन्हें पहले कभी नहीं देखा था.
याइफाबा ने आरोप लगाया कि यह घटना नस्लीय भेदभाव (रेसिज्म) का नतीजा है. उन्होंने कहा, "अगर हमारा चेहरा ऐसा नहीं होता तो शायद ऐसी घटना नहीं होती। यह सब रेसिज्म की वजह से हुआ है. पापा कभी लड़ाई नहीं करते थे." याइफाबा ने बताया कि उनके पिता बेहद शांत स्वभाव के थे. उन्होंने कहा कि वे काफी एनर्जेटिक और खुशमिजाज इंसान थे, लेकिन कभी किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते थे.
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