- ढाका में भारतीय उच्चायोग की सेकंड सेक्रेटरी पूजा झा ने J&K को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाए जाने पर आपत्ति जताई
- उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और नक्शा तथ्यात्मक रूप से गलत है
- पूजा कुमारी झा 2022 बैच की इंडियन फॉरेन सर्विस अधिकारी हैं और दिल्ली के एक सामान्य परिवार से हैं
ढाका में भारतीय उच्चायोग की सेकंड सेक्रेटरी पूजा कुमारी झा ने विदेश नीति पर आयोजित एक सेमिनार में तब आपत्ति जताई, जब वहां दिखाए गए एक नक्शे में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया. इस पर पूजा झा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर "भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा" है और नक्शे में दिखाई गई जानकारी को "तथ्यात्मक रूप से गलत" बताया. भारत की आपत्ति के बाद, बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक तारिक ए. करीम ने स्पष्ट किया कि नक्शे का इस्तेमाल केवल "प्रतीकात्मक उद्देश्यों" के लिए किया गया था और यह "वास्तविक सीमाओं को नहीं दर्शाता है."
देखिए किस तरह डिप्लोमेट को टोका
India's Second Secretary at the Indian High Commission in Dhaka, Puja Jha, raised an immediate objection after a map shown during a foreign policy seminar in Bangladesh depicted Jammu & Kashmir as part of Pakistan.
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) July 10, 2026
She stated that Jammu & Kashmir is an integral and inalienable… pic.twitter.com/a4b2IV8ZhA
पूजा कुमारी झा कौन
पूजा कुमारी झा 2022 बैच की इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) अधिकारी हैं. वह अभी बांग्लादेश के ढाका में भारत के हाई कमीशन में सेकंड सेक्रेटरी (पॉलिटिकल और इन्फॉर्मेशन) के तौर पर काम कर रही हैं. 2021 की UPSC सिविल सर्विस परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 82 हासिल करने के बाद उन्हें काफी पहचान मिली. दिल्ली के एक साधारण परिवार से आने वाली पूजा की एक सिविल सर्वेंट बनने की कहानी भी प्रेरणादायक है.
पिता कहते थे-'बड़े सपने मत देखो'
दिल्ली की रहने वाली पूजा ने जब यूपीएससी पास की तो द बेटर इंडिया को दिए साझात्कार में कहा, "मैं जिस जगह से आती हूं, वहां इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास करने का सपना देखना भी बहुत बड़ी बात मानी जाती है." बड़े सपने देखने पर पूजा के पिता हमेशा उनसे कहते थे, "तुम बॉलीवुड एक्टर, एस्ट्रोनॉमर और IAS ऑफिसर के अलावा कुछ भी बन सकती हो." पूजा ने अपने परिवार में बताया, "मैं पांचवीं बेटी हूँ और मेरा एक छोटा भाई भी है. मेरे परिवार की बेटे की चाहत उसके जन्म के साथ ही पूरी हो गई. मेरे पिता पिछले लगभग 40 सालों से गुड़गांव की एक प्राइवेट कंपनी में ऑफिस हेल्पर के तौर पर काम कर रहे हैं और मेरी मां हाउसवाइफ रही हैं." उनका बचपन काफी मुश्किलों भरा रहा. इनमें से कई मुश्किलें उनकी आर्थिक स्थिति के कारण थीं, तो कुछ सामाजिक दबावों की वजह से.
लड़का-लड़की का परिवार में भेद
पूजा ने तब बताया था, "मैं जिस समुदाय से आती हूं, वहां बेटे के जन्म को बहुत ज्यादा अहमियत दी जाती है. यह सोच इतनी गहरी है कि इससे लड़ने और लोगों की सोच बदलने में मुझे कई साल लग गए." पूजा बताती हैं कि असमानता से भरे माहौल में बड़ी होने और उसी जगह को अपना घर मानने के बीच का विरोधाभास उन्हें हमेशा अजीब लगता था. घर पर अपनी पहचान बनाने के लिए, इस परीक्षा को पास करना और अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी हो गया था." हालांकि उनके माता-पिता ने सभी बच्चों को एक जैसा प्यार देने की कोशिश की, लेकिन वह कहती हैं कि जिस समुदाय में वह पली-बढ़ीं, वहां हमेशा लड़कों को खास अहमियत दी जाती थी. उदाहरण के लिए, मेरे समुदाय में बेटे के जन्म का जश्न बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन लड़की के जन्म पर ऐसा नहीं होता. ये छोटी-छोटी बातें हैं, लेकिन इनका असर बहुत गहरा होता है." इस वजह से बहनों के बीच बहुत मजबूत रिश्ता बन गया.
प्यार पाने के लिए की पढ़ाई
पूजा ने आगे बताया, "हम बहने आपस में जुड़ती थीं और इस असमानता पर लंबी बातचीत करती थीं. इन्हीं बातचीत के दौरान मुझे बदलाव लाने की जरूरत महसूस हुई." पूजा के लिए पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करना फायदेमंद साबित हुआ. वह कहती हैं कि जब भी वह अच्छा स्कोर करती थीं, तो उनके माता-पिता की खुशी उन्हें और बेहतर करने और उस बेहतरीन स्तर को बनाए रखने के लिए प्रेरित करती थी. उन्होंने बताया, "वे दिन ऐसे होते थे जब मुझे अपने भाई से ज्यादा प्यार मिलता था. मैं उन पलों का इंतजार करती थी." छह बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और देखभाल की जिम्मेदारी के कारण, कई बार पूजा के भाई की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाती थी. वह याद करते हुए कहती हैं, "परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर हम सभी प्राइवेट स्कूलों से सरकारी स्कूलों में चले गए और कुछ साल दिल्ली नगर निगम (MCD) के स्कूलों में भी पढ़े. फिर भी हम सभी से पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन की बहुत ज्यादा उम्मीद की जाती थी." जाहिर है पूजा ने फाइटर बनकर अपने परिवार और समाज की सोच को बदला और अब देश की बेटी बनकर दुनिया में मान बढ़ा रही हैं.
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