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Bengal Results: बीजेपी की ऐतिहासिक विजय के पीछे अमित शाह के वो 10 दांव, जिससे पहली बार लहराया बंगाल में भगवा

Bengal Results 2026: 15 साल बाद टीएमसी को सत्ता से उखाड़ने के पीछे बीजेपी की टॉप मशीनरी और हर भाजपा कार्यकर्ता के साथ संघ का भी हाथ रहा. इस प्रचंड जीत के पीछे मॉडर्न डे चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का खास योगदान है.

Bengal Results: बीजेपी की ऐतिहासिक विजय के पीछे अमित शाह के वो 10 दांव, जिससे पहली बार लहराया बंगाल में भगवा
west bengal results 2026
  • पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली बंपर जीत में अमित शाह की रणनीति और संघ की सक्रिय भागीदारी प्रमुख रही
  • अमित शाह ने चुनाव के दौरान लगभग पंद्रह दिन बंगाल में रहकर संगठन को मजबूत बहुस्तरीय रणनीति में ढाला
  • भाजपा ने चुनाव प्रबंधन को मुस्तैद रखा, जिससे चुनाव में गड़बड़ी और हिंसा की कोई आशंका नहीं रही
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नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी पहली और बंपर जीत ने राजनीतिक पंडितों को भी सोच में डाल दिया है. यूं तो एग्जिट पोल से बीजेपी की जीत की महक आने लगी थी पर जबतक ये नतीजे में नहीं बदले,तब तक ममता बनर्जी और टीएमसी इसे नकारती रही. 15 साल बाद टीएमसी को सत्ता से उखाड़ने के पीछे बीजेपी की टॉप मशीनरी और हर भाजपा कार्यकर्ता के साथ संघ का भी हाथ रहा. इस प्रचंड जीत के पीछे मॉडर्न डे चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का खास योगदान है. सफलता समय मांगती है और 2016 से 2026 के बीच तीन चुनाव और भाजपा की कुल सीटों में वृ्द्धि और अब जीत ने बता दिया है कि अमित शाह को कमजोर समझने की भूल करना नादानी है. आपको बताते हैं अमित शाह के वो 10 दांव कौन से थे जिसने भाजपा को बंगाल फतह करने में महती भूमिका अदा की है. 

भारतीय जनता पार्टी अब 21-22 राज्यों में है,कहीं तो वह अकेले दम पर सरकार चला रही है तो कई जगह गठबंधन में है. अमित शाह ने 2014 में ही ममता बनर्जी को सत्ता से उखाड़ने की कसम खाई थी और वह 12 साल बाद पूरी भी हो गई. इस बीच कई मौकों पर अमित शाह ने चाहे वह संसद हो या रैली बताया है कि वह बंगाल जीतने को लेकर किस कदर गंभीर हैं. 2021 में भी ममता को हराने के लिए व्यूह रचना की गई थी पर किला ध्वस्त नहीं हो पाया. इस बार शाह और उनके साथ लगी पूरी मशीनरी ने कोई मौका ही नहीं दिया.

किसी न किसी बहाने बंगाल आते-रुकते रहे शाह

पश्चिम बंगाल की इस चुनावी तैयारी के पीछे अमित शाह का बाकी 4 राज्यों(असम,केरल,पुडुचेरी,तमिलनाडु) पर भी फोकस रहा. शाह इन राज्यों की चुनावी तैयारी के बाद भी अमित शाह लगभग 15 दिनों तक किसी न किसी रूप में बंगाल में ही रहे. ध्यान देने वाली बात यह रही कि  वहां उन्होंने केवल भाषण और रोड शो ही नहीं किए, मजबूत संगठन को बहुस्तरीय रणनीति में इस तरह से ढाला कि भाजपा अपनी एक-एक बात मतदाता तक पहुंचाने में सफल हो पाई. चुनाव प्रबंधन भी मुस्तैद रहा जिससे न गड़बड़ी और हिंसा की आशंका ही नहीं रहने दी.

अमित शाह को बंगाल चुनाव के प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का भी भरपूर साथ मिला. भूपेंद्र यादव ने खुद को मीडिया से दूर रखा और चुपचाप अपना काम करते रहे. भूपेंद्र यादव के साथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संगठन प्रभारी मंगल पांडे, चुनाव सह प्रभारी बिप्लब देब व महासचिव सुनील बंसल ने अपनी जिम्मेदारियों के बखूबी निभाया.

 

इन 10 दांव पर डाल लीजिए नजर 

1. अमित शाह 15 दिन पश्चिम बंगाल में रहे
2. पांच अलग अलग जोन में रात्रि प्रवास के लिए रुके, रात 12 बजे तक संगठन की बैठकें की
4. सबसे ज्यादा चुनावी कार्यक्रम- 50 प्लस सभाएं जिनमें 30 जनसभा, 12 रोडशो बैठकें, प्रेस कांफ्रेंस शामिल हैं.पीएम मोदी के बाद सबसे बड़ी सभाएं
5. एसआईआर में फर्जी वोटर एक भी न बचे, ताकि टीएमसी 'छापा वोट' ना डाल पाए, इसपर भी नजर रही
6. भाजपा के 100% वोट 11 बजे तक पड़ गए थे.
7. पहले चरण के दिन खुद भाजपा के कंट्रोल रूम में रहे थे.
8. गुंडे घर से बाहर ना आए वरना गुंडों को उल्टा लटका कर सीधा कर देंगे. 9.45 दिन में बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए
जमीन देंगे.
10. बंगाल में नहीं बनने देंगे बाबरी मस्जिद जैसे बयान ने एक अलग प्रभाव डाला

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