- बंगाल चुनाव 2026 में PM मोदी 9 अप्रैल को तीन स्थानों पर मेगा रैलियां करेंगे जो बीजेपी की आक्रामक रणनीति है
- बीजेपी ने चुनाव में केंद्रीय नेताओं को सक्रिय कर 5 अप्रैल से हाई-वोल्टेज कैंपेन तेज कर दिया है
- BJP ने बॉर्डर इलाकों जैसे बोंगांव और बसिरहाट पर विशेष फोकस किया है
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक पारा चढ़ रहा है. 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेगा कैंपेन बंगाल की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है. प्रधानमंत्री एक ही दिन में आसनसोल, तामलुक और बीरभूम में जनसभाएं करेंगे, जिसे बीजेपी की अब तक की सबसे आक्रामक चुनावी रणनीति माना जा रहा है. बीजेपी का दावा है कि इस बार बंगाल में सत्ता परिवर्तन करके रहेगा, इसके लिए पूरा जोर लगाया जा रहा है. पीएम मोदी भी बंगाल चुनाव के लिए मैदान में उतर गए हैं.
केंद्रीय नेतृत्व की एंट्री से बदली चुनावी लड़ाई
बीजेपी ने इस चुनाव को पूरी ताकत से लड़ने का फैसला कर लिया है और यही वजह है कि एक के बाद एक केंद्रीय नेता बंगाल में डेरा डाल रहे हैं. 5 अप्रैल से शुरू हुआ यह हाई-वोल्टेज कैंपेन लगातार तेज हो रहा है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान ने झाड़ग्राम में जनसभा कर चुनावी माहौल को गर्माया, वहीं 6 अप्रैल को उनका कार्यक्रम एगरा और नंदीग्राम में तय है. वही, नंदीग्राम जहां 2021 में सबसे बड़ा राजनीतिक संघर्ष हुआ था.
बॉर्डर बेल्ट और उत्तर 24 परगना पर फोकस
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी का फोकस इस बार बॉर्डर इलाकों पर साफ दिख रहा है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 6 अप्रैल को बंगाल पहुंचकर बोंगांव में रोड शो और नामांकन कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. इसके अलावा केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ 5 अप्रैल को बसिरहाट में पार्टी मीटिंग और रोड शो करेंगे. बसिरहाट और बोंगांव जैसे इलाके घुसपैठ और सीमा सुरक्षा के मुद्दों को लेकर पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहे हैं, जहां बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है. काकद्वीप में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर की जनसभा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जहां महिला वोटर्स और ग्रामीण इलाकों को साधने की कोशिश हो रही है.
कोलकाता और औद्योगिक बेल्ट में शक्ति प्रदर्शन
7 अप्रैल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बैरकपुर में रोड शो और जनसभा करेंगे. बैरकपुर औद्योगिक और श्रमिक राजनीति का बड़ा केंद्र रहा है, जहां बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है. उसी दिन बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी कोलकाता में नामांकन सभा में शामिल होंगे, जो शहरी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है.
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क्यों अहम है 9 अप्रैल का PM कैंपेन
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां चुनावी नैरेटिव को पूरी तरह बदल सकती हैं.
- आसनसोल: औद्योगिक और हिंदी भाषी वोट बैंक
- तमलुक: ग्रामीण और तटीय बेल्ट
- बीरभूम: राजनीतिक रूप से संवेदनशील और हिंसा प्रभावित क्षेत्र
तीनों जगहों का चयन बीजेपी की माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति को दर्शाता है.
सीधा मुकाबला: टीएमसी Vs बीजेपी
इस पूरे कैंपेन से यह साफ हो गया है कि चुनाव अब पूरी तरह बीजेपी बनाम तृणमूल कांग्रेस की सीधी लड़ाई में बदल चुका है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही इस चुनाव को 'बाहरी बनाम बंगाल' का नैरेटिव देने की कोशिश कर रही हैं, जबकि बीजेपी इसे 'परिवर्तन बनाम तुष्टिकरण' की लड़ाई के तौर पर पेश कर रही है. बंगाल में चुनावी जंग अब अपने चरम पर है, जहां हर दिन नए समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं. केंद्रीय नेताओं की लगातार एंट्री और प्रधानमंत्री की मेगा रैलियां यह संकेत दे रही हैं कि बीजेपी इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह हाई-वोल्टेज कैंपेन जमीनी वोट में बदल पाता है, या फिर बंगाल की क्षेत्रीय राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय लहर को चुनौती देती है.
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