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बंगाल के नोआपाड़ा में अनुभव Vs युवा चेहरा, जनता को किस पर भरोसा?

West Bengal Election: एक तरफ बीजेपी का अनुभवी चेहरा है, तो दूसरी ओर तृणमूल का युवा नेतृत्व.राजनीतिक दावे और आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाताओं को करना है कि वे अनुभव पर भरोसा करते हैं या नए नेतृत्व पर. अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नोआपाड़ा की जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है.

बंगाल के नोआपाड़ा में अनुभव Vs युवा चेहरा, जनता को किस पर भरोसा?
बंगाल के नाओपाड़ा की जनता किसको चुनेगी?
  • नोआपाड़ा विधानसभा सीट पर इस बार BJP और TMC के बीच सीधE मुकाबला होने की संभावना है
  • भाजपा ने वरिष्ठ नेता अर्जुन सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जिनको 40 सालों का राजनीतिक अनुभव है
  • तृणमूल कांग्रेस ने युवा नेता त्रिणांकुर भट्टाचार्य को मैदान में उतारा है, जो विकास मुद्दों पर जोर दे रहे हैं
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कोलकाता:

पश्चिम बंगाल की अहम सीटों में शुमार नोआपाड़ा में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है. औद्योगिक इतिहास, घनी आबादी, प्रवासी प्रभाव और बदलते राजनीतिक समीकरणों की वजह से यह सीट एक बार फिर राज्य की राजनीति का केंद्र बन गई है. इस बार यहां मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर के रूप में उभर रहा है.

अर्जुन सिंह नोआपाड़ा में जीत को लेकर आश्वस्त

बीजेपी ने इस सीट से वरिष्ठ नेता अर्जुन सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जो पहली बार नोआपाड़ा से चुनाव मैदान में उतरे हैं. हालांकि, वह अपने चार दशक के राजनीतिक अनुभव को अपनी सबसे बड़ी ताकत बता रहे हैं.अर्जुन सिंह का कहना है कि क्षेत्र उनके लिए नया नहीं है और उन्होंने लंबे समय तक आसपास के इलाकों में सक्रिय राजनीति की है. उनका दावा है कि इस बार मुकाबला एकतरफा है और इसे “80-20 की लड़ाई” बताया जा सकता है. उनके मुताबिक, 80 प्रतिशत समर्थन बीजेपी के पक्ष में है, जबकि बाकी वोट विपक्षी दलों, तृणमूल, वाम और कांग्रेस में बंटे हुए हैं.

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मतदाता सूची और ‘डुप्लीकेट वोट' पर BJP का आरोप

बीजेपी उम्मीदवार ने दावा किया कि हाल के समय में बड़ी संख्या में ऐसे नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जिन्हें डुप्लीकेट या मृत मतदाता माना गया. उनका कहना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और कथित फर्जी मतदान की संभावना कम होगीहालांकि, इन दावों को विपक्ष ने खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बयानबाजी बताया.

TMC का भरोसा युवा चेहरे पर, ‘घर का लड़का' बनकर अपील

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट से युवा नेता त्रिणांकुर भट्टाचार्य को उम्मीदवार बनाया है. वह खुद को “इलाके का बेटा” बताते हुए जनता से भावनात्मक जुड़ाव पर जोर दे रहे हैं. त्रिणांकुर का कहना है कि उन्हें हर वर्ग, युवा, बुजुर्ग और महिलाओं से समर्थन मिल रहा है. उनके मुताबिक, जनता की प्राथमिकता साफ है-शांति, शिक्षा और स्वास्थ्य, न कि टकराव या गुंडागर्दी. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी राजनीति प्रदर्शन आधारित है और जीत के बाद जिम्मेदारी और बढ़ेगी.

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SIR और वोट कटने का मुद्दा बना राजनीतिक हथियार

इस चुनाव में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भी बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है. तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी से जुड़े कुछ लोग वोटर लिस्ट से नाम कटवाने की राजनीति कर रहे थे, जबकि पार्टी कार्यकर्ताओं ने लोगों के नाम बचाने के लिए घर-घर जाकर मदद की. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची में बदलाव का असर सीधे चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है, खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां वोट अंतर कम होता है.

चुनावी इतिहास: वाम से TMC और अब BJP की चुनौती

नोआपाड़ा सीट का राजनीतिक इतिहास भी बदलते समीकरणों की कहानी कहता है.

  • 2006 में वाम मोर्चा का दबदबा था
  • 2011 और 2016 में तृणमूल कांग्रेस ने मजबूत पकड़ बनाई
  • 2018 उपचुनाव में TMC ने बड़ी जीत दर्ज की
  • 2021 में BJP ने वोट शेयर बढ़ाकर खुद को मुख्य चुनौतीकर्ता के रूप में स्थापित किया
  • अब 2026 के चुनाव में यह सीट पूरी तरह द्विध्रुवीय मुकाबले में बदल चुकी है

सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि भी तय करेगी नतीजे

कोलकाता महानगर क्षेत्र से सटे नोआपाड़ा की पहचान एक घनी आबादी वाले शहरी-उपनगरीय इलाके के रूप में है.

  • जूट उद्योग की ऐतिहासिक विरासत
  • विभाजन के बाद शरणार्थियों की बड़ी बसावट
  • वर्तमान में सेवा क्षेत्र और छोटे व्यवसाय पर आधारित अर्थव्यवस्था

अनुभव या युवा चेहरा, किसे चुनेगा नाओपाड़ा?

यहां मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग की बड़ी आबादी रहती है, जहां रोजगार, बुनियादी सुविधाएं और विकास जैसे मुद्दे चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं. नोआपाड़ा में इस बार मुकाबला दिलचस्प होने के साथ-साथ बेहद अहम भी है. एक तरफ बीजेपी का अनुभवी चेहरा है, तो दूसरी ओर तृणमूल का युवा नेतृत्व.राजनीतिक दावे और आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाताओं को करना है कि वे अनुभव पर भरोसा करते हैं या नए नेतृत्व पर. अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नोआपाड़ा की जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है.

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