- पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में चुनाव होंगे, जिसमें भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ा मुकाबला है
- भाजपा उम्मीदवार स्वपन दासगुप्ता ने रासबिहारी सीट से चुनाव लड़ते हुए टीएमसी सरकार को हटाने का संकल्प जताया है
- स्वपन दासगुप्ता ने टीएमसी की 15 साल की सरकार की आलोचना करते हुए विकास की कमी और झूठे वादों का जिक्र किया
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर उत्साह चरम पर है. प्रदेश की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान कराए जाएंगे. इसको लेकर भाजपा और टीएमसी के बीच चुनावी जंग तेज हो गई है. दोनों पार्टी के उम्मीदवार लगातार अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में लोगों से मिल रहे हैं और समर्थन मांग रहे हैं. इसी दौरान एनडीटीवी के एडिटर इन चीफ राहुल कंवल ने रासबिहारी विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार स्वपन दासगुप्ता ने खास बातचीत की.
दक्षिण कोलकाता की इस सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान सड़कों पर लोगों से मिल रहे स्वपन दासगुप्ता ने 'वॉक द टॉक' शो में राहुल कंवल को बताया कि हमने बंगाल से टीएमसी सरकार को उखाड़ फेंकने और बीजेपी सरकार बनाने का संकल्प लिया है. ये मेरा विधानसभा क्षेत्र भी है, मेरा घर यहीं पास में है. इसीलिए मैं इसे एक बड़े अवसर के तौर पर भी देख रहा हूं.
स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि पहले यहां से कांग्रेस और फिर टीएमसी जीतती रही है, लेकिन वो इसे अपनी 'जमींदारी' के तौर पर समझ रहे थे. इस बार लोगों ने ये समझ लिया है, कि इन लोगों के सिंडिकेट राज की वजह से यहां कोई विकास नहीं हुआ. सिर्फ झूठे वादे किए गए और लोगों से वोट लिए गए.

बंगाल और खासकर साउथ बंगाल और कोलकाता में बीजेपी की चुनौती को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि हम लोगों के बीच जाकर भरोसा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं और धीरे-धीरे इसमें सफल भी हो रहे हैं. टीएमसी की 15 साल की सरकार से अब जनता त्रस्त हो गई है. ऐसे में बीजेपी उसके विकल्प के रूप में मजबूती से खड़ी हो रही है.
उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव में कुछ जगहों पर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच वोट का बड़ा अंतर रहा था, वो इस बार हम लोगों के समर्थन से पाटने की कोशिश कर रहे हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि लोग समझेंगे और ज्यादा से ज्यादा संख्या में बीजेपी के लिए वोट करेंगे.

बीजेपी उम्मीदवार ने कहा कि टीएमसी लोगों से बड़े-बड़े और झूठे वादे कर रही है. मछली को मुद्दा बना रही है. जनता इन बातों को समझ रही है. भारत में खान-पान को लेकर कहीं कोई बंदिश नहीं है. देश भर में अलग-अलग राज्यों में अपने मशहूर खान पान हैं और हर कोई अपनी पसंद की चीजें खाने के लिए स्वतंत्र है, कहीं कोई दिक्कत नहीं है. इसीलिए मुझे नहीं लगता कि बीजेपी की सरकार आने पर यहां ऐसी कोई दिक्कत होने वाली है.
उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि इस बार पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने वाली है. क्योंकि पिछले कई दशक से और खासकर पिछले 15 सालों से बंगाल के विकास में बड़ी गिरावट आई है. यहां लोग बीजेपी का स्वागत कर रहे हैं. वो भी बंगाल में बदलाव चाहते हैं.
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नफील्ड कॉलेज, ऑक्सफोर्ड के विद्वान, स्तंभकार और हिंदुत्व राष्ट्रवाद के विचारक दासगुप्ता मानते हैं कि उनकी शहरी छवि उन्हें रासबिहारी सीट के लिए और अधिक उपयुक्त बनाती है. उन्होंने कहा कि रासबिहारी मेरे लिए घर की सीट जैसी है. यहां कोलकाता के कुछ सबसे संपन्न लोगों के साथ-साथ शहर के सबसे गरीब तबके के लोग भी रहते हैं, जिससे यह इलाका काफी विविधतापूर्ण है.

बीजेपी नेता ने कहा कि कालीघाट का काली मंदिर यहीं स्थित है. लेकिन चुनावी प्रतिष्ठा के लिहाज से इस सीट को महत्वपूर्ण बनाने वाली बात यह है कि यह भवानीपुर से सटी हुई है, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का क्षेत्र है, जहां इस बार उन्हें हमारे नेता शुभेंदु अधिकारी चुनौती दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस बार हम सिर्फ सीटें जीतने के लिए नहीं लड़ रहे हैं. इस बार हम अपनी सरकार बनाने के लिए लड़ रहे हैं.
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व राज्यसभा सदस्य ने 2021 के विधानसभा चुनावों में ग्रामीण तारकेश्वर सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन वह जीत नहीं पाए और अपने निकटतम टीएमसी प्रतिद्वंद्वी से 7,000 से कुछ अधिक वोटों के अंतर से हार गए थे.
बता दें कि दक्षिण कोलकाता की इस रासबिहारी सीट से तृणमूल कांग्रेस ने मौजूदा विधायक देबाशीष कुमार को फिर से उम्मीदवार बनाया है. रासबिहारी निर्वाचन क्षेत्र में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होगा और मतगणना चार मई को होगी.
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