- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वोटर लिस्ट रिवीजन से लगभग 11.6 फीसदी मतदाता कम हो गए हैं
- इस रिवीजन के दौरान कुल 89 लाख वोटर हटाए गए हैं, जो चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं
- पश्चिमी बर्धमान और दक्षिणी दिनाज में SIR में कटे वोटों का प्रतिशत टीएमसी और बीजेपी के वोट अंतर से कहीं अधिक है
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान गुरुवार को होना है. इस चुनाव में SIR का बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा. वोटर लिस्ट के इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान 89 लाख वोटर घटे हैं, जो कुल वोटरों में 11.6 फीसदी हैं. इतनी बड़ी तादाद में मतदाता सूची से वोटरों का हटना बड़ी बात है क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव और उससे पहले के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और टीएमसी के बीच वोटों का गैप लगातार कम होता जा रहा है.
NDTV के सीईओ और एडिटर इन चीफ राहुल कंवल ने इन मिसिंग वोटों की मिस्ट्री को 'नंबर गेम' शो में डिकोड करते हुए बताया कि 2021 के चुनाव में टीएमसी और बीजेपी के बीच वोटों का फासला लगभग 10 पर्सेंट था. 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों के बीच वोटों का ये अंतर घटकर करीब 7 पर्सेंट रह गया. अब चूंकि वोटर लिस्ट से 11.6 पर्सेंट वोटर गायब हो चुके हैं. ऐसे में ये कटे वोटर चुनाव पर बड़ा असर डाल सकते हैं.
एसआईआर से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में कटे वोटों का प्रतिशत और वहां टीएमसी व बीजेपी के वोटों के अंतर की तुलना करते हुए राहुल कंवल ने बताया कि पश्चिम बर्धमान जिले में 16.4 फीसदी नाम कटे हैं, जबकि यहां बीजेपी पर टीएमसी की बढ़त महज 2.7 फीसदी थी. इसी तरह दक्षिण दिनाज में 13.2 पर्सेंट वोट कटे और दोनों दलों के वोटों में अंतर 4.2 पर्सेंट था. अगर कटे हुए वोटों में मान लें कि टीएमसी के ज्यादा वोट थे, तो पिछले चुनावों में हार-जीत का अंतर पूरी तरह खत्म हो जाता है. ऐसे में बंगाल का चुनावी समीकरण इस बार काफी बदलने की संभावना रहेगी.
दावा किया जाता है कि एसआईआर में ज्यादातर वोट टीएमसी के कटे हैं. अगर मान लिया जाए कि ये हटाए गए वोट 100 पर्सेंट टीएमसी के थे, तब चुनावों पर इसका क्या असर होगा, इसका आकलन करते हुए राहुल कंवल ने बताया कि 2021 में बीजेपी 77 सीटें जीती थी. 156 सीटें ऐसी हैं, जहां एसआईआर में वोट कटने के बाद गैप बहुत कम रह गया है. इनमें से 97 सीटें ऐसी थीं, जहां बीजेपी रनरअप थी. अगर इन 77 और 97 सीटों को जोड़ दिया जाए तो बीजेपी के 147 के बहुमत का आंकड़ा पार करने की संभावना बढ़ जाती है.
दूसरी संभावना पर बात करते हुए राहुल कंवल ने कहा कि ऐसा मुमकिन नहीं है कि एसआईआर में जितने वोट कटे हैं, वो सारे के सारे टीएमसी के हों. ऐसे में दूसरे समीकरण में मान लें कि एसआईआर में टीएमसी के 80 फीसदी और बीजेपी के 20 फीसदी वोट कटे हैं. अगर एंटी इनकंबेंसी की वजह से टीएमसी का 1.5 पर्सेंट वोट भी इस बार छिटक जाता है, तो क्या समीकरण बनेगा.
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2021 में बीजेपी ने 77 सीटें जीती थीं. एसआईआर के इस नए समीकरण से प्रभावित सीटों की संख्या 54 और इनमें से 51 पर बीजेपी को रनर अप मानें और यह समझकर चलें कि बीजेपी अपनी पिछली जीती सीटों को रिटेन करते हुए इन 51 सीटों को जीत सकती है तो पार्टी का आंकड़ा बनेगा 128, जो 147 के बहुमत के जादुई आंकड़े से कम रहेगा.
अगर ये मान लिया जाए कि ममता बनर्जी को एंटी इनकंबेंसी में 3 फीसदी वोटों को चोट लग सकती है तो क्या समीकरण बनेगा? इस नंबर गेम का एनालिसिस करते हुए राहुल कंवल ने बताया कि अगर एसआईआर में कटे वोटों में 80 फीसदी टीएमसी के और 20 फीसदी बीजेपी के मानकर चलें तो पिछले चुनाव के मद्देनजर प्रभावित सीटों की संख्या 103 रह जाती है. इनमें से बीजेपी 2021 में 94 सीटों पर रनर अप रही थी. उसने कुल 77 सीटें जीती थी. अगर इन 77 और 94 सीटों को जोड़ लें तो आंकड़ा 171 हो जाता है, जो 147 के बहुमत से बहुत ज्यादा है. हालांकि चुनाव नतीजों की तस्वीर क्या रहेगी, ये 4 मई को नतीजों के दिन ही पता चलेगा.
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