- इतनी गर्मी पड़ रही है कि दोपहर बाद सड़कों पर अघोषित कर्फ्यू का नजारा दिखता है.
- लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल भारत में ही गर्मी का प्रकोप है. यूरोप के कई देशों में भी गर्मी रिकॉर्डतोड़ रही है.
- पूरी दुनिया में पड़ रही इस भीषण गर्मी के कई कारण है. जिसमें अलनीनो के साथ-साथ स्थानीय कारक भी है.
Heatwave Update: दिन में नींद खुलते चिलचिलाती धूप, शाम तक सूरज की तपिश और रात में भी तपती गर्मी से सूकुन गायब. इस समय कुछ ऐसा ही हाल भारत के अधिकांश शहरों में है. इतनी गर्मी पड़ रही है कि दोपहर बाद सड़कों पर अघोषित कर्फ्यू का नजारा दिखता है. इंसान के साथ-साथ पशु-पक्षी, जानवर भी भीषण गर्मी से त्रस्त है. दुनिया के सबसे अधिक तापमान वाले शहरों की लिस्ट में अधिकांश शहर भारत के ही है. यूपी का बांदा लगातार कई दिनों से सबसे गर्म शहर रहा है. लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल भारत में ही प्रचंड गर्मी का प्रकोप है. यूरोप के कई देशों में भी इस बार गर्मी रिकॉर्डतोड़ रही है.
लंदन में गर्मी ने तोड़ा 80 साल का रिकॉर्ड
लंदन में गर्मी ने 80 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. सोमवार ब्रिटेन में मई का अब तक का सबसे गर्म दिन रहा. लंदन के क्यू गार्डन्स में तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसके साथ ही 1922 और 1944 में बने रिकॉर्ड टूट गए. इन दोनों साल तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था.
फ्रांस में 36 डिग्री तक पहुंचा पारा
फ्रांस में भी तापमान के मामले में रिकॉर्ड टूटे, जहां सोमवार को देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और रात में भी कई जगह तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा.
तापमान अत्यधिक होने के कारण कई अप्रत्याशित मौसम संबंधी घटनाएं भी सामने आई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि असामान्य समय और जगहों पर बन रहीं घातक मौसमी परिस्थितियां लोगों के लिए बड़ा खतरा साबित हो रही हैं.
ब्रिटेन में लंबे सप्ताहांत के दौरान लोग समुद्र तटों, स्विमिंग पूल और पार्कों में उमड़ पड़े. मंगलवार को लंदन में यात्री बिना एयर कंडीशनर वाले मेट्रो कोच में गर्मी से परेशान दिखे. स्कॉटलैंड में दमकलकर्मी पूरी रात एडिनबर्ग के प्रसिद्ध पहाड़ी क्षेत्र आर्थर सीट में लगी आग बुझाने में जुटे रहे.

ब्रिटेन में गर्मी से बचाव के लिए अलर्ट जारी
ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने गुरुवार तक देश के अधिकतर हिस्सों के लिए स्वास्थ्य अलर्ट जारी किया है. एजेंसी ने आगाह किया है कि दोपहर के समय पड़ने वाली गर्मी विशेष रूप से बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है. ब्रिटेन में आमतौर पर मौसम सामान्य रहता है, इसलिए वहां कई घरों, स्कूलों और दफ्तरों में एयर कंडिशनर की व्यवस्था नहीं होती.
अधिकारियों के अनुसार, ब्रिटेन में झीलों और जलाशयों में डूबने से कम से कम तीन किशोरों की मौत हो गई, जबकि दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में समुद्र में 60 वर्षीय व्यक्ति की जान चली गई.
फ्रांस सरकार की प्रवक्ता मॉड ब्रेजेओं ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण कम से कम सात लोगों की मौत होने की जानकारी मिली है. उन्होंने कहा कि पांच लोगों की मौत डूबने और दो की खेल प्रतियोगिताओं के दौरान हुई.

स्पेन भी भीषण गर्मी की चपेट में
स्पेन भी भीषण गर्मी की चपेट में है. मौसम विभाग के प्रवक्ता रुबेन डेल कैंपो ने कहा, “मई महीने में ऐसा तापमान दर्ज किया जा रहा है, जैसा सामान्यतः गर्मी के मौसम की मध्यावधि में होता है.” उन्होंने बताया कि सप्ताहांत में सेविल में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि स्पेन के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 5 से 10 डिग्री अधिक रहा. वहीं, रोम में मंगलवार को तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है.
देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी का दौर जारी
देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी का दौर जारी रहा. उत्तर प्रदेश का बांदा जिला और महाराष्ट्र का ब्रह्मपुरी क्षेत्र 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ देश के सबसे गर्म स्थान रहे. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी. आईएमडी के मानकों के अनुसार, मैदानी इलाकों में यदि अधिकतम तापमान 45 डिग्री से अधिक हो जाता है, तो उसे 'लू' घोषित किया जाता है, जबकि 47 डिग्री से ऊपर के तापमान को 'भीषण लू' की श्रेणी में रखा जाता है.

यूपी के कई शहरों में 45 से अधिक पारा
उत्तर प्रदेश के कम से कम छह शहर आईएमडी की उन स्थानों की सूची में शामिल हैं, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया. बांदा में सर्वाधिक तापमान 47.6 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.1 डिग्री अधिक है. इसके बाद झांसी में 46 डिग्री, उरई में 45.8 डिग्री, आगरा में 45.5 डिग्री, प्रयागराज में 45.4 डिग्री और हमीरपुर में 45.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा.
मौसम विभाग के मुताबिक, मंगलवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भीषण लू चलने की संभावना है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी दिन के समय लू की स्थिति बनी रहेगी. दोनों क्षेत्रों में रातें भी गर्म रहने का अनुमान है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही परामर्श जारी कर लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे के बीच बाहर निकलने से बचने, हल्के कपड़े पहनने और मौसमी फलों व तरल पदार्थों के जरिए शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने की सलाह दी है.
महाराष्ट्र के लिए आईएमडी ने विदर्भ क्षेत्र में दो दिनों के लिए लू का अलर्ट और उसके बाद 28 मई तक 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है. विदर्भ का ब्रह्मपुरी 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ देश का सबसे गर्म स्थान रहा, जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक है.
क्षेत्र के अन्य शहरों में नागपुर में 46.5 डिग्री, गढ़चिरौली और भंडारा में 46.4 डिग्री, गोंदिया में 46.1 डिग्री, वर्धा और झांसी में 46 डिग्री और अकोला में 45.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया.
इस भीषण गर्मी का कारण क्या है?
पूरी दुनिया में पड़ रही इस भीषण गर्मी के पीछे वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन हीटवेव, सूखा और बाढ़ जैसी चरम मौसम घटनाओं को और ज्यादा खतरनाक बना रहा है. इसी वजह से तापमान के रिकॉर्ड बार-बार टूट रहे हैं. पिछले हफ्ते जलवायु सलाहकारों ने ब्रिटेन सरकार को चेतावनी दी थी कि देश “ऐसे मौसम के लिए बना था जो अब मौजूद ही नहीं है.” उन्होंने स्कूलों और अस्पतालों जैसी इमारतों को बढ़ती गर्मी के हिसाब से बदलने की सलाह दी.
मौसम विज्ञान विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार जानलेवा गर्मी के पीछे वैश्विक कारकों के साथ-साथ कई स्थानीय कारण भी जिम्मेदार हैं. जिसमें लंबे समय से सूखा मौसम और आसमान में बादलों की कमी के कारण धूप सीधे और तीखी पड़ रही है. शहरों में कंक्रीट का जाल, घनी आबादी, वाहनों का धुआं, एयर कंडीशनर (AC) से निकलने वाली गर्मी और फैक्ट्रियों के कारण शहर कंक्रीट के तपते हुए द्वीप बन चुके हैं, जहाँ ग्रामीण इलाकों की तुलना में तापमान कई गुना ज्यादा दर्ज किया जा रहा है.

अल-नीनो और इसके इफेक्ट से क्यों पड़ती है गर्मी?
इस साल पड़ रही इस प्रचंड गर्मी के पीछे अल-नीनो को भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है. अल नीनो एक मौसम संबंधी प्राकृतिक जलवायु घटना है, यह घटना पूर्वी प्रशांत सागर में समुद्र का तापमान सामान्य से अधिक होने पर बनती है. अल-नीनो के असर से पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. पूर्वी प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म होने के साथ पूर्व की ओर बढ़ने लगता है, जिससे भारत के मौसम पर असर पड़ता है. ऐसी स्थिति में भयानक गर्मी का सामना करना पड़ता है.
सुपर अल नीनो की मार सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया भी सबसे ज्यादा झेलेंगे. भारत के लिए टेंशन इसलिए ज्यादा है क्यों कि पहले से ही देश के कई हिस्से सूखे की मार झेल रहे हैं. सुपर अल नीनो आने से हाल और भी बुरा हो सकता है.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, 2026 के मध्य से अल नीनो अपना असर दिखा सकता है, इसकी वजह से न सिर्फ दुनिया भर में भीषण गर्मी बरसेगी बल्कि बारिश का पैटर्न भी बुरी तरह प्रभावित होगा. सुपर अल नीनो की वजह से भारत में कुछ राज्य भी सूखे और गर्मी की डबल मार झेलेंगे.
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