हिमाचल की मंडी से सांसद कंगना रनौत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. जिस प्रकार से मंडी के अधिकारियों को उन्होंने फटकार लगाई और जिस तरह उन्होंने आरोप लगाए कि फंड का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, उसके बाद हिमाचल प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है.
हिमाचल प्रदेश सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री और पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह ने कंगना रनौत पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि अधिकारियों के साथ जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह स्वीकार नहीं की जा सकती.
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एनडीटीवी से बात करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कंगना रनौत किस प्रकार से बात करती हैं, यह पूरा देश जानता है, लेकिन सभी अधिकारियों को एक ही चश्मे से देखना सही नहीं है. उन्होंने इस बात को जरूर स्वीकार किया कि कुछ योजनाओं को अमल में लाने में देरी हो सकती है. यह भी हो सकता है कि सभी लोगों तक लाभ नहीं पहुंच रहा हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि सभी सरकारी अधिकारी गलत तरीके से काम कर रहे हैं या खराब प्रदर्शन कर रहे हैं.
जानकारी के लिए बता दें कि कंगना रनौत और विक्रमादित्य सिंह राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन अब चुनाव से ज्यादा दोनों के बीच जारी रस्साकशी इस बात को लेकर हो चुकी है कि विकास कार्यों में हो रही देरी के लिए जिम्मेदार कौन है-राज्य सरकार या फिर सांसद?
वैसे, जो दिशा का डेटा है, वह बताता है कि मंडी में 237 डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए 5.12 करोड़ रुपये दिए गए हैं, उसमें से 3.22 करोड़ रुपये खर्च भी किए जा चुके हैं. वहीं, 74 में से 68 प्रोजेक्ट मंडी जिले में ही मौजूद हैं. इसका सीधा मतलब है कि जो प्रोजेक्ट पेंडिंग हैं, उन पर तेजी लाने की जरूरत है. लेकिन ऐसा नहीं कहा जा सकता कि फंड का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं हो रहा है.
वैसे स्कूलों को लेकर भी कंगना और विक्रमादित्य के बीच तनातनी चल रही है. कंगना चाहती है कि संघ संचालित स्कूल हिमाचल में भी खुलने चाहिए, इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्कूली शिक्षा का विस्तार हो सकता है. लेकिन विक्रमादित्य सिंह का तर्क है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को राजनीतिक बैटलग्राउंड नहीं बनाना चाहिए. उनके मुताबिक, आरएसएस द्वारा जो स्कूल चलाए जा रहे हैं, वे एक विशेष विचारधारा से प्रेरित हैं.
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