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विठ्ठल भाई पटेल हाउस बन गया CJP से बातचीत का वेन्यू, जानिए क्या है इसकी कहानी?

सीजेपी और सरकार के बीच विठ्ठल भाई पटेल हाउस में बात हो रही है. जानिए इस ऐतिहासिक लोकतांत्रिक इमारत की अनकही कहानी.

विठ्ठल भाई पटेल हाउस बन गया CJP से बातचीत का वेन्यू, जानिए क्या है इसकी कहानी?
विठ्ठल भाई पटेल हाउस
  • नई दिल्ली के सत्ता केंद्र में रफी मार्ग पर स्थित दो इमारतें चर्चा में हैं.
  • CJP और केंद्र के बीच बात कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होनी थी, फिर इसे बदल कर विठ्ठल भाई पटेल हाउस कर दिया गया.
  • दोनों इमारतें संसद परिसर से कुछ ही दूरी पर हैं, पर इनसे लोकतांत्रिक इतिहास की अलग-अलग कहानियां जुड़ी हुई हैं.

सीजेपी और केंद्र सरकार के बीच प्रस्तावित बातचीत पहले कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में होनी थी, लेकिन इसका स्थान विठ्ठल भाई पटेल हाउस कर दिया गया. इसके कमरा नंबर 405 में यह बैठक हुई. ये दोनों इमारतें चंद कदमों के फासले पर हैं, हालांकि दोनों का इतिहास और महत्व अलग-अलग है. नई दिल्ली के सत्ता केंद्र में रफी मार्ग पर स्थित दो इमारतें चर्चा में हैं. पहले सीजेपी और केंद्र सरकार के बीच बातचीत कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसका स्थान बदलकर विठ्ठल भाई पटेल हाउस कर दिया गया. 

जहां संवाद को मिली संस्थागत पहचान

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया की स्थापना फरवरी 1947 में संविधान सभा के सदस्यों के बीच विचार-विमर्श और अनौपचारिक बैठकों के लिए की गई थी. संविधान निर्माण के दौर में यह जगह केवल एक क्लब नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद का केंद्र थी. आजादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही. पिछले करीब 80 वर्षों में यहां राजनीतिक दलों, सांसदों, सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और विभिन्न समूहों के बीच सैकड़ों महत्वपूर्ण बैठकें हुईं. संसद सत्र के दौरान भी यह इमारत राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहती है. 

अब बातचीत हो रही विठ्ठल भाई पटेल हाउस में...

शुक्रवार की सुबह बातचीत का वेन्यू बदल कर विठ्ठल भाई पटेल हाउस कर दिया गया. इसे आम तौर पर वीपी हाउस भी कहा जाता है. यह इमारत भी रफी मार्ग पर कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बिल्कुल पास स्थित है. पटेल चौक मेट्रो स्टेशन से कुछ ही कदम की दूरी पर मौजूद यह भवन आकाशवाणी भवन, कृषि भवन और संसद क्षेत्र के समीप होने के कारण दिल्ली की सबसे महत्वपूर्ण सरकारी लोकेशनों में गिना जाता है. यानी वेन्यू जरूर बदला पर बातचीत देश के उसी लोकतांत्रिक और प्रशासनिक केंद्र में हो रही है जहां संसद, मंत्रालय और प्रमुख सरकारी संस्थान मौजूद हैं.

साठ के दशक में बना था विठ्ठल भाई पटेल हाउस

दिल्ली के इतिहास के गूढ़ जानकार और वरिष्ठ पत्रकार विवेक शुक्ला बताते हैं कि विठ्ठल भाई पटेल हाउस का निर्माण 1960 के दशक में हुआ था. इस भवन की डिजाइन देश के प्रसिद्ध वास्तुकार हबीब रहमान ने तैयार की थी. हबीब रहमान ने दिल्ली के कई प्रतिष्ठित सरकारी भवनों और स्मारकों के निर्माण में योगदान दिया था. राजघाट के विकास, आरके पुरम के सरकारी भवनों और दिल्ली के कई सार्वजनिक ढांचों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. 

यह भवन मूल रूप से सांसदों और पूर्व सांसदों के आवास के रूप में विकसित किया गया था. लंबे समय तक जब सांसद दिल्ली आते थे तो उन्हें विठ्ठल भाई पटेल हाउस और वेस्टर्न कोर्ट में रहने की सुविधा दी जाती थी.

कई बड़े नेताओं का रहा ठिकाना

वर्षों तक यह भवन भारतीय राजनीति का जीवंत केंद्र बना रहा. यहां पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, मार्क्सवादी नेता सीताराम येचुरी, पूर्व राज्यपाल और लेखिका मृदुला सिन्हा सहित कई वरिष्ठ सांसद और नेता रह चुके हैं. राजनीतिक चर्चाओं, रणनीति बैठकों और सांसदों की अनौपचारिक मुलाकातों के कारण यह भवन लंबे समय तक दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों का अहम केंद्र बना रहा.

इतना ही नहीं, मशहूर सांस्कृतिक संस्था 'सहमत' का कार्यालय भी लंबे समय तक यहीं से संचालित होता रहा. इस कारण यह भवन राजनीति के साथ-साथ कला, संस्कृति और सामाजिक आंदोलनों की गतिविधियों का भी केंद्र बना.

कौन थे विठ्ठल भाई पटेल?

इस भवन का नाम भारत के महान संसदीय नेता विठ्ठल भाई झावरभाई पटेल के नाम पर रखा गया है. वे सरदार वल्लभभाई पटेल के बड़े भाई थे.

इंग्लैंड से कानून की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने बंबई में वकालत शुरू की. बाद में वे बॉम्बे विधान परिषद और फिर इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य बने.

1922 में चौरी-चौरा कांड के बाद जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस लिया तो विठ्ठल भाई पटेल ने कांग्रेस छोड़कर चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू के साथ स्वराज पार्टी की स्थापना की.

1924 में वे केंद्रीय विधानसभा के सदस्य चुने गए और 1925 में केंद्रीय विधानसभा के पहले भारतीय अध्यक्ष बने. यह उस दौर की सबसे बड़ी संसदीय उपलब्धियों में गिना जाता है.

संसदीय परंपराओं को दी नई दिशा

विठ्ठल भाई पटेल ने भारतीय संसदीय व्यवस्था को कई स्थायी परंपराएं दीं. उन्होंने संसद की सुरक्षा के लिए 'वॉच एंड वार्ड' व्यवस्था लागू कराई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था अध्यक्ष के नियंत्रण में रही. यह प्रणाली लगभग एक सदी तक प्रभावी रही.

1929 में जब भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका, तब ब्रिटिश सरकार संसद की सुरक्षा अपने हाथ में लेना चाहती थी. उस समय अध्यक्ष के रूप में विठ्ठल भाई पटेल ने संसदीय स्वायत्तता की रक्षा करते हुए अध्यक्ष के अधिकारों को कमजोर नहीं होने दिया.

उन्होंने स्वतंत्र संसद सचिवालय की स्थापना की नींव रखी, जिससे अध्यक्ष को स्वतंत्र सलाह और प्रशासनिक सहयोग मिल सका. विधानसभा के लिए अलग प्रशासनिक ढांचा तैयार कराने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. इसी योगदान के कारण उन्हें भारतीय संसदीय लोकतंत्र के प्रमुख संस्थापकों में गिना जाता है.

आज भी लोकतांत्रिक राजनीति का अहम पता

आज भले ही विठ्ठल भाई पटेल हाउस पहले की तरह सांसदों का प्रमुख आवास न रहा हो, लेकिन इसकी पहचान अब भी भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण पते के रूप में बनी हुई है.

दिल्ली की सत्ता के केंद्र में स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब और विठ्ठल भाई पटेल हाउस दोनों इस बात के प्रतीक हैं कि लोकतांत्रिक राजनीति केवल संसद के भीतर ही नहीं, बल्कि संवाद, चर्चा और सहमति की उन जगहों पर भी आगे बढ़ती है जहां अलग-अलग विचार एक मेज पर बैठते हैं. दोनों इमारतें अपने-अपने तरीके से भारत की संसदीय और लोकतांत्रिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.

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