- यूपी में SIR के बाद मतदाता सूची में कुल 2.89 करोड़ नाम हटाकर नई संख्या 12.55 करोड़ की गई है.
- राजधानी लखनऊ में मतदाताओं की संख्या 39.9 लाख से घटकर 27.9 लाख रह गई, जो सबसे बड़ी गिरावट है.
- बरेली में कुल 21 प्रतिशत मतदाताओं के नाम कटे गए, जिससे मतदाता संख्या 34 लाख से घटकर 26.9 लाख हुई है.
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची का संशोधित मसौदा जारी कर दिया गया है. राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस व्यापक शुद्धीकरण अभियान के सफल समापन के बाद प्रदेश में अब पात्र मतदाताओं की कुल संख्या 12.55 करोड़ दर्ज की गई है. इस प्रक्रिया के दौरान विभिन्न विसंगतियों को दूर करते हुए कुल 2.89 करोड़ नामों को मतदाता सूची से हटाया गया है.
किस जिले में कितने नाम काटे गए?
- सबसे ज्यादा राजधानी लखनऊ में मतदाताओं की संख्या में सबसे चौंकाने वाली गिरावट दर्ज की गई है. जब SIR की घोषणा की गई थी, तब लखनऊ में 39.9 लाख मतदाता थे. ड्राफ्ट लिस्ट के बाद यह संख्या घटकर अब मात्र 27.9 लाख रह गई है. करीब 30 प्रतिशत नाम काटे गए हैं.
- वाराणसी में लगभग 18% मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के नाम कटे हैं, उनके पास अभी भी फॉर्म 6 भरकर दोबारा जुड़ने का विकल्प मौजूद है. वहीं, ललितपुर में 27 सितंबर 2025 तक यहां 9.5 लाख मतदाता पंजीकृत थे, जो अब घटकर 8.6 लाख रह गए हैं. यह लगभग 9.95% की कमी है.
- बरेली में कुल 21 प्रतिशत यानी 7 लाख 16 हजार 509 मतदाताओं के नाम सूची से कटने का दावा सामने आया है. सबसे ज्यादा असर बरेली शहर और बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्रों में देखा गया है, जहां बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं. ड्राफ्ट लिस्ट के मुताबिक पहले जिले में कुल 34 लाख 5 हजार 64 मतदाता दर्ज थे, जो अब घटकर 26 लाख 91 हजार 67 रह गए हैं. मौजूदा सूची में 14 लाख 82 हजार 546 पुरुष, 12 लाख 8 हजार 468 महिला और 53 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं.
- SIR के बाद मुरादाबाद में कुल 20 लाख 71 हजार 844 मतदाता दर्ज किए गए हैं. इनमें से 1 लाख 96 हजार 201 मतदाताओं को लो-मैपिंग की श्रेणी में रखा गया है, जिन्हें नोटिस भेजे जाएंगे. जिन बूथों पर मतदाताओं की संख्या 1200 से अधिक थी, वहां नए बूथ भी बनाए गए हैं, जिनकी सूची सभी राजनीतिक दलों को दे दी गई है.
आंकड़ों के अनुसार, आगरा में 36.71 लाख मतदाताओं में से 9 लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, जिसके बाद अब वहां 27.63 लाख वोटर बचे हैं.
कानपुर में 10 विधानसभा क्षेत्रों से कुल 9,02,148 नाम हटाए गए हैं, जो कुल वोटरों का 25.50% है.
जौनपुर की 9 विधानसभाओं में भी भारी कटौती देखी गई है, जहां जौनपुर सदर से 1,04,501 और मड़ियाहूं से 1,12,686 नाम काटे गए हैं, जबकि शाहगंज, मुंगरा बादशाहपुर और मछलीशहर जैसे क्षेत्रों में भी 50 से 70 हजार के बीच नाम हटाए गए हैं.
बुंदेलखंड और पूर्वांचल के जिलों में भी सुधार का व्यापक असर दिखा है. झाँसी की चार विधानसभाओं में कुल 2,19,612 नाम काटे गए, जिनमें सर्वाधिक 65,905 नाम झांसी सदर से कम हुए हैं.
बांदा में मतदाताओं की संख्या 13.49 लाख से घटकर 11.74 लाख रह गई है, यानी यहां 1.75 लाख नाम हटाए गए. जालौन में 2.12 लाख और गाजीपुर में 4.08 लाख मतदाताओं के नाम लिस्ट से डिलीट हुए हैं.
बलिया में जिला प्रशासन ने करीब 4.50 लाख नाम हटाए हैं, जिसके बाद जिले में अब 20.54 लाख मतदाता ही शेष हैं.
इटावा में भी 2.33 लाख वोटरों की कटौती हुई है, जिससे यहां अब कुल 9,96,613 योग्य मतदाता बचे हैं.
रायबरेली में कुल 3.48 लाख हटाए गए नामों में 67,808 मृतक, 1.70 लाख स्थानांतरित और 29,336 डुप्लीकेट मतदाता शामिल थे. चंदौली में भी 2.30 लाख मतदाता सूची से बाहर हुए हैं.
गाजियाबाद के जिलाधिकारी के अनुसार, जिले में करीब 71.17 प्रतिशत (20,19,815) पुराने वोट सही पाए गए हैं, जबकि 28.84 फीसदी यानी 8,18,362 मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं. शहरी क्षेत्र और इंडस्ट्रियल टाउन होने के कारण यहां फ्लोटिंग पॉपुलेशन (आने-जाने वाली आबादी) अधिक है, जिस वजह से बड़ी संख्या में लोग अब अपने पुराने पते पर नहीं मिले. विधानसभावार देखें तो साहिबाबाद में सर्वाधिक 38.32% वोट कटे हैं, जबकि लोनी में 26%, गाजियाबाद सदर में 25.36%, मुरादनगर में 23.67% और मोदीनगर में 15.4% मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.
बागपत जिले में SIR प्रक्रिया के बाद कुल 1,77,300 मतदाता सूची से 'गायब' पाए गए हैं. पूर्व में यहां 9,76,798 मतदाता दर्ज थे, जो अब घटकर 7,99,499 रह गए हैं. विधानसभा के आंकड़ों के अनुसार, बड़ौत से 61,655, छपरौली से 59,247 और बागपत विधानसभा से 56,398 वोटरों के नाम हटाए गए हैं.
फतेहपुर जिले में भी जिला प्रशासन की ओर जारी रिपोर्ट के अनुसार, 6 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 3,15,468 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं. साल 2013 की तुलना में जहां यहां 19,32,442 मतदाता थे, वहीं 2025-26 के इस गहन सर्वे के बाद अब केवल 16,19,973 मतदाता ही शेष बचे हैं. प्रशासन के मुताबिक हटाए गए नामों में बड़ी संख्या मृतक और फर्जी वोटरों की है, जिनका डेटा सत्यापन के दौरान सही नहीं पाया गया.
FAQ: यूपी में कितने वोटरों के नाम कटे, कहां सबसे ज्यादा छंटे, SIR की हर बड़ी बात जानिए
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