- ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर पहली बार आधिकारिक दौरे पर भारत में हैं.
- भारत-ब्रिटेन के बीच विजन 2035 की समीक्षा और ऐतिहासिक एफटीए को जल्द लागू करने पर अहम चर्चा हो रही है.
- साथ ही व्यापार, रक्षा, तकनीक, AI, शिक्षा और सुरक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने की तैयारी है.
भारत और ब्रिटेन के रिश्तों को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर अपने पहले आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली में हैं. ऐसे समय में उनका यह दौरा हो रहा है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापार पर मंडरा रहे संकटों का सामना कर रही है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने उनके स्वागत के दौरान कहा कि यह दौरा भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का अवसर देगा. दोनों देशों के बीच आर्थिक, रक्षा, तकनीक, शिक्षा और सुरक्षा सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने पर चर्चा होगी.
A warm welcome to the Rt Hon Yvette Cooper, Secretary of State for Foreign and Commonwealth Affairs of the United Kingdom on her first official visit to India.
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) June 3, 2026
Her visit will provide an opportunity to further strengthen the India-UK Comprehensive Strategic Partnership.
🇮🇳🇬🇧 pic.twitter.com/KIYNh7gGQi
गुरुवार को यवेट कूपर की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से हुई. इस दौरान दोनों देशों ने पिछले वर्ष घोषित विजन 2035 रोडमैप की प्रगति की समीक्षा की और आने वाले वर्षों की प्राथमिकताओं पर चर्चा की.
Vision 2035 आखिर है क्या?
विजन 2035 भारत और ब्रिटेन के बीच अगले दशक की रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप है. इसे पिछले साल भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने संयुक्त रूप से पेश किया था. ब्रिटेन सरकार के आधिकारिक विजन 2023 के डॉक्युमेंट में इसका उद्देश्य दोनों देशों के सहयोग को व्यापार से आगे बढ़ाते हुए रक्षा, तकनीक, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, इनोवेशन और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों तक विस्तार देना बताया गया है. यानी आने वाले 10 वर्षों में भारत और ब्रिटेन किन क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे, जिसकी रूपरेखा इसी दस्तावेज में तय की गई है.
FTA को लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है?
यवेट कूपर के दौरे का सबसे बड़ा एजेंडा भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता को आगे बढ़ाना माना जा रहा है. ब्रिटेन का कहना है कि भारत उसकी सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक है. इसी कड़ी में हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द लागू करने की दिशा में भी बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी.
भारत और ब्रिटेन ने जुलाई 2025 में ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. अब दोनों देश इसे जल्द से जल्द पूरी तरह लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं. ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक आकलन के मुताबिक, इस समझौते से दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार में लगभग 25.5 अरब पाउंड की वृद्धि हो सकती है. वहीं दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को करीब 5 अरब पाउंड तक का अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने का अनुमान है. जानकार मानते हैं कि इससे भारतीय निर्यातकों, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और सेवा क्षेत्र को नए अवसर मिल सकते हैं.

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर
Photo Credit: PIB
AI और टेक्नोलॉजी पर इतना जोर क्यों?
दुनिया इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकों की दौड़ में है. भारत और ब्रिटेन दोनों इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं. ब्रिटिश हाई कमीशन के मुताबिक, यवेट कूपर अपने दौरे के दौरान AI और हेल्थ-टेक क्षेत्र के उद्यमियों से मुलाकात भी करेंगी. साथ ही टेक्नोलॉजी सुरक्षा पहल के तहत नई साझेदारियों और निवेश को भी बढ़ावा दिया जाएगा. ब्रिटेन सरकार के विजन 2035 डॉक्युमेंट के मुताबिक, दोनों देश AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और उन्नत अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं. भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और तकनीकी कंपनियों को वैश्विक अवसर मिल सकते हैं.
रक्षा और सुरक्षा सहयोग में क्या है नया?
दोनों देश सुरक्षा और रक्षा सहयोग को भी नई ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं. ब्रिटेन सरकार के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 10 वर्षीय रक्षा उद्योग साझेदारी पर काम चल रहा है. इसके अलावा आतंकवाद, साइबर अपराध, संगठित अपराध और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है.
इन समझौतों का आमजनों को सीधा फायदा मिलेगा, कैसे?
जब कोई दो देश आपस में कोई समझौता करते हैं तो उसके लाभार्थियों में आमजन भी होते हैं. अगर एफटीए और विजन 2035 अपनी तय योजना के तहत आगे बढ़ती हैं तो इससे भारतीय स्टूडेंट्स के लिए अवसर बढ़ सकते हैं. स्टार्टअप्स को इन्वेस्टर्स मिल सकते हैं, भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन के बाजारों में अवसर मिल सकते हैं. और सबसे अहम कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
तेजी से बदलते जियो पॉलिटिक्स और आर्थिक बदलाव से गुजरती दुनिया में दोनों देश अपने भूमिका और भागीदार को मजबूत करना चाहते हैं.
ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडे कैमरन ने कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत-ब्रिटेन की साझेदारी स्थिरता का मजबूत स्तंभ बनकर उभरी है. उनका मानना है कि तकनीक, व्यापार और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ेगा.
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