- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि UGC के नए नियमों का किसी भी तरह से दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा
- धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया कि नियमों के कारण किसी के साथ उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होगा
- नए नियम संविधान के दायरे में बनाए गए हैं और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में लागू किए गए हैं
UGC के नए नियमों को लेकर जारी बवाल के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया आ गई है. उनका दावा है कि किसी को भी इन नियमों का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं दिया जाएगा. धर्मेंद्र प्रधान की ये प्रतिक्रिया तब आई है, जब UGC के नियमों को लेकर देशभर में जमकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. बीजेपी में भी इसे लेकर नाराजगी बढ़ गई है और कई नेता इस्तीफा दे चुके हैं. हालांकि, अब धर्मेंद्र प्रधान ने साफ किया है कि किसी के साथ भी कोई भेदभाव नहीं होगा.
धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?
नियमों को लेकर हो रहे बवाल को लेकर जब धर्मेंद्र प्रधान से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं आश्वस्त करना चाहता हूं किसी का उत्पीड़न नहीं होगा और न ही किसी के साथ कोई भेदभाव किया जाएगा. उन्होंने साफ किया कि भेदभाव के नाम पर किसी को भी इन नियमों का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं मिलेगा.
#WATCH | On new regulation of UGC, Union Education Minister Dharmendra Pradhan says," I assure everyone there will be no discrimination and no one can misuse the law." pic.twitter.com/0ZRgWaU76H
— ANI (@ANI) January 27, 2026
धर्मेंद्र प्रधान ने ये भी कहा कि जो नियम बनाए गए हैं, वो संविधान के दायरे में बनाए गए हैं. सबकुछ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किया गया है. उन्होंने कहा कि किसी के ऊपर कोई अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा.
सरकार भी हुई एक्टिव
इससे पहले खबर आई थी कि सरकार भी जल्द ही इन नियमों को लेकर आश्वासन जारी कर सकती है. सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया था कि UGC के नियमों को लेकर भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं और सरकार जल्द ही आश्वासन दे सकती है कि किसी भी सूरत में इनका दुरुपयोग होने नहीं दिया जाएगा. सरकार की कोशिश है कि सभी तथ्य सामने रखे जाएं, ताकि किसी तरह का कोई भ्रम न हो.
क्या है पूरा बवाल?
विश्वविद्याल अनुदान आयोग यानी UGC ने 13 जनवरी को नए नियम लागू किए हैं. ये नियम कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए लाए गए हैं. इन्हीं नियमों को लेकर बवाल हो रहा है. सवर्ण समुदाय के लोग इन नियमों का विरोध कर रहे हैं. सवर्ण संगठनों का कहना है कि इससे सामान्य वर्ग के छात्रों का कॉलेज-यूनिवर्सिटी में पढ़ना मुश्किल हो जाएगा. उनका दावा है कि इन नियमों के जरिए सामान्य वर्ग के छात्रों को निशाना बनाया जा सकता है.
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