- यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए सवर्ण सेना के सदस्यों ने यूजीसी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया
- सवर्ण सेना ने यूजीसी चेयरमैन से बातचीत के बाद 15 दिन का अल्टिमेटम देते हुए प्रदर्शन स्थगित कर दिया
- उन्होंने कहा- नए नियमों में झूठी शिकायतों के खिलाफ सजा का प्रावधान नहीं हैं जिससे गलत इस्तेमाल की आशंका है
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियम का सवर्ण संगठन जोरदार विरोध कर रहे हैं. मंगलवार को सवर्ण सेना ने यूजीसी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. हालांकि यूजीसी चेयरमैन से मुलाकात के बाद 15 दिनों का अल्टिमेटम देते हुए प्रदर्शन स्थगित कर दिया. उधर प्रमुख वामपंथी संगठन AISA ने UGC के नए नियम का स्वागत किया है, लेकिन समानता समिति में हिस्सेदारी जैसे कुछ मुद्दों पर यूजीसी से रुख स्पष्ट करने की मांग की है. चौंकाने की बात ये है कि बीजेपी और कांग्रेस की छात्र इकाइयों ने अभी तक इस मसले पर चुप्पी साध रखी है. ABVP और NSUI की तरफ से कोई बयान नहीं आया है.
'झूठी शिकायतों से निपटने का इंतजाम नहीं'
यूजीसी मुख्यालय पर सुरक्षा के इंतजाम के बावजूद प्रदर्शनकारी मुख्यालय तक पहुंचने में कामयाब रहे. सवर्ण संगठनों का दावा है कि ये नए नियम सवर्ण छात्रों के हितों के खिलाफ हैं और इनसे 'रिवर्स बायस' यानी उल्टे भेदभाव की स्थिति पैदा हो सकती है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नियमों में झूठी शिकायतों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधानों की कमी है, जिससे निर्दोष छात्रों या शिक्षकों को बिना सबूत के टारगेट किया जा सकता है. ये नियम सिर्फ SC, ST और OBC छात्रों को सुरक्षा देते हैं जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों से होने वाले भेदभाव को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. नए नियमों में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के खिलाफ जुर्माने या दंड का प्रावधान भी हटा दिया गया है, जिससे छात्रों को डर है कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है.
'निगरानी कल्चर को बढ़ावा देंगे नए नियम'
कुछ शिक्षाविद विश्वविद्यालयों में इक्विटी स्क्वॉड और निगरानी तंत्र की स्थापना को सर्विलांस कल्चर के रूप में देख रहे हैं, जो शैक्षणिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है. संगठनों का आरोप है कि यह नियम केवल विशेष वर्गों को सुरक्षा देते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के लिए भेदभाव के खिलाफ कोई स्पष्ट सुरक्षा कवच नहीं रखा गया है. ढाई घंटे के प्रदर्शन के बाद UGC चेयरमैन विनीत जोशी से बातचीत के बाद सवर्ण सेना ने अपना प्रदर्शन खत्म कर दिया. शिवम सिंह ने कहा कि UGC को पंद्रह दिन का वक्त दिया गया है. अगर ये नियम वापस नहीं हुआ तो फिर से प्रदर्शन किया जाएगा.
यूजीसी को दिया 15 दिन का अल्टिमेटम
प्रदर्शन के दौरान सवर्ण सेना के सह-संस्थापक शिवम सिंह ने सरकार से स्पष्ट आश्वासन की मांग की. उन्होंने कहा कि अगर सरकार ये गारंटी दे कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों का नुकसान नहीं होगा तो वो अपना आंदोलन टालने को तैयार हैं. हालांकि वो इस बात का जवाब नहीं दे पाए कि जातिगत भेदभाव की शिकायतें क्यों बढ़ रही हैं? 2017-18 में जातिगत भेदभाव के 173 मामले दर्ज हुए थे, जो 2023-24 में बढ़कर 378 हो गए.
वामपंथी संगठन की संशोधन की मांग
वहीं, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने यूजीसी के नए नियम का समर्थन किया है. मांझी का कहना है जातिगत भेदभाव के बारे में लगातार शिकायत मिलने के बाद ये प्रावधान किया गया है. प्रमुख वामपंथी संगठन AISA ने भी UGC के नए नियम का स्वागत करते कहा कि वह इस नए नियम का मोटे तौर पर समर्थन करते हैं, लेकिन अभी भी कुछ प्रावधानों में यूजीसी का रुख स्पष्ट नहीं है. मसलन समानता समिति में दलित, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं की हिस्सेदारी के बारे में साफ रुख नहीं किया गया है. AISA की मांग है कि समानता समिति में SC/ST, OBC और महिलाओं को ही रखा जाए ताकि जातीय भेदभाव की शिकायतों का निपटारा अच्छे से किया जा सके. AISA की अध्यक्ष नेहा ने कहा कि वो भले ही यूजीसी के नियम का समर्थन करती हैं लेकिन इसमें संशोधन होगा, तभी वंचित समाज के छात्रों के साथ न्याय होगा.
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