- टोनबो इमेजिंग को नौसेना के लिए हाई पावर माइक्रोवेव आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित करने का अनुबंध मिला है.
- ADITI 3.0 इनोवेशन स्कीम के तहत रक्षा मंत्रालय के iDEX और Defence Innovation Organisation द्वारा समर्थित है.
- HPM इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा का उपयोग कर ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक्स को बाधित कर बिना विस्फोट के निष्क्रिय करता.
बेंगलुरु स्थित रक्षा तकनीक कंपनी टोनबो इमेजिंग को भारतीय नौसेना से एक महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट मिला है. इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी नौसेना के लिए हाई पावर माइक्रोवेव (HPM) आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित करेगी. यह परियोजना ADITI 3.0 इनोवेशन स्कीम के अंतर्गत दी गई है, जिसे रक्षा मंत्रालय के iDEX और Defence Innovation Organisation (DIO) का समर्थन प्राप्त है. इस अनुबंध के तहत टोनबो सिस्टम के इंटीग्रेशन और कमीशनिंग का काम भी संभालेगी. विकास और परीक्षण पूरा होने के बाद इसकी कई यूनिट्स का उत्पादन किया जाएगा.
HPM सिस्टम को Directed Energy Weapon की श्रेणी में रखा जाता है. इसमें पारंपरिक हथियारों जैसे गोलियों या मिसाइलों के बजाय इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा का उपयोग किया जाता है. यह तकनीक दुश्मन के ड्रोन, सेंसर और कम्युनिकेशन सिस्टम के इलेक्ट्रॉनिक्स को बाधित कर सकती है, जिससे बिना किसी बड़े विस्फोट के ड्रोन को निष्क्रिय किया जा सकता है. वर्तमान में अमेरिका, चीन, रूस और ब्रिटेन जैसे कुछ ही देशों के पास उन्नत HPM तकनीक उपलब्ध है.
हाल के वर्षों में ड्रोन स्वॉर्म यानी बड़ी संख्या में छोटे और सस्ते ड्रोन के एक साथ हमले से खतरा तेजी से बढ़ा है. यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों में इनका व्यापक इस्तेमाल देखने को मिला है. पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए ऐसे बड़े हमलों को रोकना महंगा और जटिल माना जाता है, इसलिए Directed Energy Weapons को एक किफायती और प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है.
टोनबो इमेजिंग के सीईओ अरविंद लक्ष्मीकुमार ने बताया कि कंपनी पिछले कई वर्षों से स्वदेशी HPM तकनीक पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि कंपनी ने वैक्यूम ट्यूब आधारित हाई-पावर RF तकनीक विकसित की है, जो इस तरह के हथियारों का अहम हिस्सा होती है. कंपनी के पास इस तकनीक से जुड़ी महत्वपूर्ण बौद्धिक संपदा (IP) भी मौजूद है. ADITI (Advanced Defence Technology Incubation) योजना का उद्देश्य नई रक्षा तकनीकों को तेजी से सशस्त्र बलों तक पहुंचाना है. सरकार निजी कंपनियों को हाई-एंड रक्षा क्षेत्र में शामिल करके आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ा रही है. इसके तहत भारतीय नौसेना भी अपने आधुनिकीकरण कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और नॉन-काइनेटिक हथियारों पर विशेष ध्यान दे रही है.
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