ये हैं 3 वजह... जिससे फ्रांस में फंसे भारतीयों को छोड़ने का लिया गया निर्णय

फ्रांसीसी अधिकारियों ने ‘मानव तस्करी’ के संदेह में पेरिस के पास एक हवाई अड्डे पर तीन दिन से रोका गया विमान आज उड़ान भर सकेगा. विमान में 303 यात्री सवार हैं, जिनमें अधिकतर भारतीय हैं.

खास बातें

  • 280 भारतीयों को फ्रांस छोड़ने की इजाज़त दे दी गई है
  • विमान में 13 नाबालिग बच्चे बिना अभिभावक के यात्रा कर रहे थे
  • सभी भारतीयों के पास वैध पासपोर्ट है और वे निकारागुआ की यात्रा की पात्रता
नई दिल्‍ली :

फ्रांस के वैट्री एयरपोर्ट  (Vatry Airport) पर रोके गए भारतीयों (Indian Passengers) को छोड़ा जा रहा है. न्यूज़ एजेंसी एएफपी के हवाले से ये जानकारी आयी है. पहले ये कहा गया कि भारतीय यात्री अपनी आगे की यात्रा कर सकेंगे, लेकिन फिर जानकारी आयी कि इनको मुंबई भेजा जा रहा है. लीजेंड एयरलाइन्स की वकील की तरफ़ से दी गई जानकारी के मुताबिक, 280 भारतीयों को फ्रांस छोड़ने की इजाज़त दे दी गई है. 10 भारतीयों ने फ्रांस में शरण मांगी है, इसलिए वे फ्रांस में रुके रहेंगे.

सिर्फ 280 भारतीयों को जाने की इजाज़त..!

एयरलाइन्स की वकील ने बताया, "दो लोगों मानव तस्करी के शक के आधार पर हिरासत में लिया गया है. ज़ाहिर है कि उनको अभी फ्रांस में ही रखा जाएगा. विमान में 13 नाबालिग बच्चे बिना अभिभावक के यात्रा कर रहे थे. जानकारी है कि इनमें से 11 बच्चों को स्पेशल केयर में रखा गया है. इस तरह 303 में बाक़ी बचे 280 भारतीयों को जाने की इजाज़त दी गई है. विमान पर कुल 303 मुसाफ़िर थे, जो संयुक्त अरब अमीरात से निकारागुआ जा रहे थे. ईंधन भराने के लिए जब ये विमान फ्रांस के वैट्री एयरपोर्ट पर उतरा, तो इसे मानव तस्करी की एक गुप्त सूचना के आधार पर रोक लिया गया. शक ये जताया गया था कि इस चार्टर विमान के ज़रिए भारतीय संयुक्त अरब अमीरात से निकारागुआ के रास्ते अमेरिका या कनाडा जाने की फिराक में हैं." बता दें कि सभी यात्रियों को विमान से उतार कर एयरपोर्ट बिल्डिंग के हॉल में रखा गया और सोने से लेकर खाने तक की हर तरह की व्यवस्था की गई. इस दौरान मानव तस्करी के एंगल से जांच पड़ताल चलती रही. 

क्‍या कहता है फ्रांस का नियम...?

फ्रांस का कानून है कि वहां, विमान को 4 दिनों से अधिक रोका नहीं जा सकता. किसी जज के आदेश के बाद ही उसे 8 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है. इस मामले में वैट्री एयरपोर्ट पर पहुंच कर जज ने मुसाफ़िरों का पक्ष सुना. ज़रूरी कागज़ातों को तैयार करने और जज के सामने मामले को लाए जाने में देरी को जज ने ध्यान में रखा और मूलभूत अधिकारों का हवाला देते हुए भारतीयों को जाने की इजाज़त दे दी.

लीजेंड एयरलाइन्स की ओर से दी गई से दलील

- सभी भारतीयों के पास वैध पासपोर्ट है और वे निकारागुआ की यात्रा की पात्रता रखते हैं. 
- यात्रियों की पृष्ठभूमि की जांच उसकी ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि उस पार्टनर कंपनी की है जिसने इस विमान को किराया पर लिया.
- लीजेंड एयरलाइन्स कभी भी मानव तस्करी में शामिल नहीं रहा है.
- एयरलाइन्स के 15 चालक दल को पूछताछ के बाद पहले ही छोड़ दिया गया था. 

इन 3 वजहों से छूटे भारतीय

गुरुवार को जैसे ही भारतीयों को वैट्री एयरपोर्ट पर रोके जाने की जानकारी आयी थी, वैसे ही पेरिस में भारत का दूतावास सक्रिय हो गया था. कांसुलर अधिकारियों को तुरंत वैट्री एयरपोर्ट भेज दिया गया था, ताकि क़ानूनी सहायता दी जा सके. भारतीय दूतावास फ्रांस की ऑथोरिटीज़ के साथ बातचीत करके मामले को जल्दी सुलझाने की कोशिश में लगी रही. फ्रांस के नियम, भारतीय दूतावास की मदद और मौलिक अधिकारों के प्रति जज का रवैया ये तीन प्रमुख वजह रही कि अधिकतर भारतीयों को फ्रांस छोड़ने की इजाज़त दी गई है.

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

ये भी पढ़ें :- "एक बच्चे की तरह रोना...": मिमिक्री विवाद के बीच तृणमूल सांसद का जगदीप धनखड़ पर तंज