सीमा पर तैनात हमारे ड्रोन अब सिर्फ दुश्मन की जासूसी नहीं करेंगे, बल्कि खुद को हैकिंग से बचाने के लिए 'डिजिटल अभेद्य' भी बनेंगे... पिछले साल LAC पर एक इजरायली तकनीक वाले ड्रोन पर चीनी सेना के रहस्यमयी नियंत्रण ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए...जवाब में, रक्षा मंत्रालय ने एक ऐसी सुरक्षा दीवार खड़ी कर दी है जिसे लांघना बीजिंग के लिए नामुमकिन होगा.ये लड़ाई अब सिर्फ सरहद की नहीं, बल्कि ड्रोन के भीतर छिपी उस 'चीनी चिप' की है जो सूचनाएं लीक कर सकती है.
रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन के लिए नई सुरक्षा जांच व्यवस्था लागू की है. अब हर ड्रोन को 20 बिंदुओं की जांच पास करनी होगी. तभी उसे सेना में शामिल किया जाएगा.यह कदम एक बड़ी चिंता को दूर करने के लिए उठाया गया है. वजह है कि कई ड्रोन “मेड इन इंडिया” होते हैं. लेकिन उनके अंदर चीनी हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर होता है. ऐसे ड्रोन को “ट्रोजन हॉर्स” जैसा खतरा माना जा रहा है. पिछले साल एक भारतीय ड्रोन चीन सीमा के पास भटक गया था. वह चीन के कब्जे वाले इलाके में चला गया.
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20 टेस्ट का नियम क्या है
कंपनियों को 10 हार्डवेयर और 10 सॉफ्टवेयर टेस्ट पास करने होंगे. हार्डवेयर टेस्ट में चिप जांच, सुरक्षा, सिक्योर बूट, PCB जांच और एन्क्रिप्शन शामिल है. वही सॉफ्टवेयर टेस्ट में एन्क्रिप्शन की मजबूती, मेमोरी सुरक्षा, सुरक्षित सिस्टम और डेटा सुरक्षा शामिल है.8 अहम पार्ट्स पर खास ध्यान रहेगा. जैसे फ्लाइट कंट्रोलर, GPS मॉड्यूल, सेंसर,ट्रांसमिशन यूनिट और ग्राउंड कंट्रोल सॉफ्टवेयर. यह नियम फिलहाल छोटे ड्रोन पर लागू होगा. जैसे नैनो, माइक्रो और छोटे क्वाडकॉप्टर.आगे चलकर इसे बड़े ड्रोन तक बढ़ाया जाएगा. इसमे टेस्टिंग और नियम पालन होगा.
अब ड्रोन की जांच भारत की मान्यता प्राप्त लैब में होगी. अभी क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ही पूरी जांच कर सकता है.सिकंदराबाद में नई टेस्टिंग सुविधा भी बन रही है. इसमें गलत जानकारी देने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई होगी. उन्हें तुरंत बैन किया जा सकता है.सरकार एक केंद्रीय डेटा बेस भी बनाएगी. जिसमें सभी मंजूर कंपनियों की सूची होगी. यह भी माना गया है कि भारत में चिप निर्माण अभी लंबी प्रक्रिया है.
पहले इस्तेमाल होने वाला CHIMS सॉफ्टवेयर नवंबर 2024 से बंद हो चुका है. इससे सप्लाई चेन की निगरानी अभी भी चुनौती बनी हुई है. तकनीक की इस रेस में भारत अब केवल 'असेंबलर' नहीं बल्कि एक 'सर्टिफायर' की भूमिका में आ गया है.भले ही चिप निर्माण की राह लंबी हो, लेकिन सप्लाई चेन की सख्त निगरानी और कड़ी टेस्टिंग नियमों ने साफ कर दिया है कि भारत अपनी आसमानी सरहदों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करेगा.
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